'किलर व्हेल' की नई प्रजाति का पता चला, अपने साथ की व्हेल का ही कर रही शिकार
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर: पृथ्वी के 70 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर पानी है, जिसमें लाखों जलीय जीव रहते हैं। इसमें सबसे विशाल व्हेल ही होती है, लेकिन अब किलर व्हेल की एक नई प्रजाति का पता वैज्ञानिकों को चला है। जिसको 'आउटर कोस्ट ट्रैन्शन्ट व्हेल' नाम दिया गया। ये व्हेल अपनी ही प्रजाति के कुछ जीवों का शिकार कर उन्हें खा जाती है।

व्हेल की अपनी विशेष भाषा!
कनाडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक व्हेल मछली समुद्री तटों के करीब बहुत ही कम आती हैं। आमतौर पर ये प्रशांत महासागर के गहरे पानी में रहना पसंद करती हैं। बहुत से शोधों में पता चला कि आपस में तालमेल बैठाने के लिए एक विशेष भाषा का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा माना जाता है कि किलर व्हेल जो दक्षिणी पूर्वी अलास्का से दक्षिणी कैलिफोर्नियां तक पाई जाती हैं, वे एक ही प्रजाति की हैं, लेकिन अब इस थ्योरी पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
Recommended Video

हर जगह पर किलर व्हेल
मामले में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के एक छात्र जोश मैकइन्नेस ने बताया कि ये थ्योरी थी कि किलर व्हेल कुछ चुनिंदा जगहों पर पाई जाती है, लेकिन ये गलत है। ये दुनिया के हर जगह पाई जाती है। कई बार इसे समुद्री तटों के आसपास शिकार करते देखा गया है, लेकिन ज्यादातर वक्त ये गहरे पानी में रहती हैं। हालांकि अभी तक इसकी मौजूदगी के बारे में ज्यादा पता नहीं चल पाया है।

1 लाख फोटो का अध्ययन
मैकइन्नेस के मुताबिक जब भी आप जहाज पर सवार होकर पानी की तरह देखते हैं, तो आपको सन्नाटा दिखाई देता होगा, लेकिन जैसे ही आप पानी के अंदर जाएंगे वैसे ही वहां पर हजारों रहस्य देखने को मिल जाएंगे। पानी की गहराइयों में एक अलग ही तरह की रहस्यमयी दुनिया मौजूद है। व्हेल से संबंधित निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उन्होंने 1 लाख फोटोग्राफ का अध्ययन किया, जो अमेरिका और कनाडा के तट पर खीचीं गई थीं। इसमें कई बार नई किलर व्हेल को ओरेगांव से लेकर मध्य कैलिफोर्निया के बीच समुद्र में देखा गया।












Click it and Unblock the Notifications