भारत की पहली ट्रांसजेंडर निताषा की कहानी, लगा कि आदमी के शरीर में औरत की आत्मा कैद है और फिर...
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नई दिल्ली। कोलकाता की रहने वाली निताषा बिस्वास जब 3 साल की थी तभी उसे पता चल गया था कि उसके साथ सबकुछ ठीक नहीं है। उसे लग गया था कि उसका शरीर तो लड़कों का है, लेकिन अंदर से वो एक लड़की है। उसे समझने में देर नहीं लगी कि वो उसके शरीर में औरत की आत्मा कैद है और फिर उसने उस आत्मा को आजाद कराने की कोशिश शुरू की और तमाम बाधाओं के बाद वो देश की पहली ट्रांसजेंडर क्वीन यानी की मिस ट्रांसजेंडर बन गई। निताषा को देखकर कोई नहीं कह सकता है कि वो एक ट्रांसजेंडर है।

3 साल की उम्र में लगा कि अंदर कुछ औरत जैसा है
निताषा के मुताबिक जब वो 3 साल की थी तभी उसे पता चल गया था कि वो भले ही शरीर से लड़का हो लेकिन आत्मा से वो एक औरत है। उसके शरीर में औरतों जैसा स्वभाव और कोमला है। जब आस परोड़ के लड़के क्रिकेट खेल रहे होते तो निताषा टीवी देख रही होती। 10वीं तक आते-आते वो बैचेन होने लगी। उसके भीतर की औरत बाहर निकलने को बेताब होने लगी। निताषा ने सबसे पहले अपने भाई को इस बारे में बताया, लेकिन भाई ने उसे समझाने की कोशिश की कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। ये सब कुछ दिनों की बात है, लेकिन उसका मन नहीं माना और वो परिवार के खिलाफ जाकर सेक्स चेंज करवाना चाहती थी।

पिता चाहते थे लड़की से करूं शादी, लेकिन मुझे चाहिए था लड़का
बंगाली परिवार में पली-बढ़ी निताषा के पिता उसके लिए बंगाली लड़की ढूढ़ रहे थे। उन्होंने निताषा को इस बारे में जब बताया कि उसने साफ-साफ मना करते हुए कहा कि वो एक बंगाली लड़के से शादी करेगी। इसके बाद उसने परिवार की मर्जी के बिना कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट हो गई और वहां जाकर हार्मोन्स रिप्लेसमेंट थेरेपी लेना शुरू कर दिया।

मर्द से औरत बनने में लगे 4 साल
निताषा ने बताया कि कि इस सेक्स चेंज की प्रक्रिया में उसे तीन से चार साल लगे।वो लगातार अपने भाई के संपर्क में रही और इस पूरे प्रक्रिया के दौरान मनोवैज्ञानिकों के सलाह लेती रही, क्योंकि लिंग परिवर्तन करवाना इतना आसान नहीं होता। मानसिक रूप से तैयार होने के लिए वो उसने सलाह लेती रही है 4 सालों की मेहनत के बाद अब वो भारत की पहली ट्रांसजेंडर बन गई है

अगले सात करेगी भारत का प्रतिनिधित्व
निताषा अगले साल मार्च में थाईलैंड में होने वाला इंटरनेशनल ट्रांसडेंडर प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। निताषा का मानना है समाज के भेदभाव के चलते 70% प्रतिशत ट्रांसजेंडर्स डिप्रेशन का शिकार हैं। उनके लिए न तो कोई नौकरी है और न ही कोई व्यवस्था, जिसकी वजह से अधिकांश ट्रांसजेंडर सेक्स वर्कर बन जाते है। निताषा बॉलीवुड में अपना करियर बनाना चाहती है।












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