ICICI और PNB ने MCLR दरों में किया बदलाव, बदलेगी आपकी EMI
1 जून से ICICI और PNB ने MCLR दलों में बदलाव किया है। इस बदलाव का सीधा असर आपके अलग-अलग लोन की ईएमआई पर देखने को मिलेगा।

MCLR: प्राइवेट सेक्टर का बैंक आईसीआईसीआई और सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक ने अपने एमसीएलआर दरों में बदलाव किया है। आईसीआईसीआई बैंक ने कुछ लोन दरों पर कटौती की है जबकि कुछ में बढ़ोत्तरी की है। वहीं पंजाब नेशनल बैंक ने सभी लोन अवधि पर एमसीएलआर दरों को बढ़ा दिया है।
आईसीआईसीआई की एमसीएलआर दरें 1 जून से प्रभावी होंगी। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी गई है। आईसीआईसीआई बैंक ने एक महीने की एमसीएलआर दर को 8.50 फीसदी से घटाकर 8.35 फीसदी कर दिया है।
साथ ही तीन महीनों की एमसीएलआर में 15 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, जोकि अब 8.55 से घटकर 8.40 फीसदी हो गई है। छह महीने व एक साल के एमसीएलआर की बात करें तो इसे 5 बेसिस प्वाइंट बढ़ा दिया है और इसे 8.75 से 8.85 फीसदी कर दिया गया है।
वहीं पीएनबी के एमसीएलआर रेट की बात करें तो यह भी 1 जून 2023 से प्रभावी हो गई है। बैंक ने 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी की है। पीएनबी की वेबसाइट के अनुसार एक दिन का एमसीएलआर रेट 9.10 फीसदी हो गया है जोकि पहले 8 फीसदी था।
एक महीने के लिए, तीन महीने के लिए और छह महीने के लिए इसे 8.20 फीसदी, 830 फीसदी, 8.50 फीसदी कर दिया गया है। वहीं एक साल के लिए एमसीएलआर को 8.60 फीसदी से बढ़ाकर 8.80 फीसदी कर दिया गया है।
इन दरों में बदलाव होने से जिन लोगों ने बैंक से कर्ज लिया है, उनकी ईएमआई में बदलाव आएगा और यह अब बढ़कर जाएगी। ऐसे में अगर आप अपना होम लेन समय से पहले चुका देते हैं तो आप इस बोझ से बच सकते हैं। बैंक होम लोन पर अधिक ब्याज वसूलते हैं।
समच से पहले होम लोन चुकाने का एक नुकसान यह भी है कि हर साल 2 लाख के होम लोन पर आयकर में मिलने वाली छूट से आप वंचित रह जाएंगे। इसकी मदद से आप 40 से 60 हजार रुपए का टैक्स बचाते हैं। लिहाजा यह टैक्स लाभ आप से दूर जा सकता है।
क्या है MCLR (Marginal Cost Base Lending Rates)
बैंक अपने ग्राहकों को अलग-अलग ब्याज दरों पर लोन मुहैया कराते हैं। ऐसे में एमसीएलआर वह दर होती है जिसे बैंक खुद से तय करते हैं और इससे कम ब्याज दर पर लोन नहीं दे सकते है।
यानि किसी बैंक का एमसीएलआर 7 फीसदी है तो वह इससे सस्ता लोन नहीं दे सकता है। इसकी शुरुआत 2016 में बैंकों में पारदर्शिता के लिए शुरू की गई थी। ऐसे में जब भी कोई बैंक एमसीएलआर को बढ़ाता है तो लोगों की ब्याज दरें बढ़ती हैं और इसका असर ईएमआई पर पड़ता है।












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