20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के बाद भी 5 फीसदी घट सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था, ICRA रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कहर को रोकने के लिए देश में 25 मार्च को लॉकडाउन का ऐलान किया गया था। इस बीच सभी उद्योग-धंधे पूरी तरह से ठप थे। जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया था। इस बीच रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अर्थव्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक खबर दी है, जिसके मुताबिक आर्थिक पैकेज के बाद भी अर्थव्यवस्था में 5 फीसदी तक की कमी आएगी। इससे पहले इक्रा ने सिर्फ 1-2 प्रतिशत कमी का अनुमान लगाया था।

इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक मार्च में लॉकडाउन के बाद सप्लाई और डिमांड में भारी कमी आई है। इस बीच मजदूर भी अपने घरों को लौट गए, जिस वजह से उद्योग-धंधे को दोबारा शुरू करना भी मुश्किल लग रहा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में ज्यादा कमी आएगी। इससे पहले इक्रा ने 2019-20 की चौथी तिमाही में 4.5 गिरावट का अनुमान जताया था। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 25 प्रतिशत की कमी का अनुमान है, पहले इक्रा ने 16 प्रतिशत कमी का अनुमान लगाया था। वहीं दूसरी और तीसरी तीमाही में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जबकि चौधे में 5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे तेजी आएगी, इस वजह से 2021 में जीडीपी ग्रोथ 2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया।
इक्रा के मुताबिक आर्थिक पैकेज की घोषणाएं केवल लॉकडाउन के बाद रिकवरी में मदद करेंगी, ताकी घाटे वाले सेक्टर में कार्यशील कर्ज मिल सके। इनमें से कोई भी दो महीने में हुए नुकसान की भरपाई करने वाला नहीं है। इक्रा के मुताबिक गांवों से शहरों में मजदूरों की वापसी में अभी वक्त लगेगा। ऐसे में आर्थिक गतिविधियों को अभी पटरी पर लाना मुश्किल लग रहा है। इंडिया इंक पर भी कोरोना वायरस के प्रभाव पड़ेंगे। लोगों की नौकरी जाने और सैलरी कम होने से खरीदारी कम होगी। इसका असर कई सेक्टर्स पर पड़ेगा।












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