उंची महंगाई से चावल की कम हो रही खपत, खरीदना छोड़ रहे लोग

सब्सिडी वाला चावल चाहते हैं लोग
खुले बाजार में चावल महंगे होने से चावल खरीदने से बच रहे शहरी व ग्रामीण परिवार अब राशन से मिलने वाले चावल पर फोकस कर रहे हैं। जिसका उदाहरण है कि एनएसएसओ की रोपर्ट के मुताबिक पिछले कुष वर्षों में राशन की दुकान से सब्सिडीयुक्त चावल की खपर बढ़कर दौगुनी हो गई है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग महंगाई से त्रस्त आकर या तो चावल का विकल्प तलाश रहे हैं या फिर सस्ता चावल।
सब्सिडी से इतना सस्ता मिलता है चावल
केंद्र सरकार चावल को गरीबी रेखा के उपर के परिवारों के लिए 8.30 रुपये प्रति किलो, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 5.65 रुपये प्रति किलो और अंत्योदय अन्न योजना के तहत 3 रुपये प्रति किलो की दर पर राज्यों को चावल मुहैया कराती है। सभी परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर माह 35 किलो चावल और गेहूं मुहैया कराया जाता है। NSSO का सर्वेक्षण 2011-12 के दौरान 7,469 गांवों और 5,268 शहरी ब्लाकों में 1,01,651 परिवारों से प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।












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