Budget 2024: मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए राहत भरी खबर, 25000₹ तक का टैक्स बकाया होगा माफ
Budget 2024 Income Tax, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतरिम बजट पेश किया। इस बजट में मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग की उम्मीदों को धराशायी करते हुए टैक्स में कोई छूट नहीं दी है।
लेकिन इस अंतरिम बजट में उन करदाताओं को राहत मिली है, जिन पर विवादित प्रत्यक्ष कर बकाया है। इस फैसले से खासकर मध्यम वर्ग के आयकर दाताओं को राहत मिलने की संभावना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, बड़े पैमाने पर छोटे, गैर-सत्यापित, गैर-समाधान या विवादित प्रत्यक्ष करों की डिमांड बकाया है, इनमें से कई वर्ष 1962 की हैं। जिनके बने रहने से करदाताओं को चिंता रहती है और ये ईमानदार करदाताओं के वर्षों के रिफंड में बाधा भी हैं।
सरकार ने वित्त वर्ष 2009-10 तक के 25000 रुपये तक की टैक्स डिमांड और 2014-15 तक की 10000 रुपये तक की टैक्स डिमांड को वापस लेने का प्रस्ताव दिया है। इससे 1 करोड़ करदाताओं को फायदा होगा। सरकार का ध्यान टैक्सपेयर्स के लिए सेवाओं में सुधार पर है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार तेजी से बढ़ती आबादी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी।
सीधे शब्दों में कहें तो जिन कारदाताओं का वित्त वर्ष 2009-10 तक की अवधि का 25 हजार रुपये तक का बकाया है और वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2014-15 के लिए 10 हजार रुपये तक का बकाया है। उसे वापस लिया गया है यानी इन करदाताओं को अब ये रकम जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
किसे मिलते हैं बकाया कर डिमांड नोटिस
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि व्यक्तिगत तौर पर किसी को भी आयकर अधिनियम, 1961 की विभिन्न धाराओं के तहत बकाया कर डिमांड नोटिस मिल सकता है। आमतौर पर एक वेतनभोगी व्यक्ति को छह प्रकार के कर नोटिस मिलते हैं। एक वेतनभोगी को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा - 143(1), 139(9), 142, 143(2), 148 और 245 के तहत कर नोटिस मिल सकता है।
धारा 143(1) कर नोटिस तब भेजा जाता है जब सीपीसी, आयकर विभाग द्वारा आयकर रिटर्न संसाधित होने के बाद कर मांग देय होती है। धारा 139(9) कर नोटिस तब भेजा जाता है जब कोई व्यक्ति दोषपूर्ण आयकर रिटर्न दाखिल करता है। इसमें गलत आईटीआर फॉर्म का उपयोग करके आईटीआर दाखिल करना या टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय हुई कोई अन्य त्रुटि शामिल हो। इसी तरह, पिछले बकाया बकाए को चालू वर्ष के आयकर रिफंड के साथ समायोजित करने के लिए, करदाता को धारा 245 के तहत एक नोटिस जारी किया जाता है।












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