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ब्लैक लाइव्स मैटरः रंगभेद पर अपने बच्चों को क्या बता रहे हैं काले मां-बाप?

मर्विन का एक चार साल का बेटा और दो साल की बेटी है
@SarpongPhotography
मर्विन का एक चार साल का बेटा और दो साल की बेटी है

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद से पूरे यूके में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के लिए समर्थन में बढ़ोतरी हुई है. लेकिन, इस मसले पर फ़ोकस बढ़ने के साथ ही कई माता-पिता अब यह सोचने को मजबूर हो गए हैं कि वे नस्लवाद के बारे में अपने बच्चों को किस तरह से बता और समझा सकते हैं.

डेनिस अडीडे की पांच साल की बेटी ने जब ब्लैक लाइव्स मैटर का बैनर देखा तो उसने पूछा, "उन्हें ऐसा क्यों लिखना पड़ा है?"

काले बच्चों की मासूमियत खोने का डर

डेनिस बताते हैं, "एक काले बच्चे के लिए यही हक़ीक़त है. एक काले पिता के तौर पर यही मेरी भी हक़ीक़त है. आपका बचपन दूसरे बच्चों की तरह से मासूमियत से भरा नहीं होता है."

वो कहते हैं, "मैं ऐसे बच्चों को भी जानता हूं जो कि अपने जीवन में पहली बार कालों के इतिहास को जान रहे हैं."

वो कहते हैं कि हालांकि, उनके तीनों बच्चे जॉर्ज फ्लॉयड के बारे में चर्चा करने के लिए अभी बहुत छोटे हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि कई अन्य काले बच्चों पर इस घटना का बुरा असर पड़ा है. डेनिस के तीनों बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं.

डेनिस अडीडे अपने तीन बच्चों के साथ
Denis Adide
डेनिस अडीडे अपने तीन बच्चों के साथ

वो अपने दोस्त की बेटी का हवाला देते हैं जो कि रो रही थी और यह सोच रही थी कि अपनी त्वचा के रंग की वजह से क्या वो सुरक्षित नहीं है. उसे अपनी ज़िंदगी की फ़िक्र सता रही थी.

बच्चों को आदत डालनी होगी

डेनिस पश्चिमी लंदन में रहते हैं. वो कहते हैं कि अपने बच्चों को काली त्वचा के साथ यूके में रहने की आदत डालना सिखाना बतौर पिता उनके काम का हिस्सा है.

वो कहते हैं कि बच्चे और वयस्क दोनों रूप में उन्हें कई दफ़ा पुलिस ने रोका है और तलाशी ली है. वो कहते हैं कि उन्हें दुखी मन से अपने चार साल के बेटे को भी इसी तरह के बर्ताव की आदत डालने के लिए तैयार करना पड़ रहा है.

उन्हें लगता है कि उन्हें अपनी बेटियों के साथ अलग तरह की चर्चा करनी पड़ेगी क्योंकि समाज में उनका कम प्रतिनिधित्व है.

वो बताते हैं कि उनकी बड़ी बेटी एक दिन काफ़ी ख़ुश थी. उस दिन उसकी जिमनास्ट टीचर ने उसे सिखाया था. उनकी बेटी ने उन्हें ख़ुश होकर बताया, "आज की टीचर के बाल बिल्कुल मेरी तरह थे और उनकी त्वचा भी मेरे जैसी थी."

जॉर्जीना क्लार्क
Georgena Clarke
जॉर्जीना क्लार्क

सात साल की बेटी ने उठाया मसला

चेशायर की जॉर्जीना क्लार्क कहती हैं कि उन्हें भी अपने सात साल के जुड़वां बच्चों के साथ इसी तरह की चर्चा करनी पड़ती है. इनमें से एक लड़का है और एक लड़की है.

त्वचा के रंग का मसला पहली बार उनकी बेटी ने उठाया था. उसने कहा कि उनके इलाक़े में विविधता के अभाव की वजह से उनकी बेटी सड़क से गुज़रने वाले हर काले शख़्स का अभिवादन करने लगी थी.

वो बताती हैं कि ऐसा इस वजह से था क्योंकि उसे कभी-कभार ही कोई काला शख़्स दिखाई देता था. ऐसे में उनकी बेटी को लगता था कि हर काला शख़्स उनसे जुड़ा हुआ है.

अलग होने की वजह से स्कूल जाने से इनकार

वो अपनी क्लास में इकलौती काली बच्ची थी. जब वो पांच साल की थी तब एक दिन उसने यह कहते हुए स्कूल जाने से इनकार कर दिया कि मैं ऐसा अकेला बच्चा नहीं होना चाहती जो कि सबसे अलग हो.

जॉर्जीना बताती हैं, "मैं पूरी तरह से हिल गई थी. मैं समझ नहीं पा रही थी कि उस वक़्त उसे क्या कहा जाए. तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने मेरी बेटी की अच्छी परवरिश नहीं की है."

वो बताती हैं, "पहले मैं कहती थी कि ऐसा इस वजह से है क्योंकि आप ख़ास हो, आप ऐसी अकेली बच्ची हो जो कि काली है. लेकिन, उसके लिए ये चीज़ें अब काम नहीं आ रही थीं."

जॉर्जीना ने अपनी बेटी को समझाया कि उनकी मां के मां-बाप अफ्ऱीकी मूल के थे और उसके पिता के पेरेंट्स वेस्टइंडीज़ से थे और इन देशों के सभी लोग ऐसे ही दिखते हैं.

