टायरों में पंक्चर लगाने को मजूबर हुई रिंग के धुरंधरों को धूल चटाने वाली प्रियंका, 'रुला' देगी ये कहानी
बुलंदशहर, 09 नवंबर: बॉक्सिंग रिंग में अपने प्रतिद्वंदियों को धूल चटाने वाली प्रियंका लोधी इस वक्त रुई धुनने और टायर में पंक्चर लगाने के लिए मजबूर हैं। राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी होने के बावजूद प्रियंका लोधी को कोई सरकारी मदद नहीं मिल सकी। बुलंदशहर जिले के मिर्जापुर गांव की रहने वाली नेशनल लेवल की बॉक्सर प्रियंका लोधी कई मेडल जीत चुकी हैं। प्रियंका ने 11 अक्टूबर को गोवा में जूनियर बालिका 50 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था।

ओलम्पिक खेलने की है इच्छा
नेशनल लेवल की बॉक्सर प्रियंका लोधी ओलम्पिक खेलने की चाह रखती है और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से आर्थिक मदद व खुद को बहेतर कोचिंग की गुहार लगा रही है। फिलहाल प्रियंका अपने घर के बाहर ही टायर में पंक्चर लगाने की दुकान चलाती हैं। इसके अलावा वह रुई धुनने का भी काम करती हैं।

कक्षा 11 की छात्रा है प्रियंका लोधी
बॉक्सर प्रियंका लोधी बुलंदशहर जिले के मिर्जापुर गांव की रहने वाली है और कक्षा 11 की छात्रा है। प्रियंका लोधी ने बताया कि 11 अक्टूबर 2021 को बालिका सब जूनियर 50 किलो भार वर्ग में गोवा में आयोजित नेशनल बॉक्सिंग कंपटीशन में उत्तर प्रदेश की तरफ से प्रतिभाग किया था और तमिलनाडु की प्रतिद्वंदी को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इससे पूर्व प्रियंका मंडल और स्टेट लेवल पर भी मेडल जीत चुकी है।

प्रियंका लोधी के परिवार की नहीं है आर्थिक स्थिति अच्छी
प्रियंका व उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। प्रियंका अपने पिता बिजेंद्र सिंह के साथ उनके काम में हाथ बटाती है। बाइक में पंक्चर लगाती है और सर्दियों में रुई धुनने की मशीन में रुई धुनती है। तब जाकर दो वक्त की रोजी रोटी मयस्सर हो पाती है। प्रियंका ने बताया कि पांच बहने एक छोटा भाई है, घर में आय के स्रोत नहीं है, ऐसे हालात में पंक्चर लगाना और रुई धुनने को मजबूरी है।
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पंक्चर लगाकर जुटाया प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने का पैसा
प्रियंका ने बताया कि यदि सरकार हमारी मदद करें, बेहतर कोचिंग दिलाएं, तो वह ओलंपिक में भारत का नाम रोशन करने की क्षमता रखती है। प्रियंका कहती है कि अभी तक निजी स्तर पर कोचिंग की और मंडल राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग कंपटीशन में प्रतिभाग किया। इतना ही नहीं, प्रियंका ने सभी कंपटीशों में प्रतिभाग करने के लिए पैसा पंक्चर लगाकर जुटाया।

प्रियंका 'बेटी' नहीं उनका 'बेटा' है...
बिजेंद्र सिंह व उनकी पत्नी लज्जा की माने तो प्रियंका उनकी बेटी नहीं बेटा है और बेटों की तरह ही पालन पोषण किया है। बेटी में बॉक्सिंग की प्रतिभा देख उसे बॉक्सिंग की कोचिंग कराई। प्रियंका के परिजन व ग्रामीणों का भी मानना है कि नेशनल चैंपियन सरकारी इमदाद से महरूम है यदि सरकारी मदद मिले तो गांव की बेटी देश का दुनिया में नाम रोशन कर सकती है।












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