Budget 2026: बजट की शुरुआत में वित्त मंत्री ने क्यों किया SC ST का जिक्र? संसद में सितारमण ने बताया प्लान
Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 1 फरवरी को सुबह 11 बजे अपना लगातार 9वां बजट पेश कर रही हैं। यह पिछले एक दशक में पहली बार है जब भारत का केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया जा रहा है। मोदी सरकार 3.0 के इस दूसरे पूर्ण बजट से देश को काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि 2025 के चुनाव और अंतरिम बजट के बाद अब सरकार लंबी अवधि के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक सेहत पर संतोष जताया। उन्होंने संसद में घोषणा की कि भारत की अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने आत्मनिर्भरता को अपना मूल मंत्र बना लिया है। सरकार के पिछले निर्णयों ने न केवल सिस्टम में पारदर्शिता लाई है, बल्कि आम नागरिकों तक सीधे लाभ पहुँचाने का काम भी किया है।
सरकार का 'त्रिकर्तव्य' वाला दृष्टिकोण
निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के दौरान विकास के 'त्रिकर्तव्य' (Three-fold approach) पर विशेष चर्चा की।
- सरकार की पहली प्राथमिकता आर्थिक विकास को न केवल तेज करना है, बल्कि उसे लंबे समय तक बरकरार रखना है।
- दूसरा लक्ष्य देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
- तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ 'सबका साथ-सबका विकास' है, जिसके तहत विकास की अंतिम बूंद समाज के सबसे पिछले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए।
SC-ST, किसानों और युवाओं पर खास फोकस
संसद में बजट पढ़ते हुए वित्त मंत्री ने वंचित वर्गों के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का लक्ष्य अपनी महत्वाकांक्षाओं को हकीकत में बदलना है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश की आर्थिक उन्नति का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका लाभांश (Dividend) किसानों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), युवाओं और हमारे गरीब तबके तक अनिवार्य रूप से पहुंचे। इसके लिए सरकार योजनाओं के कार्यान्वयन में तकनीक और पारदर्शिता का सहारा ले रही है।
350 से ज्यादा सुधारों का दिया हवाला
नीतियों को सरल बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए सीतारमण ने बताया कि अब तक 350 से ज्यादा बड़े सुधार लागू किए जा चुके हैं। इसमें जीएसटी का सरलीकरण, लेबर कोर्ट से जुड़ी अधिसूचनाओं को आसान बनाना और अनिवार्य क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स का युक्तिकरण शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के बोझ को कम करने (Deregulation) पर काम कर रही है, ताकि व्यापार और सामान्य जीवन में सरकारी दखल कम हो सके।
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