'स्क्विड गेम' ने बदल दी इस भारतीय एक्टर की जिंदगी

नई दिल्ली, 17 दिसंबर। अनुपम त्रिपाठी कहते हैं कि उनके दादा ने एक बार उनका हाथ देखकर कहा था कि एक दिन वह बहुत धन कमाएंगे. त्रिपाठी मजाक में पूछते हैं, "कहां है मेरा धन?"
33 वर्षीय त्रिपाठी को अपने दादा की उस भविष्यवाणी पर कभी भरोसा नहीं हुआ था. भारतीय एक्टर अनुपम त्रिपाठी लगभग एक दशक पहले दक्षिण कोरिया चले गए थे. उसके बाद वहां उन्होंने थिएटर और फिल्मों में छोटा-मोटा काम किया. उसी ने उन्हें 'स्क्विड गेम्स' में काम करने का मौका दिलाया.
स्क्विड गेम्स दुनियाभर में मशहूर टीवी सीरीज है जो नेटफ्लिक्स की सबसे सफल सीरीज रही है. उस सीरीज में त्रिपाठी ने एक पाकिस्तानी नागरिक अली अब्दुल की भूमिका निभाई है जिसने बतौर कलाकार उनकी जिंदगी बदल दी है. अब वह एक्टिंग को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं.
जिंदगी बदल गई
स्क्विड गेम में अब्दुल ने 199 नंबर खिलाड़ी की भूमिका निभाई है, जो एक मासूम और जज्बाती इंसान है. इस भूमिका ने एकाएक त्रिपाठी को दुनियाभर में मशहूर कर दिया है. उन्हें एसोसिएटेड प्रेस का 'ब्रेकथ्रू एंटरटेनर ऑफ द ईयर' भी चुना गया.
इस सीरीज की सफलता का असर ऐसा हुआ है कि अनुपम त्रिपाठी के अब इंस्टाग्राम पर 40 लाख से ज्यादा फॉलोअर हैं. वह कोरियाई टीवी पर अक्सर दिखने लगे हैं. उनका भाई भारत के उनके गांव में स्क्विड गेम की स्क्रीनिंग कराना चाहता था, जिसे उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया.
वह कहते हैं, "हर कोई इस मौके को मनाना चाहता है. मेरे लिए, मैं बस अपना काम करके आगे बढ़ना चाहता हूं. पिछले 11 साल से कोरिया में मैं ऐसे ही जिया हूं. काम किया और अगले काम की खोज में लग गया."
दिल्ली में जन्मे और पले-बढ़े अनुपम त्रिपाठी ने दक्षिण कोरिया को एक्टिंग की पढ़ाई के लिए चुना था. उन्हें कोरिया नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट्स की एक प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप पर दाखिला मिला था. 2006 से वह बतौर एक्टर काम कर रहे थे लेकिन उनका ज्यादातर काम थिएटर में ही रहा. हालांकि वह कुछ बड़ा करने के लिए छटपटा रहे थे. वह बताते हैं, "मैं एकदम केंद्रित था. पेशेवराना एक्टिंग सीखना मेरा सपना था."
मुश्किल थी शुरुआत
लेकिन इस सपने को दक्षिण कोरिया में पूरा करना इतना आसान नहीं था. किसी बेगाने देश में एक्टिंग सीखना एक बात है लेकिन नई भाषा सीखकर फिर उसमें एक्टिंग करना दूसरी. वह कहते हैं दक्षिण कोरिया पहुंचने के बाद इसका अहसास हुआ. वह बताते हैं, "मैं रो रहा था. दो ही चीजें थीं, रोना और सीखना. पिछले साढ़े तीन महीने से मैं वही कर रहा था."
जब घर की याद आनी बंद हुई तो अपने सहपाठियों के से उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं. ग्रैजुएशन के बाद उन्होंने भी वही किया जो अक्सर बेकाम एक्टर करते हैं, यानी एक काम की तलाश करते हुए एक रेस्तरां में काम. वक्त बीतने के साथ-साथ काम बढ़ता गया. उन्हें थिएटर और फिल्मों में काम मिलने लगा.
वह बताते हैं, "मैंने कोरियन में बेहतर प्रदर्शन करना शउरू किया. अब मैं कोरियन, अंग्रेजी और हिंदी तीनों में काम कर सकता हूं." इसलिए जब अली का किरदार उनके रास्ते आया तो वह तैयार था. पर काम मिलने के बाद उनका मूड एकदम बदल गया.
त्रिपाठी बताते हैं, "उसके पहले मैंने हर फिल्म में कुछ लाइनें ही की थीं. मैं बहुत उत्साहित भी था लेकिन बहुत बहुत नर्वस भी था. इतनी बड़ी चीज थी, मैं कसे करूंगा!" सही बात थी. यह भूमिका और यह मौका कई मायनों में बड़ा था. उन्हें अपने शरीर में भी बदलाव करने थे जो स्क्विड गेम बनाने वालों की मांग थी.
और सपने भी हैं
जब शूटिंग शुरू हुई तो स्क्विड गेम ने कुछ नए दोस्त बनाए. खासकर पार्क हाए-सू, जिन्होंने 228 नंबर खिलाड़ी का किरदार निभाया है. यानी वह शख्स जो अली को धोखा देता है.
अपनी इस दोस्ती के बारे में त्रिपाठी बताते हैं, "हम हर बात पर बात कर सकते हैं, सब कुछ साझा कर सकते हैं और हर वक्त बात कर सकते हैं. शो में भी ऐसा ही था. एक दूसरे पर भरोसा करना था, जब तक अली को पता नहीं चलता कि सांग-वू ही उसे धोखा दे रहा है."
अभी यह नहीं पता है कि अगर शो का दूसरा सीजन आता है तो त्रिपाठी को उसमें रखा जाएगा या नहीं. अली को मरते दिखाया तो नहीं गया था लेकिन उसका शव एक ताबूत में था. लेकिन त्रिपाठी आगे बढ़ रहे हैं. उनके पास पूरे करने के लिए और बहुत से सपने हैं जैसे मार्टिन स्कॉरसीसी, जेम्स कैमरन और टेरेंस मलिक के साथ काम करना है.
वीके/एए (एपी)
Source: DW












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