Gold Silver Price: बजट के बाद चांदी 1 लाख सस्ती,सोना भी धड़ाम, सरकार ने ऐसा क्या किया? चुप्पी ने बढ़ाई बेचैनी
Gold Silver Price Today: बजट 2026 के दिन सोना-चांदी के बाजार में ऐसा भूचाल आया, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी निवेशक ने की हो। 1 फरवरी 2026 को जैसे ही केंद्रीय बजट पेश हुआ, कीमती धातुओं के दाम अचानक लुढ़क गए। चांदी जहां रिकॉर्ड ऊंचाई से सीधे जमीन पर आ गई, वहीं सोने ने भी कुछ ही दिनों में निवेशकों को बड़ा झटका दे दिया।
सवाल अब यही है कि आखिर सरकार ने ऐसा क्या किया, या फिर क्या नहीं किया, जिसकी वजह से ये गिरावट आई और सरकार इस पूरे उतार-चढ़ाव पर खामोश क्यों रही?

बजट के बाद चांदी क्यों भरभराकर टूटी? (Silver Price Crash)
बजट के दिन स्पॉट मार्केट में चांदी का भाव गिरकर 2,65,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। जबकि हफ्ते की शुरुआत में यही चांदी 4,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रही थी। यानी महज एक हफ्ते में चांदी करीब 1,34,400 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।
MCX पर भी हालात अलग नहीं रहे। बजट के दौरान चांदी के वायदा भाव में 6% से 9% तक की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल बाजार में चांदी 2.65 लाख से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में घूम रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी तेज गिरावट पिछले कई दशकों में बेहद कम देखने को मिली है।
सोने की कीमतों में अचानक क्यों आई बड़ी गिरावट? (Gold Price Today)
सोने ने भी निवेशकों को चौंकाया। 29 जनवरी को सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने ऑल टाइम हाई पर था। इसके बाद गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ और बजट के दिन तक सोना करीब 54,000 रुपये टूटकर 1,38,634 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया।
MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना बजट वाले दिन एक समय 9% तक गिरकर करीब 1.40 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन दिन के अंत तक सोना 1,48,000 रुपये के आसपास ही बंद हो पाया। यानी निवेशकों के लिए यह दिन पूरी तरह रोलर-कोस्टर जैसा रहा।
क्या बजट से पहले ही टूट चुका था बाजार? (Pre-Budget Fall)
असल में, गिरावट की शुरुआत बजट से पहले ही हो चुकी थी। बजट 2026-27 से पहले के दिनों में सोना और चांदी दोनों में करीब 9% तक की गिरावट देखी गई थी। एक दिन ऐसा भी आया, जब चांदी में लगभग 30% और सोने में करीब 17% तक की टूट दर्ज की गई। बजट ने इस गिरावट पर ब्रेक लगाने के बजाय निवेशकों की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया।
बजट 2026 में सोना-चांदी को लेकर सरकार ने क्या किया? (Budget Impact on Gold Silver)
सबसे बड़ा सवाल यही है। बजट 2026 में सरकार ने सोना और चांदी पर लगने वाली 6% बेसिक कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया। निवेशकों और ज्वेलरी इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि सरकार इस ड्यूटी को 6% से घटाकर 4% कर सकती है, जिससे दामों में राहत मिलती।
लेकिन ऐसा कोई ऐलान नहीं हुआ। सोना और चांदी दोनों पर 6% इम्पोर्ट ड्यूटी और 3% GST पहले की तरह जारी रहे। इस फैसले ने बाजार को निराश किया और यही निराशा कीमतों में और दबाव की बड़ी वजह बनी।
फिर चांदी की डिमांड क्यों बनी हुई है? (Future Demand of Silver)
हालांकि बजट में इंडस्ट्रियल सिल्वर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को लेकर सकारात्मक संकेत जरूर मिले। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की नीतियों से चांदी की भविष्य की मांग मजबूत रह सकती है। यही वजह है कि कई एक्सपर्ट इसे लॉन्ग टर्म निवेश के मौके के तौर पर भी देख रहे हैं।
सोना-चांदी की कीमतों पर सरकार की चुप्पी ने क्यों बढ़ाया सस्पेंस?
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बजट के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर की, लेकिन सोना-चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की। न कस्टम ड्यूटी पर सफाई दी गई और न ही बाजार के उतार-चढ़ाव पर कोई संकेत। यही चुप्पी अब निवेशकों और आम खरीदारों के बीच सवाल खड़े कर रही है कि क्या सरकार जानबूझकर इस मुद्दे से दूरी बनाए हुए है या आने वाले समय में कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी है?
सरकार की चुप्पी ने क्यों बढ़ाया सस्पेंस? (Government Silence)
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बजट के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर की, लेकिन सोना-चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की। न कस्टम ड्यूटी पर सफाई दी गई और न ही बाजार के उतार-चढ़ाव पर कोई संकेत।
यही चुप्पी अब निवेशकों और आम खरीदारों के बीच सवाल खड़े कर रही है कि क्या सरकार जानबूझकर इस मुद्दे से दूरी बनाए हुए है या आने वाले समय में कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी है?
निवेशकों के लिए आगे क्या? (What Should Investors Do Silver Gold)
फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जबकि सोना धीरे-धीरे स्थिर हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और लॉन्ग टर्म रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
बजट के बाद साफ है कि सोना-चांदी का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। सरकार की खामोशी और बाजार की अस्थिरता ने इस कहानी को और दिलचस्प बना दिया है। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में क्या ये गिरावट खरीदारी का मौका बनेगी या फिर निवेशकों की चिंता और बढ़ेगी।












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