बुलंदशहर के दो छात्रों ने बनाया ‘डेल्टा-3.0’ रोबोट, कोरोना मरीजों को पहुंचाएगा दवा और खाना
बुलंदशहर। कोरोना वायरस का खौफ देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैला हुआ है। कोरोना वारयस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीमें लगी है। लेकिन डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ अब खुद इसकी चपेट में आने लगे हैं। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इस बीमारी से बचाने के लिए बुलंदशहर के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने एक रोबोट तैयार किया है, जो कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों, नर्सिंग, और पैरा मैडिकल स्टाफ को संक्रमित होने से बचाएगा।

आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टरों की कर सकता है मदद
बुलंदशहर सिटी के रहने वाले कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के छात्र निशांत शर्मा और अतुल कुमार ने यह रोबोट मिलकर तैयार किया है। यह रोबोट कोरोना संक्रमित मरीजों को दवाई दे सकता है, साथ ही आइसोलेशन वार्ड में दवा व खाना देने जैसे जरूरी काम करने में स्टाफ की मदद कर सकता है। बता दें, इस रोबोट को दूर से ही ऑपरेट किया जा सकता है, साथ ही रोबोट के डिस्प्ले पर सारी सूचनाएं आती हैं। सबसे खास बात यह हैं कि रोबोट को ब्लूटूथ के जरिए मोबाइल ऐप से कंट्रोल किया जा सकता है। रोबोट को बनाने वाले दोनों छात्रों ने इसका नाम ‘डेल्टा-3.0' रखा है।

14 दिन और डेढ़ लाख रुपए में तैयार हुआ ‘डेल्टा-3.0'
छात्र निशांस शर्मा की मानें तो उसने अपने साथी अतुल के साथ मिलकर महज 14 दिन में रोबोट को तैयार किया है। इस रोबोट को बनाने में करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्चा आया है। निशांत शर्मा की मानें तो इसमें एक लीथियम बैट्री लगी हुई है, जिससे इसका बैट्री बैकअप करीब एक घंटे का है। इसमें दो बैट्री लगा देंगे तो यह दो से ढाई घंटे तक चल सकता है। इसकी रेंज एक किलोमीटर तक है।

सरकार से मांगी मदद
निशांत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि रोबोट को पेटेंट कराने के लिए प्रोसेस करने का भी प्रयास किया जा रहा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार मदद करे तो यह रोबोट और सस्ता बन सकता है। इससे मरीज की देखभाल करने वाला स्टाफ भी इससे बच सकता है।












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