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कोरोना वायरसः सबसे ज़्यादा जोख़िम कहाँ, घर, बाहर या दफ़्तर में

By BBC News हिन्दी

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क्या आपको जॉगिंग करने वालों या गाना गाने वालों से संक्रमित होने का डर हो सकता है?

बस की कतार में खड़े किसी शख़्स के छींकने से मुझे कितना ख़तरा हो सकता है? क्या मुझे रेस्टोरेंट जाना चाहिए? मुझे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं?

जिस तरह दुनिया लॉकडाउन से धीरे-धीरे बाहर आ रही है और आर्थिक गतिविधियाँ भी शुरू हो रही हैं, उससे कोरोना वायरस से संक्रमित होने और इसके फैलने का ख़तरा बढ़ गया है.

इससे संक्रमण की दूसरी लहर के पैदा होने का डर भी बढ़ गया है.

इम्युनोलॉजिस्ट और बायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर एरिन ब्रोमेज अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मेसाचुसेट्स में संक्रामक बीमारियों के बारे में पढ़ाते हैं. वे कोरोना महामारी पर भी गहराई से नज़र बनाए हुए हैं.

उन्होंने कोरोना वायरस के ख़तरों पर एक ब्लॉगपोस्ट लिखा है जिसे क़रीब 1.6 करोड़ बार पढ़ा जा चुका है.

सामान्य जिंदगी की ओर लौटने के दौरान आप ख़ुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं, इस बारे में उन्होंने सलाह दी है.

लोग कहाँ बीमार होते हैं? डॉ. ब्रोमेज कहते हैं कि ज़्यादातर लोग अपने घरों में परिवार के ही किसी सदस्य के ज़रिए संक्रमित होते हैं.

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कैसे रहेंगे सुरक्षित

लेकिन, घर के बाहर कैसे सुरक्षित रहें? क्या हम पार्क में अपनी रोज़ाना की वॉक के दौरान ख़तरे में होते हैं? क्या बिना फेस मास्क लगाए कोई जॉगिंग करने वाला शख़्स अनजाने में ही किसी को संक्रमित कर सकता है?

प्रोफेसर कहते हैं, शायद ऐसा नहीं होगा.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "जब आप बाहर निकलते हो, तो खुले वातावरण में ऐसी क्षमता होती है, जिससे साँस छोड़ते समय वायरस तेज़ी से कमज़ोर पड़ सकते हैं."

ये ऐसा इसलिए हैं क्योंकि किसी वायरस को आपको संक्रमित करने के लिए जितना वक़्त चाहिए, उतने वक़्त तक आप उसके संपर्क में खुले वातावरण में नहीं रहते, क्योंकि वायरस तेज़ी से निष्प्रभावी हो सकते हैं.

उन्होंने अपने ब्लॉगपोस्ट में लिखा है, "संक्रमित होने के लिए आपका वायरस की संक्रामक डोज के संपर्क में आना ज़रूरी है. मर्स और सार्स की संक्रामक डोज के अध्ययनों के आधार पर कुछ अनुमानों से पता चल रहा है कि संक्रमण को टिकने के लिए कम से कम 1,000 सार्स-कोव2 वायरल पार्टिकल्स की ज़रूरत होती है."

यह आँकड़ा बहस का विषय है और प्रयोगों के माध्यम से इसे पुख़्ता तौर पर प्रमाणित किया जाना ज़रूरी है, लेकिन यह एक अहम संदर्भ देता है जो कि यह बताता है कि यह संक्रमण किस तरह से हो सकता है.

इसका मतलब यह है कि अगर हम कम समय के लिए संक्रमित लोगों के संपर्क में आते हैं, मसलन, अगर कोई जॉगिंग करने वाला अनजाने में आपके नज़दीक से गुज़रता है तो इससे आपके अंदर संक्रमण पैदा होने लायक डोज आना मुश्किल है.

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ऐसे में किन हालातों में हमें ज्यादा चिंतित होने की जरूरत है?

जिन लोगों में लक्षण नजर आ रहे हैं. उनके खांसने और छींकने से निश्चित तौर पर बीमारी फैलती है, लेकिन इसकी दर अलग-अलग है.

एक बार की खांसी से क़रीब 80 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से क़रीब 3,000 बूंदें निकलती हैं.

डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक, ज़्यादातर बूंदें बड़ी और भारी होती हैं. इसका मतलब यह है कि ये जल्दी ही सतह पर गिर जाती हैं. लेकिन कुछ बूंदें हवा में बनी रहती हैं और कमरे में भी घुस सकती हैं.

अगर आप किसी ऐसी लिफ़्ट में फँस गए हैं जिसमें कोई शख़्स खांसने की बजाय छींकता है तो आपकी दिक्कत दस गुना बढ़ जाएगी.

एक छींक से क़रीब 30,000 बूंदें निकलती हैं. इनमें छोटी बूंदें काफ़ी दूर तक चली जाती हैं. इनकी स्पीड 320 किमी प्रति घंटे तक होती है.

उन्होंने लिखा है, "अगर कोई शख़्स संक्रमित है तो उसकी एक खांसी या छींक में 20 करोड़ वायरस पार्टिकल्स तक हो सकते हैं."

ऐसे में अगर आप किसी व्यक्ति से आमने-सामने बैठकर बात कर रहे हैं और अगर वह व्यक्ति छींक या खांस देता है तो आपमें 1,000 वायरल पार्टिकल आराम से आ जाएंगे और आप संक्रमित हो जाएंगे.

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बिना लक्षण वाले स्प्रेडर

हमें पता है कि लोगों में लक्षण नज़र आने से क़रीब पांच दिन पहले से वे संक्रमित हो सकते हैं. कुछ में तो हो सकता है कि कभी भी ये लक्षण नज़र ही नहीं आएं.

यहां तक कि साँस से भी वायरस की कॉपी हवा में आ जाती हैं. लेकिन कितनी?

डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक़, "एक साँस से 50 से 5,000 बूंदें निकलती हैं. इनमें से ज़्यादातर बूंदों की रफ़्तार कम होती है और ये जल्दी ही सतह पर गिर जाती हैं."

जब हम अपनी नाक से साँस लेते हैं तो और भी कम बूंदें रिलीज होती हैं.

अहम बात यह है कि सांसें ताक़त के साथ बाहर नहीं निकलती है, ऐसे में निचले श्वसन तंत्र से वायरल पार्टिकल बाहर नहीं निकलते हैं.

यह चीज़ अहम है क्योंकि श्वसन तंत्र के इस हिस्से में पाए जाने वाले टिश्यूज में ही कोरोना वायरस ज़्यादा पाया जाता है.

हमें नहीं पता कि साँस के साथ सार्स-कोव2 के कितने वायरल पार्टिकल्स बाहर निकलते हैं, लेकिन डॉ. ब्रोमेज एक स्टडी के बारे में बताते हैं जिसमें कहा गया है कि इंफ्लूएंजा से संक्रमित कोई शख्स एक मिनट की साँस में 3 से 20 वायरस आरएनए कॉपीज रिलीज करता है.

डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक, बोलने से रेस्पिरेटरी बूंदों का निकलना 10 गुना बढ़कर क़रीब 200 कॉपीज वायरस प्रति मिनट पर पहुंच जाता है.

गाने और चिल्लाने दोनों से हवा में बूंदों की मात्रा काफ़ी बढ़ जाती है. ये बूंदें ऐसे इलाक़ों से भी आती हैं जहां टिश्यूज के संक्रमित होने के आसार अधिक होते हैं.

वह कहते हैं, "ऐसे में जिस भी वजह से ताक़त के साथ बूंदें बाहर निकलती हैं तो इनमें वायरस वाले टिश्यूज से ज़्यादा बूंदें आ जाती हैं."

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किस तरह का माहौल खासतौर पर जोखिम भरा होता है?

निश्चित तौर पर ऐसे प्रोफ़ेशन जिनमें लोगों को सीधे तौर पर संक्रमितों के साथ काम करना पड़ता है उनके संक्रमित होने के अधिक आसार होते हैं.

ब्रोमेज कहते हैं कि ओपन प्लान ऑफिस में होने वाले इवेंट्स, स्पोर्ट्स और सोशल इवेंट्स जोख़िम भरे होते हैं. इन मौक़ों पर लोग वायरस से संपर्क में आने के ख़तरे में होते हैं.

वह कहते हैं, "यहां तक कि कॉल सेंटर जैसी जगहों पर अगर लोग 50 फ़ीट की दूरी पर भी हों तो वायरस की एक कम डोज भी अगर लंबे वक्त तक बनी रहे तो यह संक्रमित करने के लिए पर्याप्त होती है."

