7 विधानसभा सीटों वाले बुलंदशहर में इस बार क्या हैं समीकरण, जानिए एक-एक सीट का हिसाब
7 विधानसभा सीटों वाले बुलंदशहर में इस बार क्या हैं समीकरण, जानिए एक-एक सीट का हिसाब
बुलंदशहर, 08 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के पहले चरण के लिए बुलंदशहर जिले की सातों विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को वोट डाले जाएंगे, जिसके लिए आज शाम से प्रचार-प्रसार थम जाएगा। सभी पार्टियों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। तो वहीं, किसान आंदोलन, महंगाई, बेरोजगारी और कोविड जैसे मुद्दों के साथ विपक्षी दलों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था, बुलंदशहर की सातों सीटों शिकारपुर, बुलंदशहर, सिकंदराबाद, अनूपशहर, स्याना, डिबाई और खुर्जा सीट पर भगवा झंडा लहराया था। लेकिन 2022 के चुनाव में हालात जरा जुदा-जुदा सी नजर आ रही हैं। दरअसल, कोरोना काल के दौरान लोगों की बड़ी संख्या में बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हुए। वहीं मंहगाई और किसान आंदोलन की आंच ने भी मतदाताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। आइए जानते है कि बुलंदशहर जिले की 7 विधानसभा सीटों पर क्या हैं राजनीतिक समीकरण।

शिकारपुर सीट बनी है सबसे हॉट
बुलंदशहर जिले की शिकारपुर सीट इस वक्त सबस हॉट सीट बनी हुई है। इस सीट पर 9 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। लेकिन इस सीट पर मुख्य मुकाबला योगी सरकार के राज्य मंत्री अनिल शर्मा और समाजवादी पार्टी (सपा)-राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रत्याशी और पांच बार के विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर किरण पाल सिंह के बीच होने के बीच होगा। तो वहीं, इस सीट पर कृषि कानूनों को लेकर किसानों की नाराजगी से चुनाव और रोचक हो गया है। मतदाताओं की बात करते तो इस सीट पर पुरूष मतदाता 170933 और महिला मतदाता 153171 है। वहीं, जाट और ब्राह्मण इस शिकारपुर सीट पर निर्णायक भूमिका में रहते है। 60 हजार मुस्लिम, 60 हजार जाट, 55 हजार ब्राह्मण मतदाता की प्रत्याशी की जीत का रास्ता तय करते हैं। जाटव और ठाकुर मतदाता इस सीट पर 40-40 हजार है।

बुलंदशहर सदर सीट बीजेपी और गठबंधन के बीच होगी टक्कर
बुलंदशहर सदर सीट पर सबसे अधिक 398260 मतदाता हैं। इस सीट पर भाजपा के प्रदीप चौधरी, रालोद के हाजी यूनुस, कांग्रेस के सुशील चौधरी, आम आदमी पार्टी (आप) के विकास शर्मा, बहुजन समाज पार्टी के मोबिन कल्लू कुरेशी समेत कुल 11 प्रत्याशी चुनावी मैदान हैं। इस सीट पर भाजपा ने अपनी मौजूदा विधायक उषा सिरोही का टिकट काटकर प्रदीप चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। एक वर्ष पूर्व हुए उपचुनाव में भाजपा की उषा सिरोही ने 21000 से अधिक वोटों से बसपा के हाजी यूनुस को हराया था। वे अब सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी हैं। 2012 से इस सीट पर भाजपा और बसपा के बीच टक्कर होती आई है। पर, समीकरणों के हिसाब से इस बार रालोद और भाजपा के बीच मुकाबला माना जा रहा है। हाजी यूनुस बसपा के पूर्व विधायक हाजी अलीम के भाई हैं और एक लाख से अधिक मुस्लिम मतदाताओं में इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

बसपा-कांग्रेस बिगाड़ा सकती है भाजपा का गणित
हालांकि, बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी मोबिन कल्लू को उतारकर उनका गणित गड़बड़ा दिया है। तो वहीं, रालोद के परंपरागत मतदाता माने जाने वाले जाट मतदाताओं का झुकाव पिछले चुनाव में भाजपा की तरफ देखा गया था। भाजपा ने इस बार भी जाट समाज से ही प्रत्याशी उतारा है। भाजपा का सारा गणित इनके अलावा 36 हजार ब्राह्मण, 35 हजार लोध, 23 हजार क्षत्रिय, 15 हजार वाल्मीकि मतदाताओं पर टिका है। तो वहीं, कांग्रेस ने सुशील चौधरी को यहां से टिकट दिया है। माना जा रहा है कि इस बार 40 हजार जाट वोटर भाजपा, रालोद के साथ कांग्रेस की तरफ भी जा सकता है। ध्रुवीकरण के साथ भाजपा गैर जाट और गैर मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश में लगी हुई है। वहीं, रालोद-सपा गठबंधन की सारी कोशिश जाट और मुस्लिम मतों के बिखराव को रोकने और अपने पाले में लाने की है।

