कोरोना संकट के बीच PF का नया नियम, जानिए कितनी बढ़ेगी आपकी टेक होम सैलरी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच नौकरीपेशा लोगों को राहत दी है। लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच सैलरी क्लास लोगों के भविष्य निधि में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योगदान के नियमों में बदलाव किया, जिसका लाभ कर्मचारी औक नियोक्ता दोनों को मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने EPF योगदान को लेकर घोषणा की मई, जून और जुलाई में कर्मचारी और नियोक्ता का ईपीएफ योगदान 12 प्रतिशत से घटकर 10 फीसदी रहेगा। बाकी का हिस्सा केंद्र सरकार देगी। सरकार के इस फैसले से नौकरीपेशा लोगों के कॉस्ट टू कंपनी यानी CTC में बिना किसी बदलाव के सैलरी में बढ़ोतरी हुई है। आइए जानें कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी...

बढ़ेगी टेक होम सैलरी
सरकार ने पीएफ कंट्रीब्यूशन में बदलाव कर इसे 12% से घटाकर 10% कर दिया है। मई, जून और जुलाई में आपकी सैलरी ने 12 फीसदी के बजाए 10 फीसदी ही पीएफ योगदान काटा जाएगा। वर्तमान में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता का 12 फीसदी पीएफ फंड में जमा करना होगा है। इतनी ही रकम नियोक्ता की ओर से जमा की जाती है, लेकिन अगले तीन महीनों के लिए आपकी सैलरी से 12 फीसदी के बजाए 10 फीसदी ही सैलरी काटी जाएगी। पीएफ योगदान में कटौती का लाभ आपकी टेक होम सैलरी पर होगा और बिना CTC में बदलाव किए आपकी सैलरी में बढ़ोतरी होगी।

इन्हें मिलेगा लाभ, इतनी बढ़ेगी सैलरी
सरकार की ओर से इस राहत का लाभ 4.3 करोड़ पीएफ सब्सक्राइबर्स और 6.5 लाख कंपनियों को मिलेगा। पीएफ योगदान में 2 फीसदी की कटौती होने से सैलरी में बढ़ोतरी होगी। अगर उदाहरण के साथ समझे तो अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 10000 हैं तो अब आपके पीएफ योगदान में 1200 के बजाए 1000 रुपए नकटेगा और वहीं नियोक्ता को भी इतनी ही रकम जमा करनी होगी। ईपीएफओ द्वारा जारी किए गए एफएक्यू के मुताबिक CTC में आपकी सैलरी है तो 10000 रुपए की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को टेक होम सैलरी में 200 रुपए अधिक मिलेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी को EPF में 200 रुपए कम जमा करने होंगे और ऐसे में आपकी सैलरी से 200 रुपए नियोक्ता के हिस्से के और 200 रुपए आपकी सैलरी से की गई कटौती के, यानी 400 रुपए अधिक मिलेंगे।हालांकि आपको बता दें कि कर्मचारियों को किया गया एक्स्ट्रा भुगतान टैक्स योग्य होगा।

टैक्स के बारे में भी जानना जरूरी
आपको बता दें कि किसी एक वित्त वर्ष में आपकी बेसिक सैलरी के 12 प्रतिशत ईपीएफ योगदान तक पर टैक्स नहीं लगेगा। अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम में रहते हैं और आपका ईपीएफ योगदान कम है तो आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। अगर आपके सामने गंभीर नकदी संकट नहीं है या आपकी सैलेरी में कटौती नहीं की गई है तो इस कम योगदान से होने वाली अतिरिक्त आय आपके लिए कुछ खास फायदेमंद नहीं होगी। जानकार आपको अपने ईपीएफ में 12 फीसदी योगदान करने की सलाह देते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ईपीएफ योगदान 12 फीसदी से घटा कर 10 फीसदी करने से आप हाथ में सिर्फ 1-2 फीसदी अतिरिक्त पैसा आएगा।












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