अलका ने जन्मदिन पर बदली पहचान! सहेली को बनाया जीवन साथी, अग्नि को साक्षी मानकर लिए सात फेरे
कहते हैं कि प्यार और जंग में सब जायज है। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां सरहदें तो नहीं लेकिन प्यार की सारी हदें पार कर दी हैं। यहां एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपनी प्रेमिका के साथ कानूनी तौर पर शादी कर ली और जीवन भर के लिए एक दूसरे के साथी बन गए।
कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब अलका अस्तित्व सोनी बन गई। पुरुष पहचान अपनाने के लिए अलका ने ये कदम उठाया, और फिर अपनी अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए पारिवारिक अदालत के दरवाजे पर दस्तक दी और यहां पूरे नियम कानून के साथ आस्था से शादी की। अच्छी बात ये है कि इस विवाह समारोह में दोनों पक्षों के परिवार के सदस्यों ने भाग लिया।

अलका ने जन्मदिन पर बदली पहचान
दरअसल, बात ये है कि अलका सोनी के रूप में जन्मे अस्तित्व को कुछ वर्षों के बाद एहसास हुआ कि वह एक महिला नहीं है, फिर उसने एक पुरुष के रूप में अपना जीवन जीना शुरू कर दिया। अपने 47वें जन्मदिन पर अस्तित्व ने हिम्मत जुटाई और लिंग परिवर्तन सर्जरी कराने का फैसला किया, साथ ही अपने नाम से भी नाता तोड़ दिया, और एक नए नाम का दामन थाम लिया।
अनोखे विवाह में क्या है सुप्रीम कोर्ट की भूमिका?
विशेष शादी इसलिए हुई क्योंकि अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि सीधे रिश्ते में रहने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्ति पहले से मौजूद कानूनों का पालन करते हुए शादी कर सकते हैं, जिसमें शादी के लिए व्यक्तिगत कानून भी शामिल हैं।परंपरा को निभाने के लिए नवविवाहित जोड़े ने 11 दिसंबर को पवित्र अग्नि के चारों ओर सात बार घूमकर आधिकारिक तौर पर अपनी शादी को समाज के सामने रखा, जिसे 'सात फेरे' के रूप में जाना जाता है।
हर बाधा का पूरी हिम्मत से किया सामना
शादी से पहले जोड़े ने सभी कानूनी और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी स्थिति बताते हुए इंदौर डिप्टी कलेक्टर कार्यालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया। जांच के बाद दोनों पक्षों को सूचित करने के साथ ही उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया।
आस्था के मुताबिक, सबसे पहले वह अस्तित्व से उसकी बहन के जरिए उसके घर पर मिली थी, जिससे उसकी दोस्ती थी। दोनों की बातचीत ने कब दोस्ती का रूप ले लिया उन्हें पता भी नहीं चला और ये दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, और फिर प्यार कुछ इस कदर परवान चढ़ा कि दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खा लीं। यह विवाह दोनों परिवारों की सहमति और समर्थन से संपन्न किया गया था।












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