छत्तीसगढ़: बच्चों में मोबाइल की लत है खतरनाक, मां ने छीना मोबाइल तो दे दी जान !
इस वक़्त में छोटे बच्चे भी ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल पर ही बिताते हैं। अगर आपके घर में भी ऐसा ही देखा जा रहा है, तो इससे सतर्क हो जाने की जरूरत है। क्योंकि बच्चो में मोबाइल फोन बेहद ही गलत प्रभाव डाल रहा है।
बिलासपुर, 18 जून। आज के समय में हर उम्र वर्ग के लोगों को मोबाइल से एक खास लगाव हो चुका है। हर व्यक्ति पूरे समय अपने मोबाइल का इस्तेमाल करते ही रहता है, लेकिन आज के इस वक़्त में छोटे बच्चे भी ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल पर ही बिताते हैं। अगर आपके घर में भी ऐसा ही देखा जा रहा है, तो इससे सतर्क हो जाने की जरूरत है। क्योंकि बच्चो में मोबाइल फोन बेहद ही गलत प्रभाव डाल रहा है। कुछ ऐसा ही घटा है छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में ,जहां मोबाइल फोन छीने जाने से नाराज बच्चे ने फांसी लगा ली है।

मां ने छीना मोबाइल,बच्चें ने दी जान
मिली जानकारी के मुताबिक हर समय मोबाइल में गेम खेलने वाले एक किशोर से नाराज मां ने उससे मोबाइल छीन लिया तो बेटे ने फांसी लगा ली।घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है,जहां शुभम विहार बापजी रेसीडेंसी कॉलोनी में रहने वाले 15 साल के बालक युवराज सिंह ,पिता सुधीर सिंह ने गुरुवार 16 जून को अपने घर में फांसी लगा ली है ।
बच्चे को फांसी में झूलता देखकर उसके परिजनों ने फंदा काटकर नीचे उतारा और तत्काल मंगला के एक निजी अस्पताल ले गए। हालत गंभीर पाकर बच्चे को अपोलो अस्पताल रिफर कर दिया गया,जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल से जानकारी मिलने पर सिविल लाइन पुलिस ने पंचनामा करके शव को पोस्टमार्टम करने भेज दिया है । थाना प्रभारी परिवेश तिवारी के मुताबिक किशोर की मां का कहना है कि उनका बेटा होनहार था ,लेकिन दिनभर मोबाइल में ही व्यस्त रहता था।

मोबाइल फोन के बुरे परिणामों से बचा सकती हैं यह 6 बातें
कुछ बातों को अगर आप ध्यान रखेंगे,तो बच्चों में मोबाइल फोन की आदत पड़ने से बचा सकते हैं।
(1) बच्चों को को खाना खाते समय फोन बिल्कुल ना इस्तेमाल करने दें।इस समय खुद भी फोन से दूरी बनाए रखें।
(2) जब बच्चा मोबाइल की जिद करने लगे, तब आप उसको कोई बहाना बनाकर किसी काम पर लगा सकते हैं,जिससे बच्चा व्यस्त होकर कुछ वक़्त के लिए मोबाइल को भूल जाएगा।
(3) अक्सर छोटे बच्चे मोबाइल में गेम्स खेलते रहते हैं, आप कोशिश करें कि वह इनडोर और आउटडोर गेम खेलें, कोशिश करें कि आप भी उनके साथ थोड़ा वक़्त बिताएं। इससे उनका वास्तविक जीवन की तरफ झुकाव बढ़ेगा।
(4) छोटी उम्र के बच्चों को जब भी मोबाइल दें, कोशिश करें कि उस समय मोबाइल डाटा,इंटरनेट सेवा बंद हो,इससे वह जल्द ही मोबाइल से ऊबने लगेंगे और उनका ध्यान कितने पढ़ने , क्राफ्ट,खेल जैसी रचनात्मक गतिविधियों की तरफ बढ़ेगा।
(5) बच्चे अक्सर बड़ों की नकल करते हैं,कोशिश करें कम से कम बच्चों के सामने सुबह उठते ही सबसे पहले ईश्वर की आराधना करें, बच्चों को गुड मॉर्निंग कहें,सीधे मोबाइल फोन ना उठायें। इससे होगा यह कि वह भी मोबाइल से पहले आपको तवज्जों देना शुरू कर देंगे।
(6) दिनभर मोबाइल पर बच्चों के सामने रील्स ना देखें, नहीं तो वह भी असल काम धाम छोड़कर उसी में व्यस्त हो जायेंगे।

अचानक ना छीने मोबाइल, कम उम्र से करें प्रयास
बच्चों से छोटी उम्र में ही मोबाइल छीना जा सकता है। किशोर होने पर अगर छिना जायेगा, तो वह बिगड़कर गलत कदम उठा सकते हैं। मोबाइल फोन एक प्रकार का नशा ही है। इससे कम उम्र के बच्चों को बचाने की बेहद जरूरत है। मोबाइल फोन डिप्रेशन का कारण भी बन सकता है। जब किसी व्यक्ति को कुछ नै सूझता,तो वह मोबाइल की तरफ अपना ध्यान लगाने लगता है। मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने से नींद की समस्या हो सकती है। वहीं इससे दिल से संबंधित बीमारियां होने का भी भय रहता है,क्योंकि मोबाइल फोन से निकलने वाली रोशनी का हमारी आंखों पर बुरा असर पड़ता है। मोबाईल फ़ोन की आदत के कारण सिरदर्द , रीढ़ की हड्डी में परेशानी, गर्दन में दर्द होना, बैचेनी और भूख न लगना और चिड़चिड़ाहट की समस्या भी बढ़ सकती है। इसके ज्यादा इस्तेमाल की लत लग जाने से उसे छुड़ाना भी मुश्किल हो जाता है।
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