अंग्रेजी में MA, लाखों की ब्रिटिश काउंसिल की नौकरी छोड़ दिल्ली में चाय बेच रही है लड़की, जानिए क्यों किया ऐसा
अंग्रेजी में मास्टर डिग्री और लाखों की नौकरी छोड़ दिल्ली कैंट के गोपीनाथ बाजार में एक चाय की दुकान चलाने वाली महिला शर्मिष्ठा घोष की की कहानी वायरल हो रही है।

भारत में स्टार्टअप्स ने पिछले पांच सालों में तेजी रफ्तार पकड़ी है। देश के युवा इसके प्रति ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। कई युवाओं ने अपना बिजनेस और खुद का धंधा शरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ी है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों लोगों ने मजबूरी में आकर अपना खुद का काम शुरू किया लेकिन अब लोग अपनी मर्जी से जॉब छोड़कर खुद का स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। ग्रेजुएट चाय वाली, MBA चायवाला से लेकर एमबीए पराठे वाले तक की, प्रेरित करने वाली कहानी पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया पर चर्चाओं में रही है। इसी बीच अब MA इंग्लिश चायवाली महिला की एक कहानी वायरल हो रही है, जो लाखों की ब्रिटिश काउंसिल की नौकरी छोड़ दिल्ली के सड़क किनारे चाय की टपरी लगाती हैं।

'इंग्लिश चायवाली' के नाम से फेमस हैं शर्मिष्ठा घोष
अंग्रेजी में मास्टर डिग्री और लाखों की नौकरी छोड़ दिल्ली कैंट के गोपीनाथ बाजार में एक चाय की दुकान चलाने वाली महिला शर्मिष्ठा घोष की की कहानी वायरल हो रही है। शर्मिष्ठा घोष के पास अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री है। चाय की टपरी से खोलने से पहले शर्मिष्ठा घोष ब्रिटिश काउंसिल में लाखों की नौकरी करती थी। हालांकि शर्मिष्ठा का मन नौकरी में नहीं लग रहा था। इसलिए नौकरी को छोड़ शर्मिष्ठा ने दिल्ली कैंट के गोपीनाथ बाजार में एक चाय की दुकान खोली। अब इलाके में शर्मिष्ठा को लोग इंग्लिश चायवाली कहकर बुलाते हैं।

आखिर क्यों बेच रही हैं चाय?
शर्मिष्ठा की कहानी को भारतीय सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर संजय खन्ना ने अपने लिंक्डइन अकाउंट पर साझा किया है। पोस्ट के मुताबिक, ''शर्मिष्ठा चायोस (Chaiyos) की तरह एक बड़ा चेन बनाना चाहती हैं। उनका सपना है कि वह एक चायोस की तरह बड़ा ब्रैंड क्रिएट करें। संजय खन्ना कहते हैं, '''मैं एक्साइटेड हो गया, और मैंने उसने चाय की टपरी खोलने की वजह पूछी...? शर्मिष्ठा ने कहा कि उनके पास Chaiyos जितना बड़ा ब्रैंड खड़ा करने का विजन है।''

अपने बारे में 'इंग्लिश चायवाली' ने क्या-क्या बताया?
रिटायर्ड ब्रिगेडियर संजय खन्ना ने लिखा, ''इन्होंने अपना नाम शर्मिष्ठा घोष बताया, जिन्होंने अंग्रेजी साहित्य में मास्टर किया है और ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ी है। उनकी एक दोस्त भावना राव भी इस छोटे से चाय के स्टॉल में ज्वाइंट पार्टनर हैं। जो लुफ्थांसा में काम करती हैं।''

कैसे मैनेज करती हैं चाय की दुकान
चाय की दुकान चलाने में शर्मिष्ठा अपने घरवालों की भी मदद लेती हैं। इसके अलावा चाय की दुकान पर शर्मिष्ठा ने एक हल्पेर भी रखा है। चाय की दुकान शाम को खुलती है और कुछ घंटों तक काम करने के बाद भी वापस चले जाते हैं।
संजय खन्ना ने कहा, ''अपने सपने को साकार करने के लिए उसके प्रति काम करने के लिए जुनून और ईमानदारी होनी चाहिए। मैं बहुत से योग्य युवाओं से मिला हूं जो निराशा में हैं और पेशेवर कद के अनुरूप एक उपयुक्त नौकरी की तलाश में हैं। ये उन सभी के लिए एक बड़ा मैसेज है।''












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