सैलरी के हिसाब से जानिए आप पर कितना लगेगा टैक्स और कैसे बचें इससे

अगर आप भी 2.5 लाख रुपए से अधिक कमाते हैं तो आपको ये 5 बातें जानना है जरूरी। अपनी सैलरी के हिसाब से जानिए आप पर कितना लगेगा टैक्स और कैसे बचें इससे।

नई दिल्ली। यह साल का वह समय है जब आपको अपनी टैक्सेबल इनकम डिक्लेयर करनी होती है। टैक्स बचाने के अपने सभी डॉक्युमेंट तैयार कर लें जैसे ईएलएसएस, पीपीएफ, 5 साल की एफडी हेल्थ इंश्योरेंस और एचआरए के दस्तावेज। ऐसे में आप टैक्स न बचाने के बजाए सैलरी न कटवा बैठें, इसके लिए जानिए 5 खास बातें।

आय का मतलब क्या?

आय का मतलब क्या?

आय का मतलब सिर्फ सैलरी ही नहीं है जो आपको नियोक्ता द्वारा जी जाती है। आयकर एक्ट के मुताबिक इन 5 तरीकों से मिले पैसे आय कहलाते हैं- सैलरी, घर या प्रॉपर्टी से मिले पैसे, किसी बिजनेस या प्रोफेशन से मिले पैसे, कैपिटल गेन से मिली आय और अन्य स्रोतों से मिले पैसे। हालांकि, डिक्लेरेशन फाइल करते समय आपको अपनी उन सभी आय का डिक्लेरेशन करना होता है, जो आयकर एक्ट के तहत आती है।

क्या आप टैक्स के दायरे में आते हैं?

क्या आप टैक्स के दायरे में आते हैं?

हर वित्त वर्ष में यह चेक करना जरूरी होता है कि क्या आप टैक्स के दायरे में आते हैं? अगर आप 2.5 लाख रुपए प्रति महीने से कम कमाते हैं तो आपको टैक्स देने की जरूरत नहीं है। 60 साल से कम उम्र के (जिनका जन्म 1 अप्रैल 1957 के बाद हुआ है) लोगों को 2016-17 में (2017-18 के लिए टैक्स) कितना टैक्स देना है, नीचे दी गई तस्वीर में आप खुद ही देख लें।

कैसे बचा सकते हैं टैक्स?

कैसे बचा सकते हैं टैक्स?

  • आप आयकर की धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स छूट पा सकते हैं।
  • इसके अलावा आप 80सीसीडी(1बी) के तहत 50,000 रुपए की आय पर अतिरिक्त छूट पा सकते हैं, अगर आप इन पैसों को अपने रिटायरमेंट के फायदे के लिए एनपीएस में निवेश करते हैं।
  • इसके अलावा एक व्यक्ति, जिसने घर घरीदा है, वह होम लोन के ब्याज पर आयकर की धारा 24 के तहत 2 लाख रुपए तक पर टैक्स छूट पा सकता है। इसके अलावा कुछ खास शर्तें पूरी करने पर 80ईई के तहत उसे अतिरिक्त 50,000 रुपए पर टैक्स छूट मिल सकती है।
  • आपको आयकर की धारा 87ए के तहत 5000 रुपए या उससे कम पर 100 फीसदी छूट मिल सकती है, अगर आपकी आय 5 लाख से कम है।
  • हेल्थ इंश्योरेंस के लिए दिए गए प्रीमियम को आयकर की धारा 80डी के तहत क्लेम कर सकते हैं, हालांकि, इसके तहत कुछ शर्तें पूरी करने के बाद 60,000 रुपए तक की आय पर टैक्स छूट पाई जा सकती है।
  • एजुकेशन लोन पर दिए गए ब्याज पर 80ई के तहत आयकर में छूट पाई जा सकती है।
  • अगर आप किसी किराए के घर में रहते हैं तो आप आयकर के तहत एचआरए क्लेम कर सकते हैं। इसके लिए आपको रेंट एग्रीमेंट दिखाना होगा और अगर आपका किराया 8,333 रुपए से अधिक है तो अपने किराएदार का पैनकार्ड दिखाना होगा।

आयकर की धारा 80 सी के तहत कैसे पाए लाभ?

आयकर की धारा 80 सी के तहत कैसे पाए लाभ?

ईएलएसएस, पीपीएफ, इंश्योरेंस, फिक्स डिपॉजिट आदि में निवेश करने पर 80सी के तहत टैक्स छूट पाई जा सकती है। इसके तहत अधिकतर 1.5 लाख तक की आय पर टैक्स छूट पाई जा सकती है। मान लीजिए आपने ईएलएसएस में 1 लाख रुपए निवेश किए और फिक्स डिपॉजिट में 1 लाख रुपए निवेश किए, तो आपने कुल मिलाकर 2 लाख रुपए निवेश किए, जिसमें से आपको सिर्फ 1.5 लाख रुपए पर आयकर में छूट मिलेगी।

क्या टैक्स रिटर्न फाइल करना जरूरी है?

क्या टैक्स रिटर्न फाइल करना जरूरी है?

कोई भी करदाता टैक्स रिटर्न तब फाइल करता है, जब उसे कोई रिफंड क्लेम करना होता है। हालांकि, 2.5 लाख रुपए से कम की आय वाले व्यक्ति को टैक्स रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन आदर्श रूप से हर किसी को टैक्स रिटर्न फाइल करना चाहिए। टैक्स रिटर्न समय पर फाइल करने से आपको लोन मिलने में भी काफी आसानी होती है। 2017-18 का टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2017 हो सकती है।

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