Pics: 47 साल पहले कैसे दिखते थे भारतीय सिक्के? लुप्त हुई मुद्रा की तस्वीर देख इमोशनल हुए यूजर
भारत की प्राचीन मुद्राएं इतिहास बन गईं हैं। ऐसे में ये नई पीढ़ी के लिए अनदेखी तस्वीरें हैं। भारतीय मुद्रा (पैसे) कुछ दुर्लभ तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं।

आजादी के बाद भारत में अब तक हाई करेंसी के नोटों को लेकर केवल दो ही बार विमुद्रीकरण (Demonetization) किया गया लेकिन बाजार कि स्थिति को देखते हुए कम मूल्य के कई सिक्के चलन से बाहर किए गए। इसके साथ ही ये भारत में इतिहास बनकर रह गए। 21वीं सदी में भारत की मु्द्रा की तुलना अगर 20वीं सदी के मध्य या उससे पूर्व के भारतीय सिक्कों (Indian coin) से की जाए तो एक बड़ा बदलाव नजर आएगा। इसी को एक ब्यूक्रेट्स ने दिखाने की कोशिश की है।

1968 के बाद बदले सिक्के
आईएएस अधिकारी अवनीश शरण ने वर्ष 1968 के बाद से चलन में रहे छह अलग-अलग भारतीय सिक्कों की तस्वीरें ट्वीटर पर साझा की हैं। पुराने सिक्कों की ये तस्वीरें वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में दो पैसे, तीन, पांच, दस, पच्चीस और पचास पैसे की तस्वीरें देखी जा सकती हैं।

IAS की पोस्ट पर इमोशनल कमेंट
आईएएस ने अपनी पोस्ट के साथ यूजर्स से एक सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि इनमें से किस सिक्के से आपने कुछ खरीदा है ? पोस्ट पर कंमेंट में एक यूजर ने इमोशनल बात लिख दी। सख्स ने लिखा, "मैंने अपनी हर जरूरतों के लिए इनके साथ 51 साल बिताए"। जबकि एक दूसरे यूजर ने लिखा, "कुछ तो अलग बात थी ये मेरे !! मुट्ठी में हो तो सब मुमकिन लगता था"। एक यूजर ने लिखा, "इन्होंने तो मरे पूरे डाइजेशन सिस्टम का भ्रमण किया है"।

2016 में विमुद्रीकरण
भारत सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 मूल्य के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। इस दिन रात 12 बजे के बाद ये दोनों नोटों को चलन से हटा दिया गया था। इसके बाद सरकार ने 500 और 2000 मूल्य के नए नोट चलन ने आए। इस नोटबंदी का देश में भारी विरोध भी हुआ। लेकिन ये पहला मौका नहीं था जब भारत में विमुद्रीकरण किया गया हो।

आजादी के बाद 1978 में पहली नोटबंदी
इससे पहले भी आजादी के बाद एक बार नोटबंदी की गई थी। ये विमुद्रीकरण 1978 में हुआ था। तत्कालीन जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने ये फैसला लिया था, जिसके तहत 16 जनवरी 1978 को 1000 रुपये, 5000 रुपये और 10000 हजार रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की गई थी। इससे पहले ब्रिटिश का में भी भारत में विमुद्रीकरण किया गया। जिसके तहत 12 जनवरी 1946 को 500 रुपये, 1000 रुपये और 10000 रुपये के हाई करेंसी के नोट प्रचलन से बाहर किए गए थे।
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