Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Rajasthan: राजपूत-जाटों ने एक थाली में जीमा खीचड़ा, 40 साल पहले कैसे बिगड़ गए थे रिश्‍ते?

Jat Rajput Khinchra Bikaner: राजस्‍थान के बीकानेर में जाट और राजपूतों के रिश्‍तों का नया अध्‍याय शुरू हो गया। राजपूत और जाटों ने एक जाजम पर बैठकर एक ही थाली में खींचड़ा जीमा है। बीकानेर स्‍थापना दिवस 2024 के मौके जाट-राजपूतों के रिश्‍तों में एक बार फिर से मिठास घुली है।

दरअसल, 537 साल पहले बीकानेर की स्‍थापना हुई थी। उसी के साथ राजपूत-जाट समाज के लोगों में एक साथ खींचड़ा जीमने की परम्‍परा शुरू हुई थी, मगर चुनावी रंजिश व आपसी मनमुटाव के चलते पिछले 40 साल से यह परम्‍परा बंद पड़ी थी।

Bikaner Rajput-Jat Khichda Jeeman

अब पूर्व उपराष्‍ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के नातिन और पूर्व विधायक नरपत सिंह राजवी के बेटे अभिमन्‍यु सिंह राजवी ने इस परम्‍परा को वापस जिंदा करने की दिशा में प्रयास शुरू किए, जो रंग भी लाए हैं।

बीकानेर के 537वें स्‍थापना दिवस के मौके पर राजवी ने लूणकरणसर तहसील के शेखसर और रुणिया बड़ा बास में रहने वाले पांडु गोदारों के वंशजों के अलावा बेनीवाल, कस्‍वां, सहारण, सींवर, पूनिया और सियाग जाति के जाटों को राजपूतों के साथ खींचड़ा जीमण का आमंत्रण दिया।

Bikaner Rajput-Jat Khichda Jeeman

बीकानेर के सुदर्शना नगर में गुरुवार को जय विलास में आयोजित राजपूत और जाट समाज के आयोजन में जाट समाज की सात बिरादरी के लोगों के अलावा राजपूत समाज के प्रमुख सरदार, बीकानेर राजपूत सभा के अध्‍यक्ष एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

मीडिया से बातचीत में राजवी परिवार के वंशज अभिमन्‍यू सिंह ने कहा कि चालीस साल से बंद पड़ी आपसी भाईचारे की परम्‍परा को फिर से शुरू किया गया है। अब हर साल अधिक मान-सम्‍मान के साथ इसका आयोजन किया जाएगा। अन्‍य जातियों के लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

जाट-राजपूत खींचड़ा जीमण परम्‍परा क्‍या है?

  • कहा जाता है कि बीकानेर के संस्‍थापक राव बीका अपने लिए नया राज्‍य बसाने जंगल प्रदेश में आए तब उनकी सबसे पहले गोदारा जाटों के सरदार पांडु गोदारा के साथ संधी हुई।
  • संधि व संबंधों को स्‍थायी रखने के लिए राव बीकानेर ने तब आदेश दिया था कि बीकानेर के आने वाले महाराजा का राजतिलक करने का अधिकार सिर्फ यहां के पांडु गोदारा के वंशजों को होगा।
  • सन 1488 में राव बीका ने जब कि बीकानेर किले की नींव रखवाई तब वहां मौजूद जाट सरदारों को मीठा खींचड़ा जीमाया था। तब से यह परम्‍परा चली आ रही थी।
  • बीकानेर स्‍थापना दिवस पर हर साल राव बीका के वंशज जाटों को अपने यहां बुलाकर उनके साथ खींचड़ा जीमते थे, मगर पिछले 40 साल से यह प्रथा बंद पड़ी थी।

जाट-राजपूत खींचड़ा जीमण का आखातीज बही में उल्‍लेख

बता दें कि राज दरबार की ओर से खींचड़ा जीमण की परम्‍परा का उल्‍लेख राज्‍य अभिलेखागार बीकानेर की सन 1845 की आखातीज की बही में मिलता है।

राजस्‍थान राज्‍य अभिलेखागार में संधारित सन 1845 की आखातीज बही में लिखा है कि राज परिवार बीकानेर की ओर से खींच बनाने के लिए बाजरी, मोठ, मूंग, ज्‍वार और मीठा सामग्री दी जाती थी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+