खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट, मार्च में पहुंची 5.6% के स्तर पर, मंहगाई से मिलेगी राहत
मुद्रास्फीति में गिरावट के बाद मंहगाई से मामूली राहत की उम्मीद की जा रही है। पिछले दो महीनों के बीच खुदरा मुद्रास्फीति में ये बड़ी कटौती है।

Fall in retail inflation:भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में 6.4 प्रतिशत से कम होकर 5.6 प्रतिशत हो गई। मंगलवार को खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े एक हफ्ते से भी कम समय के बाद आए हैं जब आरबीआई ने अपनी प्रमुख उधार दर या रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए बाजारों और विश्लेषकों को चौंका दिया था।
मार्च के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े एक हफ्ते से भी कम समय के बाद आए हैं। वहीं आरबीआई ने अपनी प्रमुख उधार दर या रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद एक मीडिया सम्मेलन में इस बात की पुष्टि की। बता दें कि आरबीआई ने बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पिछले साल मई से रेपो दर में 250 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी।
हालांकि केंद्रीय बैंक ने अपने मौद्रिक नीति वक्तव्य में खुदरा मुद्रास्फीति को चालू वित्त वर्ष में 5.2 प्रतिशत तक कम करने का अनुमान लगाया था, आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि के बीच मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण गतिशील बना हुआ है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (consumer price Index) वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतों में बदलाव को ट्रैक करता है। आरबीआई के पास मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत पर रख सकता है। बता दें कि फरवरी में खुदरा मुद्रास्फीति की दर, मामूली गिरावट के बावजूद, लगातार दूसरे महीने आरबीआई की 6 प्रतिशत की ऊपरी सहिष्णुता सीमा से ऊपर रही। पिछले दो महीने के भीतर 6.4% से गिरकर 5.6% के स्तर पर मुद्रास्फीति पहुंची है।
वहीं केंद्रीय बैंक ने अपने मौद्रिक नीति वक्तव्य में खुदरा मुद्रास्फीति को चालू वित्त वर्ष में 5.2 प्रतिशत तक कम करने का अनुमान लगाया था। आरबीआई गवर्नर ने कहा था कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि के बीच मुद्रास्फीति की गतिशीलता बनी रहेगी। लेकिन मुद्रास्फीति में गिरावट का सीधा फायदा मंहगाई की मार झेल रही जनता को मिलने जा रहा है।
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