Atishi जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले क्या बोलीं? ऑनलाइन गेमिंग पर अशनीर ग्रोवर की चिंता पर दिया आश्वासन
Atishi Marlena अरविंद केजरीवाल नीत दिल्ली सरकार में ऐसी मंत्री हैं, जो सार्वजनिक मंचों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। आतिशी ने ताजा घटनाक्रम में जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से पहले बयान दिया है।
ऑनलाइन गेमिंग पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) के संबंध में निवेशक अशनीर ग्रोवर के बयान पर आतिशी ने आश्वासन दिया है। बता दें कि अशनीर ग्रोवर भारतीय स्टार्टअप- भारत पे के फाउंडर और शार्क टैंक में जज रह चुके हैं।

दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद की बैठक में सभी राज्यों के वित्त मंत्री शरीक होंगे। दिल्ली की वित्त मंत्री आतिशी ने बुधवार को कहा कि वह बैठक में ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी वसूले जाने के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह करेंगी।
जीएसटी काउंसिल की बुधवार की 51वीं बैठक से पहले आतिशी ने भारत-पे के सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर को आश्वासन देते हुए ट्वीट किया, फैसले से जुड़ी समस्याओं को चिह्नित करने के लिए धन्यवाद @Ashneer_Grover।
आतिशी ने कहा, आज @GST_Council की फिर से बैठक होगी। मैं ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करूंगी। आप नेता आतिशी ने कहा, दिल्ली सरकार का मानना है कि 'स्टार्टअप को बढ़ावा देना ही अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का एकमात्र तरीका है!
अशनीर ग्रोवर ने विगत 11 जुलाई को ट्वीट कर ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी का मुद्दा उठाया था। आतिशी ग्रोवर के इसी ट्वीट का जवाब दे रही थीं, जिसमें ग्रोवर ने ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स लगाने के जीएसटी परिषद के फैसले की बार-बार आलोचना की है।
बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने अपनी 50वीं बैठक में, विभिन्न निर्णय लिए, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग, घुड़दौड़ और कैसीनो को 28% टैक्स स्लैब के दायरे में लाया गया है। बता दें कि 28 फीसद माल और सेवा कर (जीएसटी) के तहत उच्चतम टैक्स स्लैब है।
28% जीएसटी ऑनलाइन गेमिंग को कैसे प्रभावित करता है?
गेमिंग उद्योग ने भी जीएसटी काउंसिल के इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि इससे उद्योग को 'महत्वपूर्ण चुनौतियां' मिलेंगी। टेक पॉलिसी वकील और ईपीडब्ल्यूए (ई-गेमर्स एंड प्लेयर्स वेलफेयर एसोसिएशन) की निदेशक शिवानी झा ने इसकी आलोचना की थी।
अधिक जीएसटी वसूले जाने के फैसले पर लाइवमिंट की रिपोर्ट में शिवानी झा ने बताया, इस फैसले के कार्यान्वयन का मतलब यह होगा कि एक गेम पर खर्च किए गए प्रति ₹100 पर ₹28 का शुल्क लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, इससे न केवल खिलाड़ी हतोत्साहित होंगे, बल्कि जिन पेशेवरों के लिए यह आजीविका है, उन पर भी टैक्स का बोझ बढ़ेगा। यह उन्हें ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर खेलने के लिए भी मजबूर कर सकता है। एक डिजिटल प्रगतिशील गेमिंग पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की राह में फैसला रोड़ा बनेगी।












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