वर्चुअल करेंसी बिटक्वाइन से मुनाफा कमाने पर कर नहीं देना पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों में वर्चुअल करेंसी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है, बिटक्वाइन ने लोगों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है, जिसके चलते लोग इसमे काफी निवेश भी कर रहे हैं। लेकिन वर्चअल करेंसी पर किस तरह से कर का भुगतान करना है, इसको लेकर अभी तक लोगों में नियम की जागरुकता नहीं है, जिसकी वजह से लोग इसकी बिक्री से होने वाली कमाई के कर का भुगतान नहीं कर करते हैं। सॉफ्टवेयर डेवलेपर पवन भारती का कहना ने हाल ही में 55000 रुपए के बिटक्वाइन बेचे थे, उन्हें उनके निवेश का दोगुना फायाद हुआ था। पवन का कहना है कि ना तो मैं और ना ही मेरे दोस्त को इस बात की जानकारी है कि हमे इस फायदे पर कर का भुगतान करना है।

क्या कहता है नियम

क्या कहता है नियम

वर्चुअल करेंसी से होने वाली कमाई के बारे में कर विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को उनके फायदे पर कर का भुगतान करना होता है, लोगों को लगता है कि आयकर में वर्चुअल करेंसी से होने वाले लाभ पर कर नहीं देना होता है, लेकिन दूसरे नियमों के तह लोगों को हर तरह की कमाई पर होने वाले लाभ का कर देना होता है। कैपिटल असेट के बारे में सेक्शन 2 (14) में साफ कहा गया है कि इसमे हर तरह के निवेश पर होने वाले फायदे पर कर भुगतान करना होता है, जिसमे क्रिप्टो करेंसी भी शामिल है।

कितना देना होगा टैक्स

कितना देना होगा टैक्स

वर्चुअल करेंसी पर कितना कर देना होगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस मकसद से खरीदा गया है। टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि अगर किसी ने वर्चुअल करेंसी को कुछ सामान खरीदने के लिए लिया है तो उसे कोई कर नहीं देना है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे इसलिए खरीदते हैं ताकि बाद में इसकी कीमत बढ़ने पर इसे बेचकर मुनाफा कमाया जाए। ऐसे में इसे बेचने पर जो भी लाभ होता है उसपर कर देना अनिवार्य है, क्योंकि इसे कैपिटल गेन के तौर पर लिया जाता है। अगर इसे तीन साल तक के लिए निवेश के तौर पर खरीदा जाता है तो इसे लॉग टर्म मुनाफा के तौर पर लिया जाएगा। लिहाजा निवेशक को 20 फीसदी का कर देना होगा।

ऐसे होगी पहचान

ऐसे होगी पहचान

अगर कोई निवेशक कम समय के भीतर करेंसी को बेच देता है, तो उसे शॉर्ट टर्म मुनाफे के तौर पर देखा जाएगा, लिहाजा मुनाफे को निवेशक के निवेश ते साथ जोड़कर देखा जाएगा और उसे उसी आधार पर कर का भुगतान करना होगा। कोई निवेशक अगर बार-बार करेंसी को खरीदता और बेचता है तो उसे बतौर ट्रेडर के तौर पर देखा जाएगा, ऐसे में कर बदल जाएगा और निवेशक के मुनाफे को बिजनेस के तौर पर देखा जाएगा, लिहाजा निवेशक को टैक्स बतौर बिजनेसमैन के रुप में देना होगा। हालांकि इस बात की सीधी परिभाषा नहीं है कि कितनी बार खरीदने व बेचने पर निवेशक को बिजनेसमैन समझा जाएगा।

आसानी से आ सकते हैं राडार में

आसानी से आ सकते हैं राडार में

ऑनलाइन बिटक्वाइन की खरीद व बिक्री को आसानी से सरकार ट्रैक कर सकती है, क्योंकि इसे खरीदने व बेचने से पहले केवाईसी भरना होता है, साथ ही बैंक से लेन-देन को भी साफ तौर पर ट्रेस किया जा सकता है। ऐसे में यह सोचना कि आपके लेनदेन को ट्रैक नहीं किया जा सकता है, यह निवेशक की भूल है। मुनाफ पर टैक्स का भुगतान नहीं करना, आयकर विभाग के नोटिस को न्योता देना है।

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