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World Sparrow Day: गौरैया की याद में बनी दुनिया एकमात्र कब्र, 1974 में हुई मौत, प्लेट पर लिखा है संदेश

विश्व गौरैया दिवस पर एक इमोशनल पोस्ट इंटरनेट पर वायरल हो रही है। जिसमें दुनिया की एकमात्र गौरैया की कब्र की तस्वीर शेयर की गई है।

Sparrow in Dhal Ni Pol Ahmedabad

Sparrow in Dhal Ni Pol Ahmedabad: पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्रत्येक जीवों की अपनी अगल पहचान होती है। बात अगर गौरैया की हो तो ये कई मायनों में विशिष्ट है। लेकिन इसकी कम होती संख्या विश्वभर में चिंता का विषय है। गौरैया संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) मनाया जाता है। ऐसे में गौरैया से जुड़ी यादों पर इस दिन चर्चा ना हो ये कैसे हो सकता है? गौरैया की याद में बनी दुनिया की एकमत्र कब्र की तस्वीर इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है।

विलुप्त हो रही गौरैया
भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में गौरैया पक्षी की संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में गौरैया के संरक्षण के प्रति जागरूकता आवश्यता है। दरअसल, गौरैया पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे पुरानी पक्षी प्रजातियों में से एक है। ऐसे में इसके विलुप्ति के कगार पर पहुंचना बेहद चिंता का विषय है। जिसके चलते साल 2010 से 20 मार्च को इस पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत नेचर फॉरएवर सोसाइटी (India) और इको-सिस एक्शन फ़ाउंडेशन (France) के सहयोग से हुई थी। भारत में इसकी शुरूआत नासिक के मोहम्मद दिलावर ने नेचर फॉरएवर सोसायटी (NFS) की स्थापना करके की थी।

1974 में मारी गई गौरैया की स्मृति
आज विश्व गौरैया दिवस पर गुजरात के अहमदाबाद में स्थित एक गौरैया के स्मारक की खूब चर्चा है। वन विभाग के अधिकारी प्रवीण कस्वां ने अपने ट्विटर हैंडल @ParveenKaswan पर गौरैया के स्मारक की तस्वीरें शेयर की हैं। पोस्ट के साथ कैप्शन में उन्होंने लिखा, "आज विश्व गौरैया दिवस है। जिनके गीत दिन ब दिन फीके होते जा रहे हैं। लेकिन आज यहां एक अनोखी बात शेयर करने वाली है। विश्व में गौरैया को समर्पित एकमात्र पट्टिका अहमदाबाद में है। मार्च 1974 में पुलिस फायरिंग में मारी गई गौरैया को समर्पित। लोग खूबसूरत हैं !!"

कहां है गौरैया का स्मारक?
गौरैया का ये स्मारक अहमदाबाद में है। अहमदाबाद के ढाल नि पोल में स्थित है। जहां 1974 में 'रोटी रामखान (नवनिर्माण आंदोलन)' में हुई पुलिस की फायरिंग में एक गौरैया को गोली लग गई थी। गोली लगने से गौरैया की मौत हो गई थी। जिसके बाद उसकी याद में वहां एक कब्र बनाई गई। जिस पर लिखा है कि 2 मार्च, 1974 को शाम 5 बजकर 25 मिनट पर 'रोटी रामखान (नवनिर्माण आंदोलन)' के दौरान फायरिंग में गौरैया मारी गई।

यूजर्स ने किए इमोशनल कमेंट
गौरैया की ये सीमेंटेड कब्र है। आज जब ये प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है तो ये कब्र गौरैया की याद दिलाती है। ट्वीटर पर गौरैया के स्मारक की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। जिस पर कई यूजर्स ने इमोशनल पोस्ट भी किए हैं। एक यूजर्स ने लिखा, "मेरा दिल पिघल गया। हम इस साल क्रिसमस की रोशनी नहीं बुझा रहे हैं क्योंकि एक अकेली गौरैया ने हमारे बरामदे की छत की छोटी सी जगह में घोंसला बनाना शुरू कर दिया है। शाम के साथ आता है और भोर में चला जाता है। मेरे पिताजी ने बरामदे में जोर से बात करने पर पाबंदी लगा दी है, कहीं हम उसकी नींद में खलल न डालें।" जबकि एक अन्य ने लिखा, "अब हमारे पास गुजरात नरसंहार के पीड़ितों के लिए ऐसी कोई पट्टिका नहीं है। आइए उनके लिए कुछ बनाते हैं"।

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