बेगुनाह शख्स 30 सालों तक काटता रहा जेल की सजा, जब रिहा हुआ तो...
65 साल के क्लाउड फ्रांसिस गारेट ने अपनी जिंदगी के 3 दशक जेल में बिताए। आखिरकार जब कोर्ट ने उन्हें रिहा किया, तो जेल से बाहर आने के कुछ महीनों बाद ही उनकी मौत हो गई।
अकसर क्राइम की दुनिया से कई अजीबोगरीब और शॉकिंग मामले सामने आते हैं। कई मामलों पर तो यकीन कर पाना काफी मुश्किल भी हो जाता है। कई बार गुनहगार लोग जेल से रिहा हो जाते हैं और कई बार कोई बेगुनाह बिना किसी गलती के सजा काट रहा होता है। जरा सोच कर देखिये कि कोई शख्स अपनी पूरी जवानी जेल में बिता देता है, वो भी इस गुनाह के लिए जो उसने कभी किया ही ना हो। तो ये कितना अजीब होगा। और उससे भी अजीब और भयावह ये कि अपनी जिंदगी के 3 से भी ज्यादा दशक बिना गलती के जेल में बिताने के बाद जब शख्स रिहा हुआ, तो उसकी मौत हो गई। जी हां! भावुक कर देने वाले ये मामला अमेरिका का है। मौत के बाद शख्स काफी सुर्खियों में बना हुआ है और लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं।

चर्चा में है शख्स
ये कहानी है 65 साल के क्लाउड फ्रांसिस गारेट की, जिनकी मौत की कहानी दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स की मौत 65 साल की उम्र में हुई है। वे टेनेसी के ही रहने वाले थे। कुछ महीने पहले ही जेल की सजा काटकर बाहर आए थे।

गर्लफ्रेंड की हुई थी मौत
दरअसल, क्लाउड की गर्लफ्रेंड लोरी ली लांस की आग में जलकर मौत हो गई थी। और फिर उन्हें अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या के मामले में गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था। क्लाउड को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

शख्स पर लगे थे आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक शख्स तीस साल पहले जब अपनी गर्लफ्रेंड के साथ था, तो वहां आग लग गई थी। इस घटना में उसकी गर्लफ्रेंड की मौत हो गई थी, जिसके बाद आरोप लगाए गए कि शख्स ने जानबूझकर आग लगाई है। शख्स ने कहा कि उसने आग नहीं लगाई, बल्कि वो तो सो रहा था। लेकिन उसे दोषी करार देते हुए सजा सुना दी गई।

वो बार-बार कहता रहा...
कई बार क्लाउड ने कोर्ट में अपने बेगुनाह होने की बात कही और रिहा करने की अपील की, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें 30 साल के अंदर हवालात में ही रहना पड़ा। इस साल मई के महीने में जांच में पाया गया कि जिन सबूतों को दिखाकर सुनवाई में उन्हें दोषी करार दिया गया, उनमें कई तरह की खामियां थीं।

30 साल तक जेल में रहा शख्स
जब क्लाउड की सजा को तीन दशक से भी ज्यादा का समय बीत चुका था, तो परिवार ने कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी। परिवार ने गवाहों को लेकर कोर्ट में पेश हुए, तो उन्हें मद्देनजर रखते हुए और पिछले सबूतों की खामियों के आधार पर कोर्ट ने अपना पूरा फैसला ही बदल डाला।

कुछ महीनों में हो गई मौत
कोर्ट ने शख्स को बेकसूर बताते हुए उसे रिहा कर दिया। लेकिन जेल से बाहर आने के कुछ महीनों बाद ही शख्स की किसी बीमारी के चलते मौत हो गई।












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