8th Pay Commission: CGHS खत्म होगी या बनेगी नई बीमा योजना? कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा? कैसे होगा फायदा?
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अच्छी खबर! 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) न सिर्फ सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी की उम्मीद लेकर आया है, बल्कि केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) को एक नई बीमा-आधारित योजना से बदलने की चर्चा भी जोरों पर है।
क्या वाकई CGHS खत्म हो जाएगी? आइए, समझते हैं कि यह नई योजना कर्मचारियों को कैसे फायदा पहुंचा सकती है और इसमें क्या बदलाव होंगे...

What Is CGHS: क्या है CGHS और क्यों है चर्चा में?
CGHS यानी Central Government Health Scheme एक ऐसी योजना है, जो केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को कम कीमत पर इलाज, दवाइयां, और मेडिकल टेस्ट की सुविधा देती है। मिसाल के तौर पर, अगर दिल्ली में कोई केंद्रीय कर्मचारी CGHS कार्ड से किसी पैनल अस्पताल में जाता है, तो उसे नॉर्मल चेकअप से लेकर बड़ी सर्जरी तक सस्ते दाम पर सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि CGHS की सुविधाएं छोटे शहरों या गांवों में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण कई कर्मचारी और पेंशनर इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाते।
पिछले कई सालों से 5वें, 6वें, और 7वें वेतन आयोगों ने सुझाव दिया था कि CGHS की जगह एक ऐसी बीमा-आधारित योजना लाई जाए, जो पूरे देश में काम करे। अब 8वें वेतन आयोग के साथ इस चर्चा ने फिर जोर पकड़ा है। जनवरी 2025 में खबरें आईं कि स्वास्थ्य मंत्रालय CGHS को एक नई योजना, Central Government Employees and Pensioners Health Insurance Scheme (CGEPHIS), से बदल सकता है।
CGEPHIS क्या है? उदाहरण के साथ समझें
CGEPHIS यानी एक नई बीमा-आधारित हेल्थ स्कीम, जिसे IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक प्राधिकरण) द्वारा रजिस्टर्ड बीमा कंपनियों के जरिए चलाने की योजना है। मान लीजिए, आप एक केंद्रीय कर्मचारी हैं और आपके शहर में CGHS का कोई अस्पताल नहीं है। अभी आपको इलाज के लिए या तो बड़े शहर जाना पड़ता है या अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। लेकिन CGEPHIS के तहत आप किसी भी प्राइवेट अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकते हैं, जैसे आजकल निजी बीमा कंपनियां ऑफर करती हैं।
- यहां है उदाहरण: मान लें, रमेश एक केंद्रीय कर्मचारी हैं और बिहार के एक छोटे शहर में रहते हैं। CGHS के तहत उन्हें इलाज के लिए पटना या दिल्ली जाना पड़ता है, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। अगर CGEPHIS लागू होती है, तो रमेश अपने शहर के किसी प्राइवेट अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकते हैं, और बीमा कंपनी सीधे बिल का भुगतान करेगी। यह योजना ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी राहत होगी।
CGHS में पहले से हुए बदलाव
7वें वेतन आयोग (2016-2025) के दौरान CGHS को और बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं:-
- डिजिटल सुविधाएं: MyCGHS ऐप और HMIS पोर्टल के जरिए कर्मचारी अब घर बैठे अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं, E-कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं, और मेडिकल उपकरणों (जैसे CPAP, BiPAP) के लिए 5 दिन में मंजूरी पा सकते हैं।
- आसान रेफरल: सरकारी अस्पतालों में बिना रेफरल के इलाज और निजी अस्पतालों में एक रेफरल पर तीन विशेषज्ञों से परामर्श की सुविधा दी गई।
- आभा लिंकेज: CGHS कार्ड को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (ABHA) से जोड़ने की कोशिश शुरू हुई, हालांकि इसे अनिवार्य करने का फैसला टल गया।
- फिजियोथेरेपी और वार्ड सुधार: घर पर फिजियोथेरेपी और सैलरी के हिसाब से निजी अस्पतालों में वार्ड आवंटन की सुविधा शुरू की गई।
ये बदलाव CGHS को पहले से ज्यादा पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाते हैं, लेकिन इसकी सीमित पहुंच की समस्या अभी भी बरकरार है।
क्या CGHS वाकई खत्म होगी?
8वें वेतन आयोग की घोषणा जनवरी 2025 में हो चुकी है, लेकिन इसके नियम-कायदों (Terms of Reference) और अध्यक्ष की नियुक्ति अभी बाकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय CGHS को CGEPHIS से बदलने पर विचार कर रहा है। यह नई स्कीम:-
- कैशलेस इलाज: प्राइवेट अस्पतालों में आसान और कैशलेस इलाज की सुविधा देगी।
- विस्तृत नेटवर्क: छोटे शहरों और गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाएगी।
- IRDAI की भूमिका: बीमा कंपनियां इसे चलाएंगी, जिससे प्रक्रिया तेज और आधुनिक होगी।
हालांकि, सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। 6वें और 7वें वेतन आयोगों ने भी ऐसी योजनाएँ सुझाई थीं, लेकिन लागू नहीं हुईं। 6वें वेतन आयोग ने एक वैकल्पिक बीमा योजना का सुझाव दिया था, जिसमें कर्मचारी प्रीमियम देकर शामिल हो सकते थे। 7वें आयोग ने CGHS को CS(MA) और ECHS (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) के साथ जोड़कर कैशलेस इलाज की सिफारिश की थी।
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें?
8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अधिसूचना में देरी के कारण यह तारीख टल सकती है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं:-
- नई बीमा योजना: CGEPHIS जैसी स्कीम, जो पूरे देश में काम करे।
- बढ़ा हुआ फिटमेंट फैक्टर: 7वें आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, और अब 2.86 की उम्मीद है। इससे न्यूनतम सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹51,480 और पेंशन ₹9,000 से ₹25,740 हो सकती है।
- अधिक अस्पताल: CS(MA) और ECHS के अस्पतालों को CGHS में शामिल करने की मांग।
उदाहरण: अगर रमेश की बेसिक सैलरी ₹18,000 है और फिटमेंट फैक्टर 2.86 लागू होता है, तो उनकी नई सैलरी ₹51,480 हो सकती है। लेकिन CGHS का मासिक शुल्क भी सैलरी के हिसाब से बढ़ेगा, जिसके लिए कर्मचारी चाहते हैं कि सुविधाएं भी उसी अनुपात में बढ़ें।
क्या होगा भविष्य?
CGHS को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए 2025 में कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसकी सीमित पहुंच की समस्या बनी हुई है। 8वां वेतन आयोग अगर CGEPHIS को मंजूरी देता है, तो यह 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनरों के लिए बड़ी राहत होगी। लेकिन आधिकारिक अधिसूचना और सिफारिशों का इंतजार है।
क्या CGHS पूरी तरह खत्म होगी, या इसे नई योजना के साथ जोड़ा जाएगा? यह सवाल अभी अनुत्तरित है। लेकिन एक बात तय है-8वां वेतन आयोग न सिर्फ सैलरी, बल्कि कर्मचारियों की हेल्थकेयर सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। कर्मचारियों की नजर अब आयोग की सिफारिशों पर टिकी है, जो 2026 में सामने आ सकती हैं।
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