Chandrayaan-3 पर ब्रिटेन के जर्नलिस्ट को मिर्ची, पाकिस्तान के शख्स ने की खिंचाई, बोला- पहले इन्हें भेजो बरनोल
चंद्रयान-3 की सफल लॉन्चिंग के बाद भारत का नाम उन तीन देशों की सूची में जुड़ चुका है, जिनके पास पहले से ये उपलब्धि है। ऐसे में ब्रिटेन का एक जर्नलिस्ट भारत के स्पेस मिशन को लेकर दिए अपने बयान के बाद ट्रोल हो रहा है।
ब्रिटेन के टीवी चैनल में जर्नलिस्ट पैट्रिक क्रिस्टीज अपनी एक न्यूज को लेकर ट्रोल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को अंतरिक्ष मिशन का संचालन करेने वाले देशों को आर्थिक मदद देना बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा पैट्रिक ने कहा कि भारत को ब्रिटेन की 2.3 बिलियन पाउंड सहायता राशि वापस कर देनी चाहिए। ऐसे में पाकिस्तान के एक शख्स ने पैट्रिक को जमकर ट्रोल किया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, 'इन्हें बरनोल भेजो'।
ब्रिटिश पत्रकार की चंद्रयान-3 को लेकर इस टिप्पणी के बाद भारत में भी आक्रोश है। वहीं पाकिस्तान सख्स इस पर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की है। पैट्रिक का मजाक उड़ाते हुए, मोहसिन ने कहा कि ब्रिटेन के पत्रकार को चिढ़ इस बात से है के भारत ने केवल 77 वर्षों में विशेषकर अंतरिक्ष शोध के क्षेत्र में काफी तरक्की की। मोहसिन ने आगे कहा कि ये बात पैट्रिक के लिए पचा पाना मुश्किल है।

वीडियो में अली को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "गोरे बहुत परेशान हैं। हम एक दूसरे को सेलिब्रेट भी करना जानते हैं। इन्हे बरनोल भेजें, इन्हे फूल भेजें।"
‘India, give us back our £2.3 BILLION!’@PatrickChristys congratulates India on their successful moon mission, but says ‘as a rule, if you can afford to fire a rocket at the dark side of the moon, you shouldn’t be coming to us with your hand out for foreign aid!’ pic.twitter.com/fNMLY5RCok
— GB News (@GBNEWS) August 23, 2023
दरअसल, ब्रिटेन के टीवी चैनल क पत्रकार पैट्रिक क्रिस्टीज ने एक कार्यक्रम में भारत को गरीबी से जूझने वाला देश बताया था। उन्होंने कहा कहा था, "नियमतः हमें अंतरिक्ष कार्यक्रम वाले देशों को पैसा नहीं देना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि भारत को 2.3 बिलियन पाउंड की सहायता राशि वापस करनी चाहिए, जो कि उन्हें 2016 और 2021 के बीच भेजी गई थी।"
जबकि 2015 के बाद भारत को ब्रिटेन ने कोई सहायता राशि नहीं भेजी है। मार्च, 2023 में द गार्जियन में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, भारत को ब्रिटेन से सहायता 2015 में बंद की जा चुका है। जबकि सहायता के लिए स्वतंत्र आयोग की समीक्षा में कहा गया कि लगभग 2.3 बिलियन 2016 से 2021 के बीच यूके से पाउंड (23,000 करोड़ रुपए) की मदद भारत को मिली। जिसमें सरकार द्वारा संचालित ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट द्वारा मुख्य रूप से छोटी कंपनियों को कर्ज का प्रावधान शामिल किया गया था।












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