सिकंद्राबाद सीट पर भी बीजेपी को मिलेगी कड़ी टक्कर
बुलंदशहर जिले की सिकंद्राबाद सीट पर भाजपा के लक्ष्मी राज सिंह का मुकाबला कांग्रेस के सलीम अख्तर, सपा के राहुल यादव और बसपा के मनवीर गुर्जर से है। राहुल यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दामाद हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक विमला सोलंकी का टिकट काट कर उनके स्थान पर युवा नेता लक्ष्मी राज सिंह को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में विमला सोलंकी ने बसपा के हाजी इमरान को 28623 वोट से पराजित किया था।

अनूपशहर सीट पर हुआ तीन कोणीय मुकाबला
अनूपशहर सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक संजय शर्मा के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस से के.के. शर्मा, बसपा से रामेश्वर लोधी और कांग्रेस से चौधरी गजेंद्र सिंह चुनाव मैदान में। वर्ष 2017 में संजय शर्मा ने 46522 वोट से बसपा के चौधरी गजेंद्र सिंह को हराया था, जो 2007 और 2012 में इसी सीट से बसपा के टिकट पर विधायक बने थे। इस बार वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। सपा-रालोद और राष्ट्रवादी कांग्रेस के टिकट चुनाव लड़ रहे केके शर्मा के मैदान में आने से इस सीट पर तीन कोणीय मुकाबला हो गया है। दरअसल, अनूपशहर में जाट मतदाताओं की संख्या 16 प्रतिशत मुस्लिम 14 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के मतदाता 16 प्रतिशत, लोधी राजपूत 10 प्रतिशत और वैश्य, ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी 10 प्रतिशत है।

क्या 2017 वाला दम स्याना सीट पर दिखा पाएंगी भाजपा
स्याना सीट पर भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक देवेंद्र सिंह लोधी पर भरोसा जताया है। इसके अलावा रालोद गठबंधन के दिलनवाज खान बसपा के सुनील भारद्वाज, कांग्रेस की पूनम पंडित और आम आदमी पार्टी के सतवीर सिंह सहित आठ प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। दिलनवाज के दादा मुमताज मोहम्मद खान और पिता इम्तियाज खान इस सीट से कई कई बार विधायक रहे हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में जिले की चुनावी इतिहास में सबसे अधिक 71545 वोटों के अंतर से भाजपा के देवेंद्र सिंह लोधी ने बसपा के दिलनवाज खान को हराया था। इस सीट पर लोधी राजपूत मतदाता 22 प्रतिशत है, वहीं मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 18 प्रतिशत है, अनुसूचित जाति के मतदाता भी 15 प्रतिशत हैं। इनके अलावा जाट, राजपूत, त्यागी, ब्राह्मण और गुर्जर मतदाताओं का भी हार-जीत में काफी महत्व है।

क्या कल्याण सिंह के गढ़ में बीजेपी फिर दिखा पाएंगी वही दम
डिबाई सीट पर कुल सात प्रत्याशी चुनावी मैनाम हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक डॉ अनीता लोधी का टिकट काटकर चंद्रपाल सिंह लोधी को खड़ा किया है, वहीं सपा के टिकट पर हरीश लोधी ,कांग्रेस की सुनीता शर्मा, बसपा के करण पाल सिंह और अन्य प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। लोधी बहुल यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन 2007 के चुनाव में बसपा के टिकट पर और 2012 में सपा के टिकट पर गुड्डू पंडित ने कल्याण के पुत्र राजवीर सिंह को हराया था।

खुर्जा सीट पर लगातार नहीं किसी पार्टी का वर्चस्व
खुर्जा सुरक्षित सीट पर आठ उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, इनमें भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक बिजेंदर खटीक का टिकट काटकर मीनाक्षी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं सपा के बंसी सिंह पहाड़िया, कांग्रेस के टूकी मल खटीक और बसपा के विनोद प्रधान के अलावा अन्य प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी कस्मित आजमा रहे हैं। इस सीट पर तीन लाख 87 हजार 328 मतदाता हैं। इस सीट पर कभी किसी पार्टी का लगातार वर्चस्व नहीं रहा है। यहां मतदाताओं ने दलों के आधार पर वोट नहीं दी, बल्कि चेहरे और विकास को आधार मानकर अपना जनप्रतिनिधि चुना है। लगातार उतार-चढ़ाव, इस सीट का मिजाज रहा है। वहीं, जातीय समीकरण की बात करें, तो ठाकुर, मुस्लिम, ब्राह्मण, जाट, अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इस सीट पर 3.20 लाख से अधिक हिदू मतदाता हैं, जबकि करीब 20 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। वैसे तो इस सीट पर कई जाति वर्ग के लोगों का झुकाव महत्वपूर्ण स्थान रखता हैं, लेकिन मुख्य तौर पर ठाकुर और ब्राह्मण मतदाताओं का एक तरफा झुकाव निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।












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