वैज्ञानिकों ने ईजाद किया इंसानों के पेशाब से बिजली बनाने का तरीका, टायलेट में लगानी होंगी ये खास ईंटें

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर: पहले इंसान सिर्फ कोयले से बिजली बनाते थे, लेकिन वक्त के साथ कोयले की कमी हुई और नए विकल्प के रूप में परमाणु ऊर्जा आई। इसके बाद तकनीकी ने विकास किया और घर-घर तक सौर ऊर्जा पहुंची। अब वैज्ञानिकों ने एक नया अविष्कार किया है, जिसके तहत घरों के टायलेट में पेशाब से ऊर्जा बनाई जा सकती है। इसे भविष्य का सस्ता और अच्छा विकल्प माना जा रहा है।

क्या है 'पी पावर' परियोजना?

क्या है 'पी पावर' परियोजना?

डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिस्टल में शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक नया स्वच्छ ऊर्जा ईंधन सेल विकसित किया है, जो मानव अपशिष्ट को बिजली में परिवर्तित कर सकता है। साथ ही एक पूरे घर की ऊर्जा के लिए ये काफी रहेगा। दो साल पहले ग्लास्टनबरी फेस्टिवल में पहली बार सार्वजनिक रूप से 'पी पावर' (पेशाब की शक्ति) परियोजना का परीक्षण किया गया था। वहां पर ये साबित हुआ कि इससे एक स्थिर बिजली पैदा की जा सकती है।

5 दिन में 300 वॉट बिजली

5 दिन में 300 वॉट बिजली

शुरुआत में तो इसका उपयोग मोबाइन फोन, लाइटबल्ब और रोबोटिक चीजों को चार्ज करने के लिए किया जाता था, लेकिन बाद में तकनीकी विकास हुआ और ये अब घरों को सप्लाई करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। मामले में ब्रिस्टल बायोएनेर्जी सेंटर के निदेशक डॉ. इयोनिस इरोपोलोस कहा कि त्योहारों में 5 दिनों में टायलेट आने वाले लोगों की पेशाब से 300 वॉट बिजली पैदा करने की क्षमता हमारे पास है।

रोगाणु से भरे होते हैं ब्लॉक

रोगाणु से भरे होते हैं ब्लॉक

डॉ. ने आगे कहा कि हम 300 वॉट बिजली का मतलब है कि मैं एक वॉट का बल्ब पूरे 300 घंटे तक जलाकर रख सकता हूं। अगल वो 10 वॉट का रहेगा, तो कम से कम 30 घंटे जलेगा। उन्होंने बताया कि ये आविष्कार 'माइक्रोबियल ईंधन कोशिकाओं' पर आधारित है। इसमें बैट्री जैसे ब्लॉक छोटे जीवों से भरे होते हैं, जिन्हें रोगाणु (Microbes) कहा जाता है।

रोबोट से आया आइडिया

रोबोट से आया आइडिया

बढ़ने (ग्रो) करने के लिए रोगाणु कार्बनिक पदार्थों पर फीड करते हैं, जो घास से लेकर कुछ भी हो सकता है। फिर रोगाणु पदार्थ को उसके रासायनिक भागों में तोड़ देते हैं और जैसे-जैसे वे गुणा करते हैं, बिजली की थोड़ी मात्रा उत्पन्न होती है। डॉ. ने कहा कि ये टेक्नोलॉजी तब बनी, जब टीम ने एक रोबोट बनाया, जो सड़े हुए आलूबुखारे और मृत मक्खियों से ऊर्जा ले रहा था। उस दौरान पता चला कि जैविक कचरा रोबोट को ऊर्जा दे सकता है। इसी आधार पर मानव अपशिष्ट से ऊर्जा तैयार करने का विचार आया।

टायलेट में लगेगी ईंट

टायलेट में लगेगी ईंट

मौजूदा वक्त में इस पर शोध चल रहा। अभी टीम ईंधन कोशिकाओं को कम करना चाहती है और उन्हें घरों की दीवारों में फिट करने के लिए पर्याप्त छोटी ईंटों में डालना चाहती है। जब भी कोई नया घर बनेगा, तो इन खास ईंटों को उसमें इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे में टायलेट में जब भी कोई पेशाब करने जाएगा, तो उससे स्वच्छ ऊर्जा बनाई जा सकती है।

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