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जून में 1.3 करोड़ लोगों की नौकरी छिनी, हरियाणा टॉप पर, जानिए अपने राज्य का हाल

बेरोजगारी के सवाल पर केंद्र सरकार आलोचकों के निशाने पर है। एक ताजा रिपोर्ट में राज्यों में कितनी बेरोजगारी दर है, इसकी रिपोर्ट सामने आई है। राज्यों में हरियाणा शीर्ष पर है। पढ़िए रिपोर्ट

नई दिल्ली, 21 जुलाई : कोरोना महामारी के दौरान रोजगार गंवाने वाले हजारों लोग आजीविका के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। बेरोजगारी दर रिकॉर्ड स्तर पर (unemployment rate) होने की खबरों के हवाले से मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसी ही एक रिपोर्ट में भारत की बेरोजगारी दर 7.8 फीसद होने की बात सामने आई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सबसे अधिक बेरोजगारी हरियाणा में है। मनोहर लाल खट्टर की सरकार के दौर में हरियाणा की बेरोजगारी दर 30.6 परसेंट है। इसके बाद राजस्थान, असम, जम्मू-कश्मीर और बिहार का नंबर है।

बेरोजगारी किन 5 राज्यों में सबसे अधिक

बेरोजगारी किन 5 राज्यों में सबसे अधिक

बेरोजगारी दर के मामले में टॉप 5 प्रदेशों में 4 में भाजपा का सीधा प्रभाव है। बता दें कि अगस्त, 2019 के बाद से केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में जम्मू-कश्मीर फिलहाल केंद्र शासित प्रदेश है। ऐसे में प्रशासनिक मामलों के जानकारों की दलील है कि यहां सीधा केंद्र सरकार की नीतियां ही लागू की जाती हैं। बिहार में भाजपा जदयू के साथ गठबंधन की सरकार चला रही है। असम में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार बनी है।

बेरोजगारी के मामले में टॉप 10 राज्य

बेरोजगारी के मामले में टॉप 10 राज्य

अनइन्पलॉयमेंट के मामले में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार भी कठघरे में है। इस कांग्रेस शासित प्रदेश में 29.8 फीसद बेरोजगारी है। नौकरी के अवसर घटने के मामले में कई और राज्यों की सरकारों की आर्थिक नीतियां कठघरे में हैं। टॉप 10 प्रदेशों में सिक्किम, झारखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना के नाम भी शामिल हैं। इन सभी प्रदेशों में 10 फीसद से अधिक बेरोजगारी दर है।

1.3 करोड़ लोगों की नौकरी छिनी !

1.3 करोड़ लोगों की नौकरी छिनी !

बेरोजगारी पर आधारित बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में CMIE के आंकड़ों के हवाले से कहा गया कि जून में 13 मिलियन लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक CMIE के डायरेक्टर महेश व्यास ने बताया, जून में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.80 फीसद हो गई, जबकि बेरोजगार लोगों की संख्या 3 मिलियन बढ़ी।

नौकरियों के अवसर में भारी गिरावट !

नौकरियों के अवसर में भारी गिरावट !

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार, देश की बेरोजगारी दर बढ़ने में मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में 13 मिलियन नौकरियों का नुकसान भी शामिल है। पिछले महीने नौकरियों के अवसर में भारी गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च बेरोजगारी दर के कारण हुई। बेरोजगारी दर मई महीने में 6.62 प्रतिशत से बढ़कर 8.03 प्रतिशत हो गई थी। CMIE के मुताबिक शहरी इलाकों में मई में 7.30 फीसदी बेरोजगारी दर रही, जो पिछले प्रतिशत- 7.12 फीसदी की तुलना में थोड़ा बेहतर रहा।

बेरोजगारों की संख्या 30 लाख बढ़ी

बेरोजगारों की संख्या 30 लाख बढ़ी

सीएमआईई के प्रबंध निदेशक महेश व्यास ने कहा, गैर-लॉकडाउन महीने के दौरान रोजगार में सबसे बड़ी गिरावट जून में आई है। इसका कारण ग्रामीण घटनाएं और मौसम में बदलाव है। इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां कम होती हैं। जुलाई में बुवाई शुरू होने पर परिस्थियों के बदलने की सबसे अधिक संभावना होती है। उन्होंने कहा, रिपोर्टिंग महीने (जून) के दौरान लोगों को 13 मिलियन नौकरियां गंवानी पड़ीं, जबकि बेरोजगारों की संख्या केवल 30 लाख बढ़ी। उन्होंने कहा कि बाकी नौकरियां इसलिए घटीं क्योंकि श्रम बाजार में लेबर की जरूरत 10 मिलियन तक घटी (labour force shrunk) है।

बेरोजगारी बढ़ने के कारण

बेरोजगारी बढ़ने के कारण

बढ़ती बेरोजगारी पर CMIE का मानना है कि गिरावट मुख्य रूप से अनौपचारिक बाजारों में (informal markets unemployment) हुई है। CMIE डायरेक्टर ने कहा, संभव है कि बेरोजगारी का बढ़ना आर्थिक अस्वस्थता (economic malaise) न होकर, मुख्य रूप से श्रमिकों के प्रवास का मुद्दा (labour migration issue)हो।

Unemployment सेना भर्ती में बदलाव से भी !

Unemployment सेना भर्ती में बदलाव से भी !

CMIE निदेशक ने कहा, यह चिंताजनक है कि मानसून की अनिश्चितता के कारण इतनी बड़ी संख्या में श्रमिकों का काम छिन रहा है। उन्होंने कहा, दूसरा चिंताजनक पहलू ये है कि जून 2022 में वेतनभोगी कर्मचारियों की कैटेगरी में भी 25 लाख नौकरियां छिनी (salaried employees job fall)। उन्होंने कहा, CMIE के डेटा से जून में वेतनभोगी नौकरियों का छिनना भी उजागर होता है। उन्होंने कहा, सरकार ने सशस्त्र कर्मियों की भर्ती नियमावली बदली। इससे सेना में लोगों की संख्या घटेगी।

सरकार क्या कर रही है ?

सरकार क्या कर रही है ?

बेरोजगारी का मुद्दा लंबित सरकारी भर्तियों से भी जुड़ा है। ऐसे में केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में उम्मीद की किरण दिखाई है। सरकार ने कहा है कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में 10 लाख पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की पहल की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह के मुताबिक खाली पदों को भरने के लिए मिशन मोड में कार्रवाई होगी। बता दें कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अगले डेढ़ वर्षों में मिशन मोड में 10 लाख लोगों की भर्तियां करने को कहा था।

बारिश के देवता नहीं बचाएंगे नौकरी

बारिश के देवता नहीं बचाएंगे नौकरी

प्राइवेट सेक्टर में बेरोजगारी के संबंध में CMIE के निदेशक ने कहा, निजी इक्विटी-वित्त पोषित नई दुनिया (private equity-funded new-world) में भी नौकरियों के अवसर घटे हैं। भविष्य में इसी तेजी से नौकरियां न छिनें, लोगों की नौकरी बची रहे साथ ही साथ रोजगार के अवसर पैदा हों, इसके लिए अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास जरूरी है। उन्होंने मानसून आधारित इकोनॉमी के संदर्भ में कहा कि बारिश के देवता इन नौकरियों को नहीं बचा सकते।

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