Floccinaucinihilipilification: RBI द्वारा इस्तेमाल इस शब्द का मतलब आपको पता है?
नई दिल्ली: पूरे भारत में इकोनॉमिक क्लाइमेट काफी जटिल हो गया है। इस बीच केद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शशिकांत दास और आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर हुई समीक्षा बैठक में में मिनट्स के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। जिसका मतलब जानने के लिए लोगों को शब्दकोश और गूगल सर्च का सामना करना पड़ा। आरबीआई गवर्नर के दिए भाषण और मिनट्स में ऐसे शब्द इस्तेमाल किए गए थे, जिन्हें समझना बेहद कठिन था।

बुधवार को आर्थिक मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के मिनट्स प्रकाशित किए गए। इस दौरान एमपीसी के सदस्य चेतन घाटे ने कहा कि भारत में आर्थिक विकास के अनुमान दुर्भाग्य से floccinaucinihilipilification की एक उचित डिग्री के अधीन हैं। इसके बावजूद, विकास में तेजी आ सकती है। इस शब्द के बारे में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का कहना है कि यह शब्द 18 वीं शताब्दी के मध्य में उत्पन्न होने वाला दुर्लभ शब्द है। इसका मतलब है किसी चीज का अनुमान लगाने की कार्रवाई का वर्णन करती है, जो निरर्थक है।
इससे पहले सोमवार को आरबीआई गवर्नर ने ऐसे ही एक शब्द का इस्तेमाल किया था। दरअसल, फिक्की के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि निराशा और सब कुछ खत्म हो गया है, जैसी सोच से किसी को भी मदद नहीं मिलने वाली। मैं यह नहीं कहता हूं कि हमें Panglossian दृष्टिकोण रखना चाहिए और हर चीज पर हंसना चाहिए, लेकिन बहुत निराशा से भी किसी को मदद नहीं मिलेगी। इस शब्द का मतलब होता है कि हर चीज बेहतर के लिए ही होती है। ऐसी उम्मीद पाल लेना। इसे बहुत ज्यादा आशावादी होना भी कह सकते हैं। यह शब्द असल में एक हास्य उपन्यास रचना 'वोल्टेयर' के किरदार डॉ पैनगलॉस से प्रेरित है। इस उपन्यास का किरदार डॉ पैनगलॉस बहुत आशावादी शख्स रहता है। इस हद तक कि बड़ी मुश्किलों और क्रूरता का सामना करने के बाद भी वह आशावादी रहता है।
वहीं अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष यानी 2019-20 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़त के अनुमान को घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है। इसके पहले रिजर्व बैंक ने 2019-20 में अर्थव्यवस्था में 7 फीसदी की बढ़त होने का अनुमान जारी किया था। एमपीसी की हुई बैठक का ब्योरा देते हुए बुधवार को कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए आरबीआई ने रेपो दर में 0.35 फीसदी कटौती करने का फैसला किया।












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