OPS Vs NPS: केंद्र ने पेंशन सिस्टम को लेकर गठित की समिति, जानें एनपीएस और ओपीएस में कौन है बेहतर?

OPS Vs NPS: केंद्र सरकार ने नई पेंशन स्कीम की समीक्षा के लिए कमेटी गठित की है। जो यह सुझाव देगी कि, नई पेंशन व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत है या नहीं।

 OPS Vs NPS

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था की समीक्षा के लिए गुरुवार को एक समिति का गठन किया है। पेंशन व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित समिति का अध्यक्ष वित्त सचिव टी वी सोमनाथन को बनाया गया है।

यह समिति सरकार को सुझाव देगी कि क्या सरकारी कर्मचारियों पर लागू राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के मौजूदा ढांचे में कोई बदलाव करना चाहिए या नहीं। समिति राजकोषीय स्थिति और समग्र बजटीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए संशोधन करने पर सुझाव देगी।

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वित्त सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में गठित इस चार सदस्ययी समिति में सचिव, कार्मिक, विशेष सचिव, कार्मिक एवं पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष को शामिल किया गया है। समिति राज्यों से विचार भी मांगेगी और एनपीएस के लाभार्थियों के लिए पेंशन लाभों को संशोधित करने या सुधारने के उपाय सुझाएगी।

कई राज्यों के कर्मचारी मौजूदा पेंशन सिस्टम में बदलाव की मांग कर रहे हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित कुछ राज्य पहले ही पुरानी पेंशन योजना में वापस आ गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) अच्छी है या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस)?

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राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस)

एनपीएस एक सरकार समर्थित पेंशन योजना है। जो सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय प्राप्त करने में मदद करती है। जिसमें निवेश करके रिटायमेंट के लिए अच्छा पैसा बनाया जा सकता है।

ये योजना आपके रिटायरमेंट प्लानिंग को और आसान बनाती है। इस स्कीम के तहत 18 से 70 साल के बीच कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है। मैच्योरिटी पर 60 फीसदी की राशि इस योजना से निकाली जा सकती है और बाकी के राशि से वार्षिकी खरीदकर निवेश कर सकते हैं।

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नेशनल पेंशन योजना के तहत दो अकाउंट खोले जाते हैं टीयर-1 और टीयर 2

टीयर-1 एक अनिवार्य खाता है जिसे व्यक्तियों को एनपीएस योजना में भाग लेने के लिए खोलना होता है। यह एक दीर्घकालिक निवेश खाता है। इसे व्यक्ति के 60 वर्ष की आयु तक पहुंचने से पहले वापस नहीं लिया जा सकता है।

टीयर-2 एक स्वैच्छिक खाता है। जिसे व्यक्ति टीयर-1 विकल्प के अतिरिक्त खोल सकते हैं। यह एक लचीला खाता है जो व्यक्तियों को किसी भी समय अपना धन निकालने की अनुमति देता है।

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एनपीएस स्कीम के फायदे

एनपीएस के तहत आयकर विभाग की धारा 80सी और 80सीसीडी के तहत टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है।

एनपीएस योजना निवेशकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप पेंशन फंड और निवेश विकल्प चुनने की अनुमति देकर उन्हें लचीलापन भी प्रदान करती है।

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पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस)

पुरानी पेंशन योजना यानी ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) के तहत सरकार साल 2004 से पहले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित पेंशन देती थी। यह पेंशन कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय उनके पे-ग्रेड पर आधारित होती थी। 2004 में इसे बंद कर दिया गया था।

इस स्कीम के तहत कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय उनके वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है। पुरानी पेंशन स्कीम में अगर रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी की मृत्यु हो जाए तो उनकी पत्नी को पेंशन की राशि दी जाती है।

सरकार पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से किसी भी तरह की कटौती नहीं करती है। पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों की अंतिम बेसिक सैलरी का 50 फीसदी यानी आधी राशि तक पेंशन के रूप में दिया जाता है।

पुरानी पेंशन योजना में रिटायरमेंट के बाद मेडिकल भत्‍ता और मेडिकल बिलों की रिम्बर्समेंट की सुविधा भी दी जाती है। इस स्कीम में रिटायर्ड हुए कर्मचारी को 20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी की रकम दी जाती है।

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दोनों में कौन है फायदेमंद
ओपीएस और एनपीएस में सबसे बड़ा अंतर यह है कि पुरानी पेंशन योजना एक सुरक्षित योजना है। जिसका भुगतान सरकारी खजाने से किया जाता है। नई पेंशन योजना शेयर बाजार पर आधारित है। जिसमें आपके द्वारा एनपीएस में लगाए गए पैसे को शेयर बाजार में लगाया जाता है। जिसके जरिए मिली राशि आपको दी जाती है।

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