Budget 2026: बड़ा सवाल! क्या खत्म हो जाएगी Old Tax Regime? कितनी कमाई पर लगेगा कितना टैक्स?
Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2025 में वित्त मंत्री द्वारा किए गए क्रांतिकारी बदलावों के बाद आयकर दाताओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। नए टैक्स रेजीम (New Tax Regime) में सेक्शन 87A के तहत छूट की सीमा बढ़ने से अब वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 12.75 लाख रुपये तक की कुल सालाना आय पूरी तरह टैक्स फ्री हो गई है।
इस बड़ी राहत के बाद से देश में नए टैक्स सिस्टम को अपनाने वालों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब जैसे-जैसे Budget 2026 करीब आ रहा है, टैक्सपेयर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार पुराने टैक्स सिस्टम (Old Tax Regime) को हमेशा के लिए बंद करने वाली है? आंकड़ों के आधार पर भविष्य की तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है।

क्यों तेजी से लोकप्रिय हो रहा है नया टैक्स रेजीम?
फाइनेंस एक्ट 2025 के प्रभावी होने के बाद सेक्शन 115BAC के तहत नया टैक्स रेजीम अब डिफॉल्ट विकल्प बन चुका है। इसकी लोकप्रियता के तीन मुख्य कारण हैं:
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कम टैक्स स्लैब: नए सिस्टम में टैक्स की दरें काफी कम रखी गई हैं।
भारी रिबेट: 12 लाख की आय और स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000 रुपये) मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।
सरल नियम: इसमें निवेश के कागजात जुटाने और जटिल कैलकुलेशन की जरूरत नहीं होती, जो युवा पेशेवरों के लिए बेहद आसान है।
Old Tax Regime: क्या यह अब भी फायदेमंद है?
भले ही नया सिस्टम डिफॉल्ट है, लेकिन पुराना टैक्स सिस्टम पूरी तरह अपनी चमक नहीं खोया है। यह उन टैक्सपेयर्स के लिए अब भी 'गोल्डन चॉइस' है जो:
- होम लोन (Home Loan): सेक्शन 24(b) के तहत ब्याज पर बड़ी छूट लेते हैं।
- निवेश (Investments): जो 80C (LIC, PPF, ELSS), 80D (मेडिक्लेम) और 80CCD(1B) (NPS) में निवेश करते हैं।
- भत्ते (Allowances): जिन्हें HRA (House Rent Allowance) और LTA जैसी छूट का लाभ मिलता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराणा जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों ने सालों पहले टैक्स सेविंग को ध्यान में रखकर लॉन्ग टर्म वित्तीय योजनाएं (जैसे होम लोन या इंश्योरेंस) बनाई हैं, उनके लिए पुराना सिस्टम ही बेहतर है।
Budget 2026: क्या पुराने सिस्टम की विदाई तय है?
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Budget 2026 में पुराने टैक्स रेजीम को तुरंत खत्म करना सरकार के लिए एक कठिन फैसला हो सकता है। सरकार की रणनीति 'अचानक बंद करने' के बजाय 'धीरे-धीरे मजबूती' देने की है।
ट्रांजिशन फेज: सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे निवेश आधारित छूट से बाहर निकलें और कम दरों वाले सरल सिस्टम में शिफ्ट हों।
एकल सिस्टम का लक्ष्य: भविष्य में सरकार का उद्देश्य एक सरल और सिंगल टैक्स सिस्टम बनाना है। इसके लिए नए टैक्स रेजीम में कुछ और जरूरी छूटें जोड़ी जा सकती हैं, ताकि पुराने सिस्टम की जरूरत खुद-ब-खुद खत्म हो जाए।
आपको क्या चुनना चाहिए?
| परिस्थिति | आपके लिए बेहतर विकल्प |
| कम निवेश, कोई होम लोन नहीं | नया टैक्स रेजीम (New Tax Regime) |
| होम लोन, इंश्योरेंस और NPS निवेश | पुराना टैक्स रेजीम (Old Tax Regime) |
| नई नौकरी और साधारण आय | नया टैक्स रेजीम (सरल और अधिक बचत) |
टिप: दो टैक्स सिस्टम होने से फिलहाल उलझन जरूर है, लेकिन यह टैक्सपेयर्स को विकल्प चुनने की आजादी भी देता है। भविष्य के संकेत साफ हैं-सरकार सरल टैक्स व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।
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