डॉक्टर पति, पत्नी टीचर: शादी के बाद से ही दोनों रहने लगे अलग, तलाक की अर्जी पर हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि दहेज प्रताड़ना के मामले को पति और ससुरालवालों के खिलाफ हथियार के तौर में इस्तेमाल करना क्रूरता की श्रेणी में आता है।

बिलासपुर, 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि दहेज प्रताड़ना के मामले को पति और ससुरालवालों के खिलाफ हथियार के तौर में इस्तेमाल करना क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस प्रकार प्रकरणों में पति अपनी पत्नी से तलाक लेने का अधिकार रखता है। अदालत ने एक चिकित्सक पति की तलाक के संबंध में की गई अपील को मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की है। इसके अतिरिक्त अदालत ने पति को अपनी शिक्षक पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपए भरण पोषण देने का फरमान भी सुनाया है।

पति डॉक्टर पत्नी टीचर शादी के बाद से रहने लगे अलग

पति डॉक्टर पत्नी टीचर शादी के बाद से रहने लगे अलग

मिली जानकारी के मुताबिक से सरगुजा जिले के चांदनी थाना क्षेत्र निवासी वाली महिला का विवाह साल 1993 में डॉ. रामकेश्वर सिंह के साथ हुआ था । महिला कोरबा जिले के बालको में निजी स्कूल में शिक्षिका है,जबकि पति डॉ. रामकेश्वर कोंडागांव के मर्दापाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टेड हैं। विवाह के केवल एक साल के अंदर ही दोनों पति-पत्नी नौकरी के कारण अलग रहने लगे थे।

पत्नी के दूर रहने के कारण रामकेश्वर सिंह ने 1996 में तलाक के लिए परिवाद दायर किया। इसके पश्चात उसकी पत्नी ने सरगुजा जिले के चांदनी थाने में अपने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज करा दिया था. महिला ने इस मामले में अपने पति, सास, ससुर, देवर और ननंद समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया।जिसमे लोवर कोर्ट में ट्रॉयल के दौरान आरोप सिद्ध ना होने पर पति और ससुरालवालों को बरी कर दिया गया था ।

सास की मौत पर भी नहीं आई बहू

सास की मौत पर भी नहीं आई बहू

पीड़ित पति ने साल 2013 में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत कुटुंब न्यायलय में तलाक के लिए केस दायर किया था, जिसके ख़ारिज होने के बाद रामकेश्वर सिंह ने हाईकोर्ट में अपील की थी।याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसकी पत्नी ने उसे फंसाने के लिए दहेज प्रताड़ना का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था, जिसे न्यायालय ने खारिज करके उन्हें बरी किया है। दहेज के प्रकरण में फंसाने के बाद उनकी मां की 6 जुलाई 1999 को मृत्यु हो गई। इस दरमियान भी उसकी पत्नी ससुराल नहीं आई।

अदालत ने दिया पति के पक्ष में फैसला

अदालत ने दिया पति के पक्ष में फैसला

इस पूरे प्रकरण की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महिला के अधिवक्ता के तर्कों को भी सुना। सभी पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायलय ने यह पाया कि विवाह के बाद से दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरूद्ध आरोप लगाते रहे हैं। वर्ष 1996 के बाद से पति पत्नी अलग-अलग रहकर कोर्ट में मुकदमेबाजी करते रहे हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि दहेज प्रताड़ना के मामले को महिला ने हथियार के रूप में उपयोग किया है, जो पति और ससुराल पक्ष के लोगों के साथ क्रूरता है। इस तरह के मामले में वैवाहिक संबंध टूटने के बाद जोड़ना संभव नहीं है। इसलिएपति की तरफ से तलाक के लिए लगाई गई राजी स्वीकार की जाती है।

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