जैसे-जैसे हम काम पर वापस लौट रहे हैं कुछ प्रोफेशंस के लिए यह ख़ास तौर पर चिंता की बात है.

ऐसे ओपन प्लान ऑफिस जिनमें हवा के आने-जाने की अच्छी व्यवस्था न हो, वे बड़ी दिक्कत की वजह बन सकते हैं.

डेंटिस्ट्स के साथ भी ऐसा ही है. डेंटिस्ट्स के यहां एक साथ अधिक लोग नहीं होते हैं, लेकिन ये ज़्यादा जोख़िम में होते हैं.

वह कहते हैं कि शिक्षण के काम से जुड़े लोग भी ज़्यादा जोखिम में हैं.

उनके मुताबिक़, "उम्रदराज़ शिक्षकों और प्रोफेसरों के साथ युवा लोग एक ही कमरे में बड़ी तादाद में होते हैं. इस चीज़ पर काफ़ी विचार किया जाना चाहिए कि इन जगहों को कैसे सुरक्षित बनाया जा सकता है."

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डोर और आउटडोर

डॉ. ब्रोमेज कहते हैं कि खुले वातावरण में संक्रमण के काफ़ी कम मामले देखे गए हैं.

हवा और जगह वायरल लोड को घटा देते हैं. साथ ही धूप, गर्मी और आर्द्रता भी वायरस को ज़्यादा देर जिंदा नहीं रहने देते हैं.

सामाजिक दूरी और आपसी मेलजोल की अवधि में कमी से भी जोख़िम कम होता है.

लेकिन, कुछ खुली जगहों पर मेलजोल काफ़ी जोख़िम भरे हो सकते हैं.

लोगों के बात करने, गाने, या चिल्लाने या फिर लोगों से भरे हुए इवेंट्स में अधिक ख़तरा होता है. साथ ही बंद जगहों पर सामाजिक दूरी के उपाय भी समय के साथ कमज़ोर पड़ जाते हैं.

लेकिन, कुछ इंडोर संपर्क काफी जोखिम भरे हो सकते हैं.

लोगों के बात करने, गाने, या चिल्लाने जैसे लोगों से भरे हुए इवेंट्स में हाई रिस्क होता है. साथ ही इंडोर जगहों पर सामाजिक दूरी के उपाय भी वक्त के साथ कमजोर पड़ जाते हैं.

सीमित हवा की आवाजाही और रीसाइकिल्ड एयर भी खासतौर पर दिक्कत पैदा करती है.

लेकिन, शॉपिंग कम जोखिम भरी होती है. खासतौर पर जब आप एक सिंगल माहौल में अपेक्षाकृत कम वक्त गुजारते हैं.

हवा की सीमित आवाजाही और रिसाइकिल्ड हवा ख़ासतौर पर दिक्कत भरी हो सकती है.

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जोखिम का आकलन

डॉ. ब्रोमेज कहते हैं कि कोरोना की पाबंदियों के हटने के बीच हमें जोख़िम के लिहाज से अपनी गतिविधियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए.

बंद जगहों में उस जगह हवा की आवाजाही पर विचार कीजिए. यह सोचिए कि वहां कितने लोग एक वक्त पर मौजूद होंगे और आप वहां कितना वक्त गुजारने वाले हैं.

वह कहते हैं, "अगर आप एक अच्छी हवादार जगह पर कम लोगों के साथ बैठे हैं तो आपके लिए जोखिम कम है. अगर आप किसी ओपन फ्लोर प्लान ऑफिस में हैं तो आपको गंभीरता के साथ जोखिम (जगह के वॉल्यूम, लोग और हवा की आवाजाही की स्थिति) पर गौर करना चाहिए. अगर आप एक ऐसी नौकरी में हैं जहां आपको लोगों से आमने-सामने बात करनी पड़ती है या और बुरी स्थिति में आपको चिल्लाना पड़ता है तो आपको अपने जोखिम का फिर से आकलन करने की ज़रूरत है."

मिसाल के तौर पर, शॉपिंग मॉल में अगर आप कम भीड़ वाले स्टोर में और अच्छी हवादार जगह पर कम वक्त गुजारते हैं तो आपके संक्रमित होने के आसार कम हैं.

खुली जगहों पर संक्रमण का जोखिम कम होता है क्योंकि संक्रामक बूंदें जल्दी ही खत्म हो जाती हैं.

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English summary
Coronavirus: Where the most risk is, at home, outside or office
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