आगरा जेल में सौहार्द की मिसाल, मुस्लिम कैदी रखते हैं नवरात्रि व्रत, हिंदुओं ने रखा रोजा
सेंट्रल जेल आगरा में कैदी सांप्रदायिक सौहार्द का आनोखा संदेश दे रहे हैं। यहां कुछ कैदी ऐसे हैं जो मुस्लिम हैं लेकिन वे नवरात्रि व्रत रखते हैं, तो वहीं हिंदू कैदी रोजा भी रखते हैं।

अगरा जेल में कैदियों के बीच भाईचारा दुनिया के तमाम देशों में हिंदु और मुस्लिमो बीच विवादों को हवा देने वालों को करारा जवाब है। यहां साम्प्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल कायम की जाती है। दरअसल आगरा सेंट्रल जेल में कुछ मुस्लिम कैदियों ने नवरात्रि पर उपवास करने के लिए अपने हिंदू भाइयों में शामिल हो गए। वहीं रमजान के दौरान कुछ हिंदू कैदियों ने रमजान के दौरान रोजा भी रखा।
जेल में बाकायदा सभी को अपने धर्म को मानने की आजादी है। आगरा सेंट्रल जेल में रोजा रखने वाले कैदियों के लिए प्रशासन ने रोजा खोलने के लिए तारीखों का इंतजाम करते हैं। चैत्र नवरात्रि बुराई पर अच्छाई की जीत का नौ दिवसीय विशेष धार्मिक हिंदू पर्व है। ये इस साल 22 मार्च से शुरू हुआ, जबकि रमजान का महीना 23 मार्च से आरंभ हुआ।
इस दौरान आगरा सेंट्रल जेल में कैदियों से सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल कायम की। आगरा सेंट्रल जेल के प्रभारी उप महानिरीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने पीटीआई को बताया कि मुस्लिम कैदी नवरात्रि के लिए उपवास कर रहे हैं और परिसर में मंदिर में आयोजित होने वाले भजन में भी हिस्सा ले रहे हैं। जेल प्रभारी ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह एक अच्छा विचार है, जहां दोनों धर्मों के कैद सामाजित समरसता का संदेश दे रहे हैं। वहीं जेलर आलोक सिंह ने कहा कि जेल में 905 कैदी हैं। उनमें से 17 मुस्लिम कैदियों ने नवरात्रि पर उपवास रखा जबकि 37 हिंदुओं ने रोजा रखा।
आगरा जेल प्रशासन ने इसका वीडियो भी जारी किया। जिसमें एक कैदी नौशाद ने नवरात्रि के उपवास पर अपने विचार साझा किए। नौशाद ने कहा, "मैंने नवरात्रि के पहले दिन व्रत रखा था और आखिरी दिन भी रखूंगा। जेल में हम सभी एकता के साथ रहते हैं और सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं। हम मंदिर में आयोजित भजनों में भाग लेते हैं और हिंदू कैदियों के साथ गाते हैं।"
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