KUNO: 1947 में शिकार के बाद देश में विलुप्त हुए चीते, 70 साल बाद मिली शावकों के जन्म की खुशखबरी
Kuno Cheetah news: कूनो नेशनल पार्क में पूरे 70 सालों के बाद चार शावकों ने जन्म लिया है। साल 1947 के बाद 1952 में चीते कहीं नहीं दिखाई देने के चलते इन्हें विलुप्त घोषित कर दिया गया था।

Kuno National Park: मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से उस वक्त एक बड़ी खुशखबरी मिली, जहां एक मादा चीता ने एक या दो नहीं बल्कि एक साथ चार शावकों को जन्म दिया। सियाया नाम की मादा ने चार शावकों को जन्म दिया है। चीतों का जन्म भारत में पूरे 70 सालों के बाद हुआ है और ये सभी एकदम स्वस्थ हैं। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट कर शावकों के जन्म लेने की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की। 4 शावकों का जन्म लेना अपने आप में बहुत बड़ी बात है, क्योंकि साल 1947 के बाद चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
50 दिन तक क्वारंटाइन में थे चीते
कूनो नेशनल पार्क में चीते नए वातावरण में कितनी अच्छी तरह से ढल रहे हैं, इसका जीता जागता उदाहरण चार नए जन्मे शावक हैं। इन चार शावकों को नामीबिया से लाई गई मादा चीता ने जन्म दिया। 50 दिन तक इन्हें खास तरह के बाड़े में क्वारंटाइन किया गया था। इसके बाद तीन मादाओं और 2 नर चीतों को मुख्य जंगल में छोड़ा गया था। वर्तमान समय में कूनो में चीतों की संख्या 23 हो गई है।
तीन एशियाई चीतों को मारी गई थी गोली
बताते चलें कि कूनो नेशनल पार्क में 70 सालों के बाद ये खुशखबरी सामने आई है। भारत में पहले ही विलुप्त घोषित हो चुके चीतों को यहां की धरती पर जिंदा रखने का मिशन चल रहा है। देश में आखिरी चीते का शिकार साल 1947 में माना जाता है। इसके बाद भारत की धरती पर चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। उस वक्त झारखंड की कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने तीन एशियाई चीतों को गोली मार दी थी। माना जाता है कि ये भारत के आखिरी चीते थे।
1952 के बाद नहीं दिखा चीतों का नामो निशान
साल 1952 का वक्त था, जब कई रिसर्च करने के बाद भी चीतों का नामो निशान भी देश में दिखाई नहीं दिया। इसके बाद भारत सरकार ने इस जानवर को ऑफिशियली विलुप्त घोषित कर दिया था। इसके बाद यानी 70 सालों के बाद देश में चार शावकों के जन्म की खबर खुशी की लहर की तरह हर तरफ दौड़ गई है।
26 मार्च को हुई थी साशा की मौत
बीते दिनों खबर आई थी कि साल 2022 में यहां छोड़े गए आठ नामीबियाई चीतों में से एक की मौत हो गई थी। साशा नाम की इस चीता की मौत 26 मार्च को हुई थी। किडनी खराब होने के बाद उसका इलाज किया जा रहा था। उसे एक छोटे से बाड़े में शिफ्ट किया गया था। साशा लाख कोशिशों के बाद भी खाना नहीं खा रही थी। इसके बाद 26 तारीख को खबर मिली, कि साशा ने दम तोड़ दिया है।












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