Chhattisgarh: केंचुए बेचकर कमा लिए 5 लाख रुपये, गजब हैं छत्तीसगढ़ के गौठान
छत्तीसगढ़ सरकार की अधिकांश अधिकांश योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। इन योजनाओं का लाभ दिखने लगा है। बिलासपुर जिले के कोटा ब्लाक के शिवतराई गोठान की महिलाओं ने केंचुए से आर्थिक आज़ादी क
बिलासपुर, 19 अगस्त । छत्तीसगढ़ सरकार की अधिकांश अधिकांश योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। इन योजनाओं का लाभ दिखने लगा है। बिलासपुर जिले के कोटा ब्लाक के शिवतराई गोठान की महिलाओं ने केंचुए से आर्थिक आज़ादी की राह तलाश ली है। पिछले साल इस समूह ने पांच लाख रुपये का केंचुआ बेचाकर बम्पर मुनाफा कमाया था। इसके अलावा केंचुए से वर्मी कंपोस्ट यानी जैविक खाद बनाकर समूह ने 18 लाख 89 हजार रुपये अलग से कमा लिए हैं। इसी के साथ शिवतराई गांव की महिलाये इस बात की मिसाल बन गई हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे उठाया जा सकता है।

जो कमाती हैं ,उसका तीन फीसदी जाता है सुपोषण अभियान में
बताया जा रहा है कि शिवतराई की महिलाओं ने जब गौठान में काम करना शुरू किया,तो उनके पास 10 क्विंटल खाद की मांग आई है। पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से बाकी समूहों को भी केंचुए दिए गए थे,लेकिन शिवतराई की महिलाओं ने कड़े परिश्रम से इस काम में सफलता हासिल की है। सुखद पहलू यह भी है कि यह महिलाएं जो कमाती हैं उसका तीन फीसदी आसपास के गांव के बच्चों में कुपोषण दूर करने के मकसद से उनके पोषण आहार में खर्च करती हैं।

शुरू किया मुर्गी, बकरी पालन का काम
शिवतराई के इस गोठान में कई प्रकार की गतिविधियां देखी जा रही हैं । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों को सच करने की दिशा में छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के प्रयासों को यहां की महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं बेहतर तरीके से साकार कर रही हैं। गौपालन से लेकर गोबर से जैविक खाद का निर्माण करने के अलावा महिलाएं गौठानों में कई किस्म उत्पाद बनाने का काम कर रही हैं । जब इस कार्य में महिलाओं ने सफलता अर्जित कर ली, तब आगे की कार्ययोजना पर विचार कर रही हैं। गौठान प्रांगण में बकरी से लेकर कुक्कुट पालन का कार्य अब शुरू कर दिया गया है ।

केंचुओं ने बड़ी तकदीर
जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन से गोबर से खाद बनाने के अतिरिक्त वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना तैयार की थी । इसके लिए कृषि विभाग को काम सौंपा गया था । कृषि विभाग ने छत्तीसगढ़ के 25 चुनिंदा गौठानों का चयन करते हुए इंडोनेशिया से केंचुए मंगाकर 5- 5 किलोग्राम समूहों को बांटा था और केचुएं पालन की दिशा में कार्य करने की बात कही थी ।
केचुएं पालन के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं को ट्रेनिंग दिया। शिवतराई गौठान में काम करने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं ने कड़ी मेहनत कर स्वावलंबन के संग ही आर्थिक समृद्धि की राह खुद ही तलाश ली है।

छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों ने किया कमाल
गौठानों में महिला समूहों द्वारा गोधन न्याय योजना के अंतर्गत क्रय गोबर से बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट प्लस एवं अन्य उत्पाद तैयार किया जा रहा है। महिला समूहों द्वारा 17.27 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तथा 5.21 लाख क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट एवं 18,924 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा चुका है, जिसे सोसायटियों के माध्यम से शासन के विभिन्न विभागों एवं किसानों को रियायती दर पर प्रदाय किया जा रहा है।
महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी एवं मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे महिला समूहों को अब तक 78.62 करोड़ रूपए की आय हो चुकी हैं।
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