अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सीआईआई ने दिया सुझाव, मोदी सरकार से मांगा 15 लाख करोड़ का पैकेज
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था को पुनर्जिवित करने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने 15 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है। सीआईआई ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन की बड़ी मार पड़ी है। ऐसे में पहले का जो अनुमान 4.5 लाख करोड़ रुपये का था, अब उससे कहीं अधिक है। सीआईआई की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से एक बड़े प्रोत्साहन पैकेज दिये जाने की जरूरत है, जिससे गरीबों और उद्योग विशेषरूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को संकट से उबारा जा सके। सीआईआई ने कहा कि यह महामारी तब तक कायम रहेगी जब तक कि इसकी वैक्सीन नहीं बन जाती और इसमें 12 से 18 माह का समय लग सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया में भी करीब दो साल लगेंगे।
ऐसे में तत्काल वित्तीय पैकेज जारी करने की जरूरत है। सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने कहा, ''आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश के 50 दिन हो चुके हैं। इसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर हमारे पहले के अनुमान से कहीं अधिक रहने का अंदेशा है। इसकी भरपाई बड़े प्रोत्साहन पैकेज से की जा सकती है, जिससे रोजगार और आजीविका को बचाया जा सके। सीआईआई का सुझाव है कि सरकार को 15 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज जारी करना चाहिए, जो जीडीपी के 7.5 प्रतिशत के बराबर होगा।''












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