दुल्हन बनकर धूम-धाम से होती है किन्नरों की शादी, लेकिन अगले ही दिन हो जाते हैं विधवा
Kinnar weird marriage: छत्तीसगढ़ में चर्चा में रही किन्नरों की शादी के बाद लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे। कई लोगों का मानना है कि किन्नर जिंदगी भर अविवाहित रहते हैं तो कई लोग मानते हैं कि वे शादी करते हैं।

Kinnar Marriage: छत्तीसगढ़ से उस वक्त एक अजीबोगरीब मामला आया, जब पांच किन्नरों ने एक साथ शादी रचाई। इस खबर के सामने आने के बाद किन्नरों की शादी को लेकर लोग तरह-तरह के सवाल करने लगे।
चर्चा में पांच किन्नरों का ब्याह
पांच किन्नरों की शादी के बाद कई लोग हैरान रह गए कि क्या वाकई किन्नर ब्याह रचाते हैं। किन्नरों की शादी के बारे में समाज में लोगों को कम ही जानकारी होती है। इसका कारण उनका समाज से अलग-थलग रहना है।
क्या शादी करते हैं किन्नर?
क्या किन्नर शादी करते हैं? अगर करते हैं तो किससे करते हैं? क्या उनके रस्मो रिवाज भी आम लोगों की तरह होते हैं? पांच किन्नरों की शादी की खबर के बाद किन्नरों से जुड़े ऐसे ही न जाने कितने सवाल आपके भी दिमाग में घूम रहे होंगे। चलिये इन सवालों के जवाब जानते हैं।
किससे शादी करते हैं किन्नर?
हिजड़े या किन्नर ना तो पूरी तरह से पुरुष होते हैं और ना ही पूरी तरह से महिला। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि किन्नर शादी नहीं करते और हमेशा अविवाहित ही रहते हैं। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा नहीं है। किन्नरों की भी शादी होती है लेकिन ये आम लोगों की तरह बिल्कुल नहीं होती। दरअसल, किन्नरों की शादी किसी इंसान से नहीं बल्कि उनके भगवान से होती है।
इस भगवान को पूजता है पूरा समाज
अब आपके मन में सवाल उठेंगे कि आखिर किन्नरों के भगवान कौन हैं? तो बता दें कि भगवान अर्जुन और नाग कन्या उलूपी की संतान इरावन को किन्नर पूजते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान अर्जुन महाभारत के वक्त अज्ञातवास के दौरान किन्नर रूप में ही रह रहे थे। ऐसे में किन्नर समाज अर्जुन को पूजता है।
कहां होता है शादी समारोह?
किन्नरों की शादी का समारोह हर साल तमिलनाडु के कूवगाम में होता है। ये समारोह पूरे 18 दिनों तक चलता है। 17वें दिन इनकी शादी होती है, जब ये दुल्हन की तरह साजो श्रृंगार करते हैं। किन्नरों के पुरोहित उन्हें मंगलसूत्र भी पहनाते हैं। शादी के अगले दिन इरावन देवता की मूर्ति को पूरे शहर में घुमाकर तोड़ दिया जाता है। ऐसा करने के पीछे का कारण भी बड़ा दिलचस्प है।
दुल्हन की तरह सजते संवरते हैं किन्नर
दरअसल इरावन भगवान की मूर्ति को तोड़ने के पीछे का कारण ये है कि किसी को भी किन्नर के रूप में जन्म ना लेना पड़े। पहले पूरे शहर में भगवान की प्रतिमा को घुमाया जाता है। ये जश्न भी जोरों शोरों से होता है। इसके बाद किन्नर अपना पूरा श्रृंगार उतारकर एक विधवा स्त्री की तरह रोते हैं। और इस तरह माना जाता है कि शादी के अगले ही दिन बाद वे विधवा भी हो जाते हैं।












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