जानिए आयकर व विभिन्न करों से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

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बेंगलोर। क्या आप जानते हैं आप हर साल अपनी आय का कितना हिस्सा कर के रूप में सरकार को दे देते हैं? क्या आपको पता है कि आपकी मेहनत की कमाई पर कितने करों का बोझ है? हो सकता है कई लोगों को इन सवालों का जवाब मालूम हो पर आज भी ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें इन सवालों का जवाब नहीं पता। इन सवालों का जवाब पता होना देश के हर उस नागरिक के लिए जरुरी है जो अपने आय में से कर की आदायगी करता है। चलिए आपको बताएं कर विषय पर कुछ खास बातेंः

ध्यान रखने योग्य बात

सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि कर क्या है? एक वित्तिय वर्ष में निश्चित तारीख़ पर और एक पूर्व निर्धारित दर के हिसाब से जनता अपनी आय में से जो राशि सरकार को अदा करती है वही कर है। इसी कर के माध्यम से मिलने वाले धन से ही तो सरकार राजस्व एकत्र करती है।

दो तरह के कर

कर दो तरह के होते हैं। पहला, प्रत्यक्ष कर और दूसरा, अप्रत्यक्ष कर। प्रत्यक्ष कर करदाताओं से सीधे व्यक्तिगत रूप में लिया जाता है जैसे किसी व्यक्ति की आय से कटने वाला कर। जिसे हर साल वो एक नियत तिथि पर बतौर जिम्मेदारी सरकार को अदा करता है। जहां तक बात रही अप्रत्यक्ष कर की तो इसकी आदायगी बतौर उपभोक्ता हम करते हैं। रोज़मर्रा के उत्पादों की खरीददारी पर उन उत्पादों के माध्यम से ही हमसे अप्रत्यक्ष कर वसूला जाता है।

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आइए आपको बताएं विभिन्न करों के बारे में

1. आयकर

आयकर प्रत्यक्ष कर का सबसे बड़ा उदाहरण है। साथ ही यह सबसे बड़ा स्रोत हैं सरकारी राजस्व का। जिसका उपयोग सरकार देश के विकास के लिए और जनता की सहुलियत के लिए करती है। यह कर सरकार अपने नियंत्रण में सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं पर तथा उनके साथ काम करने वाले कर्मियों की वित्तिय आय पर लगाती है।

2. पूंजी लाभ कर

यह कर तब लगाया जाता है जब संपत्ति, गहने, शेयर या बोंड जैसी पूंजी को बेचने पर आप लाभ कमाते हैं। इसमें होता ऐसा है कि आपने पूंजी को जिस बिक्री दर पर बेचा है उसमें से उस क्रय दर को घटाया जाता है जिस दर पर आपने उसे खरीदा था। इससे आपकी लाभ राशि का आकलन होता है जिस पर सरकार कर लगाती है। दीर्घकालीन और अल्पकालीन पूंजीगत लाभ पर कर की दरें अलग अलग होती हैं।

3. संपत्ति कर

यह एक प्रत्यक्ष कर है जो कि संपत्ति के बाजार मूल्य पर आधारित होता है। इसके अन्तर्गत संपत्ति के रुप में धन, बैंक में जमाखाता, निजी वाहन, फण्ड, शेयर, प्रोपर्टी, पेंशन प्लान, निजी घर, संस्था आदि सम्मिलित है।

सम्पत्ति कर व्यक्तिगत तौर पर लागु है जिसे प्रत्येक वित्तिय वर्ष में अदा करना होता है। इसमें वाणिज्यिक संपत्ति, बोंड, शेयर, फंड जैसी उत्पादक संपत्ति शामिल नहीं की जाती।

4. निगम कर

यह वह वार्षिक कर है जिसे प्रत्येक वित्तिय वर्ष में भारत में उन सभी कंपनियों द्वारा चुकाया जाता है जिनकी कुल आय दस मिलियन से ज्यादा है. यह कर घरेलु कंपनियों ऑर विदेशी कंपनियों दोनों पर ही लागु है.

5. बिक्री कर

बिक्री कर अप्रत्यक्ष कर है जिसे सरकार बाजार में उत्पादों के क्रय ऑर विक्रय पर लगाती है। भारत में बिक्री कर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार दोनों द्वारा लगाया जाता है। बाजार में आप जब भी कोई उत्पाद खरीदते हैं तो आपको उसके वास्तविक मूल्य के साथ कर भी देना होता है. यह कर ही बिक्री कर है.

6. एक्साइज़ ड्‌युटी

इसे सेंट्रल वैल्यु ऐडिड टैक्स के रूप में भी जाना जाता है। यह केवल उन उत्पादों पर लगाया जाता है जिनका उत्पादन देश की भौगोलिक सीमा के अंदर ही होता है।

कस्टम ड्‌युटी की तरह इसके नियम भी सरकार द्वारा परिवर्तित होते रहते हैं। जब निर्माता उत्पादों को सीधे तौर पर केंद्र सरकार को बेचता है तो इसमें एक्साइज़ ड्‌युटी नहीं जोड़ी जाती लेकिन जब उत्पाद बाजार में खरीरदारों द्वारा खरीदा जाता है तो इसके वास्तविक मूल्य में एक्साइज़ ड्‌युटी जोड़ के उत्पाद बेचा जाता है।

7. सेवा कर

सेवा कर भारत के केंद्रीय एक्साइज़ का ही भाग है। यह भारत में उन सेवाओं पर लागू है जो नागरिकों को दी जाती है। यह कर जम्मु कश्मीर में लागू नहीं होता। यह एक अप्रत्यक्ष कर है। जिसे टैक्सेबल सर्विस भी कहा जाता है। इस कर को वसूल करने की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज़ एण्ड कस्टम है।

महत्वपूर्ण जानकारी

कानूनी प्रावाधान के अनुसार व्यक्तिगत स्तर और व्यावसायिक स्तर पर सरकार से यह जानकारी भी ली जा सकती है कि एक वित्तिय वर्ष में आयकर कहां खर्च किया गया है।

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