Budget 2026: ₹25 हजार से ₹1 लाख सैलरी वालों की किस्मत बदलेगी या बिगड़ेगी? मिडिल क्लास के लिए पूरा हिसाब
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर सबसे ज्यादा नजरें मिडिल क्लास पर टिकी हैं। खासकर वे लोग, जिनकी महीने की सैलरी ₹25 हजार से ₹1 लाख के बीच है। बढ़ती महंगाई, महंगे होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और बच्चों की पढ़ाई के खर्च के बीच यह वर्ग हर बजट में राहत की उम्मीद करता है। सवाल यही है कि बजट 2026 इस वर्ग के लिए फायदा लेकर आएगा या जेब पर और बोझ डालेगा।
इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद
सरकार लगातार यह संकेत देती रही है कि वह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाना चाहती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कई मंचों पर कह चुकी हैं कि न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाया जाएगा। ऐसे में ₹25 हजार से ₹1 लाख तक सैलरी पाने वालों को टैक्स स्लैब में बदलाव या स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने का फायदा मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो सालाना ₹3 लाख से ₹12 लाख तक कमाने वालों की टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है।

महंगाई बनाम राहत की लड़ाई
हालांकि राहत की तस्वीर इतनी आसान नहीं है। सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और कैपेक्स पर ज्यादा है। ऐसे में अगर सब्सिडी में कटौती होती है या अप्रत्यक्ष कर बढ़ते हैं, तो रोजमर्रा के खर्च महंगे हो सकते हैं। पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, ट्रांसपोर्ट और एफएमसीजी प्रोडक्ट्स महंगे हुए तो मिडिल क्लास को सीधा नुकसान होगा।
PF, ग्रेच्युटी और सोशल सिक्योरिटी पर नजर
सरकारी सूत्रों और पहले के बजट ट्रेंड्स देखें तो सैलरी क्लास के लिए PF, NPS और पेंशन सिस्टम को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता रही है। Budget 2026 में PF पर टैक्स नियमों में राहत या NPS में अतिरिक्त डिडक्शन मिलती है, तो ₹50 हजार से ₹1 लाख सैलरी वालों को लंबी अवधि में बड़ा फायदा होगा।
बजट 2026 में मिडिल क्लास की असली परीक्षा, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Saraf Furniture के फाउंडर और CEO रघुनंदन सराफ का मानना है कि Budget 2026 मिडिल क्लास के लिए बेहद अहम होने वाला है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी मासिक सैलरी ₹25 हजार से ₹1 लाख के बीच है। यह वही वर्ग है जो देश की खपत और आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ माना जाता है।
उनके मुताबिक, इस बजट में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार आयकर में कितनी राहत देती है। अगर टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाया गया या रिबेट और डिडक्शन की सीमा बढ़ाई गई, तो सैलरीड लोगों के हाथ में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम बचेगी। इसका सीधा असर बाजार में खर्च बढ़ने और लोगों के आत्मविश्वास पर पड़ेगा।
रघुनंदन सराफ कहते हैं कि सिर्फ टैक्स स्लैब ही नहीं, बल्कि हेल्थ इंश्योरेंस, रिटायरमेंट और सोशल सिक्योरिटी कवरेज जैसे मुद्दों पर भी बजट से उम्मीदें हैं। अगर इन क्षेत्रों में सरकार राहत देती है, तो मिडिल क्लास का आर्थिक दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार की ओर से राजस्व बढ़ाने वाले कदम राहत से ज्यादा हुए, तो इसका उल्टा असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में घरों का बजट और ज्यादा टाइट हो जाएगा और खर्च करने की क्षमता घट सकती है। कुल मिलाकर, रघुनंदन सराफ का कहना है कि Budget 2026 का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कितनी संतुलित और ग्रोथ-फ्रेंडली नीति अपनाती है। अगर मिडिल क्लास को प्राथमिकता दी गई, तो यह बजट न सिर्फ आम लोगों के लिए राहत भरा होगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
होम लोन और ईएमआई से जुड़ी उम्मीदें
RBI और वित्त मंत्रालय के बीच समन्वय को देखते हुए यह माना जा रहा है कि Budget 2026 में होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो ₹40 हजार से ₹1 लाख कमाने वाले उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी, जो घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं या पहले से EMI चुका रहे हैं।
हेल्थ और एजुकेशन खर्च में राहत मिलेगी या नहीं
मिडिल क्लास का बड़ा खर्च हेल्थ इंश्योरेंस और बच्चों की पढ़ाई पर जाता है। सरकारी पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स और नीति आयोग की रिपोर्ट्स भी मानती हैं कि आउट-ऑफ-पॉकेट हेल्थ खर्च अभी भी ज्यादा है। Budget 2026 में अगर हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट बढ़ती है, तो ₹25 हजार सैलरी पाने वालों को भी सीधा फायदा होगा।
नुकसान कहां हो सकता है?
अगर सरकार फिस्कल घाटा कंट्रोल करने के लिए कुछ टैक्स छूट खत्म करती है या GST के दायरे में और चीजें लाती है, तो यह वर्ग दबाव में आ सकता है। खासकर वे लोग, जिनकी सैलरी ₹25-40 हजार के बीच है, उन्हें ज्यादा चोट लग सकती है।
Budget 2026 से ₹25 हजार से ₹1 लाख सैलरी वालों को पूरी राहत मिलना मुश्किल है, लेकिन टैक्स, लोन और सोशल सिक्योरिटी के मोर्चे पर कुछ पॉजिटिव बदलाव संभव हैं। कुल मिलाकर यह बजट मिडिल क्लास के लिए फायदा और नुकसान दोनों का संतुलन लेकर आ सकता है। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
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