पूर्वांचल माफियाओं की पसंद '9 एमएम' पिस्टल

जानकारी के अनुसार गत दिनों वाराणसी और उसके आसपास जितनी भी वारदातें हुई हैं उन सभी में बदमाशों ने '9 एमएम' की पिस्तौल का ही इस्तेमाल किया था। माफियाओं के बीच इस पिस्तौल की लोकप्रियता बढ़ी है जिससे पुलिस के होश उड़ गए हैं।
इस बाबत वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय प्रकाश ने कहा, "इस समय यह देखने में आ रहा है कि माफिया वारदातों को अंजाम देने के लिए इस पिस्तौल का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि इस हथियार के इस्तेमाल का अधिकार केवल पुलिस और सेना के पास है। "
उन्होंने कहा, "माफियाओं के पास यह पिस्तौल और इसके कारतूस कहां से आ रहे हैं? चिंता की बात है।" एक सवाल के जवाब में विजय प्रकाश ने कहा कि गत दिनों जो वारदातें वाराणसी में हुई हैं उसे अंजाम देने वाले सभी युवा ही थे। '9 एमएम' की पिस्तौल इन अपराधियों की पहली पसंद हमेशा से रही है लेकिन पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ये हथियार और कारतूस उन तक कैसे पहुंचते हैं।
इस सम्बन्ध में क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक प्रवीण सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में जांच करने से पता चला कि पूर्वाचल में न सिर्फ माफिया गिरोहों के सदस्यों की संख्या बढ़ी है बल्कि प्रतिबंधित '9 एमएम' की पिस्तौल पहली पसंद है। उन्होंने दावा किया है कि पुलिस अपराधियों तक इस पिस्तौल के पहुंचने के माध्यम का पता जल्द ही लगा लेगी।
उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल में वर्षो से कई माफिया सक्रिय हैं, जिसमें मुख्तार अंसारी, ब्रजेश सिंह, मुन्ना बजरंगी और कौशल पांडेय का गिरोह खास तौर से सक्रिय माना जाता है और इनमें से एक माफिया विधायक पर सेना की लाइट मशीलगंज (एलएमजी) भी रखने का आरोप लग चुका है।
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इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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