12 सालों में पहली बार नीलगिरी की पहाड़ियों पर हुआ 'जादू', वायरल हो रहा ये खूबसूरत नजारा
Neelakurinji flowers Video: प्रकृति कितनी खूबसूरत है, ये कई बार हमें सोशल मीडिया के जरिये देखने को मिलता है। कई बार ऐसा कुछ नजर आता है, जिसपर एक बार को भरोसा कर पाना ही मुश्किल हो जाए। इसी खूबसूरती का जीता जागता उदाहरण है तमिलनाडु का नीलगिरी पर्वत, जिसपर ऐसे फूल खिलते हैं, जिन्हें जादुई भी कहा जाता है। इन फूलों को ये टैग क्यों मिला और आखिर इन फूलों की खासियत क्या है, चलिये जानते हैं...
इस बार फिर ये फूल खिले तो नीलगिरी की खूबसूरत पहाड़ियों का वीडियो वायरल होने लगा। क्लिप देखने के बाद आप भी अपने आप को मंत्रमुग्ध होने से नहीं रोक सकेंगे। नीलगिरी पर्वत पर खिले खूबसूरत बैंगनी रंग के नीलकुरिंजी फूलों को देखने के बाद शायद ही कोई अपनी नजर हटा पाए।

इन फूलों की सबसे बड़ी खासियत है 12 सालों के बाद इनका खिलना। जी हां! 12 सालों के लंबे अरसे के बाद ये खूबसूरत फूल नीलगिरी की पहाड़ियों को और भी ज्यादा सुंदर बना देते हैं। बताते चलें कि ये फूल आदिवासी गांव पिक्कपथी मांडू से सटी उटागई पहाड़ियों के पास खिले हुए नजर आ रहे हैं।
सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी नीलकुरिंजी के फूल उगाए जाते हैं मगर राज्य में ये फूल बेहद लंबे समय से और थोड़े बहुतायत में नजर आते हैं। जब भी ये खूबसूरत फूल खिलते हैं तो साधारण सी दिखने वाली पहाड़ियां भी खूबसूरत दिखने लगती हैं।
ये नीलकुरिंजी फूल ही हैं, जिनके चलते नीलगिरी पहाड़ी को ये नाम मिला है। इस पर्वत को नीला पर्वत भी कहा जाता है। इस खूबसूरती का दीदार करने वाले पर्यटकों से अकसर आग्रह किया जाता है कि वे अपने साथ प्लास्टिक वगैरह ना लेकर जाएं। इसके साथ ही खास बात है कि इन फूलों को सुबह 4:30 बजे तक ही देखा जाता है।
पौधों और फूलों को कोई नुकसान ना हो इसलिये जगह-जगह चेतवानी वाले बोर्ड भी लगाए गए हैं। अगर कोई भी इन फूलों को तोडने या फिर इन्हें किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो जुर्माने का भी प्रावधान है। भारत में नीलकुरिंजी के फूल की 40 से भी ज्यादा किस्में पाई जाती हैं।
क्यों 12 सालों में एक बार खिलता है ये फूल?
बताते चलें कि नीलकुरिंजी फूल, एक दुर्लभ और अलग तरह की वनस्पति है, जिसका खिलने का एक अनोखा चक्र है। इसकी वजह से ही ये हर 12 साल में एक बार पश्चिमी घाट की पहाड़ियों को नीले रंग में रंग देता है। इस अनोखे समय ने वनस्पति विज्ञानियों और प्रकृति प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित किया है। लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है? ये पारिस्थितिक, जैविक और पर्यावरणीय कारकों का एक संयोजन है जो इस नेचुरल घटना को नियंत्रित करता है।
नीलकुरिंजी के जीवनचक्र का मूल आधार पश्चिमी घाट की खास जलवायु परिस्थितियों के प्रति इसका अनुकूलन है। ये क्षेत्र पौधे की वृद्धि और फूलने के लिए जरूरी तापमान, आर्द्रता और मिट्टी की उर्वरता का सही संतुलन प्रदान करता है। फूल का लंबा चक्र भी एक रणनीतिक अस्तित्व तंत्र है। कम बार खिलने से, नीलकुरिंजी अन्य पौधों के साथ परागणकों के लिए प्रतिस्पर्धा को कम करता है और ये सुनिश्चित करता है कि जब यह खिलता है, तो यह प्रचुर मात्रा में खिलता है।
नीलकुरिंजी का खिलना न केवल आंखों के लिए एक चमत्कार है, बल्कि इसका एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक प्रभाव भी है। ये कई प्रकार के परागणकों को आकर्षित करता है, जो पश्चिमी घाट की जैव विविधता में योगदान देता है।












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