Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

यूपी की इस सीट पर स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी ने बिगाड़ा मुलायम के भतीजे का खेल!

Budaun News, बदायूं। 17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की बदायूं सीट पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं। बदायूं संसदीय सीट पर बीजेपी प्रत्याशी और कैबिनेट मिनिस्टर स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघ मित्र मौर्य मुलायम सिंह यादव के भतीजे व मौजूदा सपा सांसद धर्मेंद्र यादव को कड़ी टक्कर दे रही है। अभी तक हुई गिनती में धर्मेंद्र यादव संघमित्रा मौर्य से 9,705 वोटों से पीछे हैं। संघमित्रा मौर्य को 321562 वोट मिले है, जबकि धर्मेंद्र यादव को 311857 वोट मिले हैं।

सपा को लग सकता है बड़ा झटका

सपा को लग सकता है बड़ा झटका

अगर ये रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं तो समाजवादी पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका है। 2014 के मोदी लहर में भी सपा जिन सीटों को बचा पाई थी, उसमें बदायूं सीट भी शामिल थी। इस बार सपा-बसपा एक साथ गठबंधन कर मैदान में उतरे उसके बावजूद धर्मेंद्र यादव पिछड़ रहे हैं। इसकी एक वजह ये हो सकती है कि बीजेपी सपा-बसपा के जातीय समीकरण को तोड़ने में कामयाब रही। मोदी का चेहरा, केंद्र सरकार के काम और राष्ट्रवाद का मुद्दा चुनावों में काम करता दिख रहा है।

मुलायम के भतीजे है धर्मेंद्र यादव

मुलायम के भतीजे है धर्मेंद्र यादव

बदायूं सीट से घोषित किए गए सपा उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव, मुलायम सिंह यादव के भतीजे हैं और वर्तमान में बदायूं से मौजूदा सांसद हैं। धर्मेंद्र यादव ने 2009 के लोकसभा चुनाव में बाहुबली नेता डीपी यादव को हराकर जीत हासिल की थी। हालांकि उनकी जीत का अंतर महज 32542 वोट था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र यादव ने बदायूं सीट पर भारतीय जनता पार्टी के वागीश पाठक को 166347 वोटों के अंतर से हराया। इससे पहले 2004 में भी यहां समाजवादी पार्टी का ही कब्जा था और सलीम इकबाल शेरवानी लोकसभा सांसद थे, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।

पिछले चुनाव में प्रचंड मोदी लहर के बीच झेलनी पड़ी थी करारी शिकस्त

पिछले चुनाव में प्रचंड मोदी लहर के बीच झेलनी पड़ी थी करारी शिकस्त

पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर के बीच भाजपा को उत्तर प्रदेश की जिन पांच सीटों पर करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी उनमें बदायूं भी शामिल रहा। इस बार चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही यह माना जाने लगा था कि भाजपा यहां भी कोई बड़ा कदम उठाएगी। शुरूआत में संघमित्रा के नाम की कानाफूंसी शुरू हुई थी, लेकिन बाद में स्थानीय दिग्गजों की ओर से पेश की जा रही दावेदारी के बीच उनकी चर्चा कम हो गई थी। लेकिन मौर्य-शाक्य वर्ग में स्वामी प्रसाद मौर्य प्रभावशाली नेताओं के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। बसपा में उनका लंबा समय गुजरा है। सपा-बसपा गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में गई है, इसलिए बसपाइयों से पुराने संबंधों के दम पर बसपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी कर अपनी बेटी को संसद तक पहुंचाने की जुगत में हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+