अगर इस बैंक में है खाता तो तुरंत बदलवा लें अपना चेकबुक-पासबुक, वरना बढ़ सकती है परेशानी
नई दिल्ली। निजी सेक्टर के बैंक आईडीएफसी और नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनी कंपनी कैपिटल फर्स्ट का विलय आज से लागू हो गया है। आज से आईडीएफसी बैंक अब आईडीएफसी फर्स्ट बैंक बन गया है। बैंक के इस मर्जर से 24 लाख ग्राहक प्रभावित होंगे, वहीं बैंक को उम्मीद है कि आगे आने वाले 2 सालों में वो बेहतर स्थिति में होंगे। इस मर्जर के बाद बैंक के कस्टमर संख्या में बढ़ोतरी होगी। बैंक के एमडी और सीईओ वी वैद्यनाथन होंगे। आपको बता दें कि मौजूदा समय में आईडीएफसी की करीब 200 शाखाएं हैं। बैंक के मर्जर से इसके ग्राहकों पर क्या असर होगा, इसके बारे में जानते हैं...

अगर आपका खाता है तो क्या होगा आप पर असर
बैंक के सीईओ के मुताबिक बैंक के मर्जर से उसके ग्राहकों पर कोई असर नहीं होगा। वहीं जानकारों के मुताबिक इस मर्जर का बैंक के ग्राहकों को बहुत असर नहीं होगा। उनके खाते या लेन-देन पर कोी असर नहीं होगा। हालांकि उन्हें अपना चेकबुक और अपना पासबुक बदलवाना होगा। इसके लिए बैंक उन्हें पर्याप्त समय देगा। बैंक खुद चेकबुक और पासबुक बदल देता है। बैंक की ओर से इसके लिए लोगों को पर्याप्त समय दिया जाएगा, जिसमें उन्हें बैंक जाकर अपना पुराना चेकबुक और पासबुक बदलवा कर नया चेकबुक इशू करवाना होगा।

बैंक दे रहा है जानकारी
बैंक ने इसके लिए तैयारी कर रखी है। वो अपने ग्राहकों को बैंक के मर्जर को लेकर लगातार जानकारी दे रहा है। वहीं पासबुक, चेकबुक बदलवाने के लिए वो अपने ग्राहकों को एसएमस, ईमेल और फोन के जरिए जानकारी दे रहा है। बैंक की वेबसाइट पर भी इसे लेकर जानकारी दी जा रही है।

मर्जर से किसे होगा फायदा ?
बैंक के इस मर्जर को लेकर जानकार मान रहे हैं कि इससे आईडीएफसी बैंक को सबसे ज्यादा लाभ होगा। 2014 में आईडीएफसी बैंक को लाइसेंस मिला था। इस मर्जर से बैंक को अपनी बैलेंस शीट और मजबूत करने में मदद मिलेगी। कस्टमर बेस मजदूत होगा। बैंक को अपना हाउसिंग फाइनेंस बिजनेस बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। बैंक ने उम्मीद जताई है कि अगल 5 साल में बैंक की रिटेल लोन बुक 1 लाख करोड़ रुपये की होगी। बैंक को उम्मीद है कि अगले 3-4 साल में बैंक की आरओई डबल डिजिट की होगी।












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