प्रेमी ने दी लॉ की पढ़ाई की फीस, फिर युवती ने ‘बुढ्ढा’ बोल कर लिया ब्रेकअप, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
अदालत में युवती ने तर्क दिया कि उसमें मां-पिता ने उम्र में उससे कहीं अधिक बड़े व्यक्ति संग शादी करने को मना किया था इसलिए उसने ये रिश्ता तोड़ डाला।

Image: Oneindia
युगांडा में एक युवती को सगाई तोड़ना महंगा पड़ गया। अपने पूर्व मंगेतर को 'धोखा' देने के जुर्म में अदालत ने उसपर भारी जुर्मना लगाया गया है। कोर्ट ने युवती को आदेश दिया है कि अपने पूर्व मंगेतर को 2,800 डॉलर का भुगतान करे। कानुंगु मैजिस्ट्रेट चार्ल्स मुकोबी ने युवती से कहा कि आपके ब्रेकअप करने से युवक को असुविधा और मनोवैज्ञानिक पीड़ा पैदा हुई है।
प्रेमी ने उठाया था लॉ का खर्च
अदालत के रिकॉर्ड से पता चलता है कि रिचर्ड तुम्विन और लकी क्यारीकुंडा, दोनों पेशे से शिक्षक हैं। दोनों का 2015 में प्रेम संबंध शुरू हुआ था। इस दौरान दोनों ने 2018 में शादी करने का फैसला किया था। इस दौरान रिटायर्ड शिक्षक ने अपनी मंगेतर की पढ़ाई में खूब मदद की थी और लॉ डिप्लोमा के लिए पैसों का भुगतान किया था। लेकिन कुछ समय के बाद वह अचानक से शादी के खिलाफ हो गई और उसने अपने मंगेतर संग चार साल पुराना संबंध तोड़ लिया।
उम्र अधिक होने की वजह से ब्रेकअप!
अदालत में युवती ने तर्क दिया कि उसमें मां-पिता ने उम्र में उससे कहीं अधिक बड़े व्यक्ति संग शादी करने को मना किया था इसलिए उसने ये रिश्ता तोड़ डाला। इसके बाद फैसला सुनाते हुए, अदालत ने कहा कि प्रतिवादी के लिए यह तर्क देना अनुचित, गलत बयानी और एक धोखाधड़ी थी। मजिस्ट्रेट ने कहा कि, युवती के पास वादी के प्रेम अनुरोधों को जल्द से जल्द अस्वीकार करने और उसके वित्तीय दायित्वों में हस्तक्षेप करने से बचने का पूरा मौका था।
अदालत ने लगाया जुर्माना
जज ने कहा "चूंकि शादी करने का वादा प्रतिवादी की ओर से वादी की हानि के लिए पूरा नहीं किया गया था, इसलिए वादी हर्जाने का हकदार है।" इस दौरान अदालत ने युवती को 2,800 डॉलर जुर्माना देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि क्यारीकुंडा ने न तो बचाव पेश किया और न ही कार्यवाही में भाग लिया। ऐसे में वह इस मामले को लेकर कितनी गंभीर हैं, इसका भी पता चलता है।
महिला कार्यकर्ताओं ने की आलोचना
हालांकि, रिपोर्टों में कहा गया है कि यह निश्चित नहीं था कि युवती फैसले के खिलाफ अपील करेगी क्योंकि फैसला त्रुटिपूर्ण था क्योंकि शादी के विपरीत सगाई कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होनी चाहिए। युगांडा की प्रमुख महिला अधिकार कार्यकर्ता मिरिया माटेम्बे ने अदालत के इस एकतरफा फैसले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह एक 'क्लासिक' मामला है कि कैसे न्यायिक प्रणाली पुरुषों के पक्ष में झुकी हुई है।












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