जॉर्जीना कहती हैं कि वो मानती हैं कि उनकी मासूमियत को एक वक़्त पर इस चीज़ का सामना करना ही पड़ेगा, लेकिन वो चाहती हैं कि जब तक मुमकिन हो वे बच्चे बने रहें.

ब्लैक लाइव्स मैटर रैली
PA Media
ब्लैक लाइव्स मैटर रैली

काले होने पर गर्व करें

वो कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि वे इस सच्चाई से वाकिफ़ हों और इस पर गर्व करें कि वे काले हैं. साथ ही वे यह भी मानें कि उनके इस अंतर को ग़लत तरीक़े से नहीं देखा जाएगा."

वो कहती हैं, "मैं उन्हें नस्लवाद के बारे में बताती हूं. मैं उन्हें बताती हूं कि कुछ लोग उन्हें इस अंतर की वजह से पसंद नहीं करते, लेकिन इससे उन्हें अपने आत्म सम्मान को खोना नहीं चाहिए."

व्यवहार के अलग नियम क़ायदे

पूर्वी लंदन के हैक्ने में दो बच्चों के पिता मर्विन हैरिसन इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस साल जब उनका बेटा स्कूल जाना शुरू करेगा तब उसे किस नज़र से देखा जाएगा.

हैरिसन कहते हैं, "मेरा बेटा आत्मविश्वास वाला है. एक काले पुरुष के लिए यह एक बड़ी चुनौती है."

वो कहते हैं कि वो अपने बेटे को उसके स्कूल जाना शुरू करने से पहले व्यवहार के अलग नियम-क़ायदे सिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

वो हर रोज़ इसके सामने से गुज़रते हैं और वहां पर कुछ मिनट के लिए रुकते हैं. इस दौरान वो अपने बेटे को यह संदेश देते हैं, "मुझे मेरे बाल अच्छे लगते हैं. मुझे मेरी त्वचा से प्यार है."

मर्विन ने डोप ब्लैक डैड्स नाम के ऑनलाइन ग्रुप की नींव रखी है. वो ख़ुद स्कूल में बुरे अनुभव से गुज़र चुके हैं. वहां पर उन्हें अपनी त्वचा के रंग की वजह से शिक्षकों के ग़लत सुलूक का सामना करना पड़ा था.

वो तय कर चुके हैं कि वो अपने बच्चों को काले होने की वजह से किसी बुरे बर्ताव और नकारात्मकता का शिकार नहीं होने देंगे. इस वजह से वो अपने बेटे को सकारात्मक और मज़बूत बना रहे हैं.

वो कहते हैं, "वो शीशे के सामने खड़ा होता है और कहता है, 'मेरे बाल अच्छे हैं, मुझे मेरी त्वचा से प्यार है, मैं कूदना, दौड़ना पसंद करता हूं और मैं दयालु इंसान हूं.' वो हर दिन इन चीज़ों को दोहराता है ताकि जीवन में कभी भी चुनौतियां आने पर वो उनका सामना कर सके."


बच्चों से नस्लवाद के बारे में कैसे बात करें

युनाइटेड नेशंस (यूएन) की बच्चों की एजेंसी यूनिसेफ ने ये सलाह दी हैः

पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिएः

  • उम्र के हिसाब से उचित और आसान भाषा का इस्तेमाल करें. अंतरों को पहचानें और उन्हें अच्छा बताएं.
  • यह साफ़ करें कि आप अपने बच्चे के सवालों को लेकर खुले हैं. अगर बच्चे किसी अलग दिखने वाले शख़्स की ओर इशारा करते हैं तो उन्हें चुप न कराएं. उन्हें यह एक अजीब मसला मानने के लिए मजबूर न करें.
  • अच्छाई पर ज़ोर दें - यह एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जिसे पांच साल से कम उम्र के बच्चे अच्छी तरह से समझते हैं. नस्लवाद को एक ग़लत परिपाटी के तौर पर बताएं.

6 से 11 साल के बच्चों के लिएः

  • ये बच्चे ऐसी जानकारियों से रूबरू होते हैं जिन्हें पचा पाना इनके लिए मुश्किल होता है. जिज्ञासु बनिए. सुनना और सवाल पूछना इस दिशा में पहला क़दम है.
  • साथ बैठकर मीडिया पर चर्चा करें- सोशल मीडिया और इंटरनेट आपके बच्चे के लिए सूचना का पहला ज़रिया हो सकते हैं.
  • खुलकर बात करें- ईमानदार होने और खुलकर बात करने से भरोसा पैदा होता है. इससे उनमें उत्साह पैदा होता है और वे अपने सवाल और चिंताएं आपके सामने ज़ाहिर करते हैं.

12 साल से बड़े बच्चों के लिएः

  • टीनेजर इन मसलों को ज़्यादा अच्छी तरह से समझने लगते हैं और वे अपने विचार ज़ाहिर करते हैं. यह पता कीजिए कि वे क्या सोचते हैं, न्यूज़, स्कूल या दोस्तों से उन्हें क्या जानकारी मिल रही है.
  • उनसे पूछिए कि वे हो रही घटनाओं के बारे में क्या सोचते हैं. उनके सामने अलग-अलग नज़रिये रखिए ताकि उनकी समझ बढ़ सके.
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