15 सालों से छुट्टी पर था कर्मचारी, नहीं बढ़ी सैलरी तो कंपनी के खिलाफ किया केस
एक कर्मचारी पिछले 15 सालों से कंपनी से नदारद है। लेकिन किन्हीं कारणवश कंपनी ने उसे बाहर का रास्ता नहीं दिखाया। अब कर्मचारी ने कंपनी के खिलाफ सैलरी ना बढ़ाने को लेकर केस किया है।

बीमार पड़ने पर कौन छुट्टी नहीं लेता। और ऐसे में हर कर्मचारी को उम्मीद होती है कि कंपनी उसे सैलरी दे। हर कंपनी के सालाना लीव प्लान में सिक लीव भी होती है, ऐसे में लिमिट से लेने पर कंपनी ये छुट्टियां सभी कर्मचारियों को देती है।
लेकिन क्या किसी कर्मचारी का मेडिकल कंडीशन की वजह से कंपनी से सालों तक गायब रहने के बाद सैलरी बढ़ाने की मांग करना जायज होगा? सुनने में अजीब लगने वाली ये घटना सच है।
2008 से छुट्टी पर है शख्स
जी हां! एक सीनियर आईटी कर्मचारी साल 2008 से किसी बीमारी की वजह से छुट्टी पर है। अब कथित तौर पर इस कर्मचारी ने कंपनी के खिलाफ सैलरी ना बढ़ाए जाने को लेकर मुकदमा दायर किया है। इयान क्लिफोर्ड नाम का ये कर्मचारी आईबीएम में काम करता है। कंपनी का दावा है कि वो पिछले 15 सालों से काम नहीं कर रहा है और ऐसे में उसकी सैलरी भी नहीं बढ़ाई गई।
55 लाख मिले और...
'टाइम्स नाउ' की खबर के मुताबिक आईबीएम के हेल्थ प्लान के मुताबिक आईटी स्पेशलिस्ट शख्स को 55 लाख रुपये सालाना मिले और प्लान के मुताबिक 65 वर्ष की आयु तक उसे सैलरी भी दी जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लिफर्ड को कंपनी की विकलांगता योजना में डाल दिया गया था, ताकि उसे निकालना ना पड़े। इस समझौते के चलते वो काम करने के लिए बाध्य नहीं था और आईबीएम का कर्मचारी बना रहा।
सैलरी ना बढ़ने से नाराज था कर्मी
हालांकि, इन सबके बावजूद क्लिफर्ड ने हाल ही में कंपनी के खिलाफ केस किया है, क्योंकि वो सैलरी ना बढ़ने की वजह से काफी नाराज था। 2022 की फरवरी में जब वो विकलांगता भेदभाव के दावों के साथ ट्रिब्यूनल गया, तो उसके दावों को जज ने ये कहकर खारिज कर दिया कि उसे काफी सारे लाभों और अच्छे व्यवहास के साथ ट्रीटमेंट मिला।
क्या बोले जज?
इम्प्लॉयमेंट जज पॉल हाउसगो ने इस पूरे मामले को खारिज करते हुए कहा कि एक्टिव कर्मचारियों को वेतन में बढ़ोतरी मिल सकती है लेकिन जो काम नहीं कर रहे उन्हें नहीं। दोनों में अंतर है। लेकिन मेरे फैसले में विकलांगता की वजह से कोई हानि नहीं हुई है।
ये विकलांगता भेदभाव नहीं...
जज ने आगे कहा कि दावा ये है कि वेतिन में बढ़ोतरी ना करने की वजह विकलांगता भेदभाव है क्योंकि ये उन लोगों की तुलना में कम अच्छा ट्रीटमेंट है, जो विकलांग नहीं हैं। ये विवाद टिकाऊ नहीं है क्योंकि विकलांग ही तो योजना से लाभान्वित हो सकते हैं। ये विकलांगता भेदभाव नहीं है।












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