Chirag Paswan: क्या एक बार फिर टूट जाएगी चिराग की LJP
Chirag Paswan: एनडीए गठबंधन में शामिल बिहार की एलजेपी (रामविलास पासवान) के तीन सांसद भाजपा के संपर्क में होने की बात सामने आई है। साथ ही ये भी दावा किया जा रहा है कि एलजेपी के तीनों सांसद जल्द भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या चिराग पासवान का विद्रोही तेवर और लगातार मोदी सरकार के फैसलों की आलोचना करना चिराग पासवान को भारी पड़ने वाला है? क्या चिराग पासवन की एलजेपी के क्या एक बार फिर दो टुकड़े हो जाएंगे?

हालांकि ये दावा बिहार में एनडीए की विरोधी पार्टी आरजेडी के विधायक मुकेश रोशन ने किया है। उन्होंने दावा किया है कि पासवान की एलजेपी रामविलास पासवान के तीन सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग-अलग मुलाकात की है।
उन्होंने कहा चूंकि चिराग पासवान धमकी दे रहे हैं इसलिए भाजपा एलजेपी के सांसदों को तोड़ने में लगी हुई है। इसके साथ ही विधयक ने चिराग पासवान को सलाह दी कि बिहार के विकास के लिए चिराग को तेजस्वी यादव का साथ देना चाहिए।
बता दें चिराग पासवान पिछले कूुछ समय से विद्रोही तेवर दिखाते हुए लगातार मोदी सरकार के फैसलों की आलोचना कर रहे हैं, जिसके चलते भाजपा से उनकी तनानती साफ नजर आ रही है। जिसके चलते पार्टी में टूट की अटकलें तेज हो गई।
पार्टी की टूट पर क्या बोले चिराग पासवान?
हालांकि चिराग पासवान के एजेपी के नेता राजेश वर्मा ने इसके आरजेडी विधायक की कोरी कल्पना करार दिया है और दावा किया है कि हम चिराग को धोखा नहीं देंगे। वहीं एलजेपी में टूट को लेकर चिराग पासवान ने कहा "काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती है, हमारे सांसद इस बात पर स्वयं स्पष्ठीकरण दे चुके हैं।"
एलजेपी के हैं 5 सांसद
बता दें एनडीए गठबंधन में शामिल चिराग पासवान की एलजेपी के महज पांच सांसद हैं। संख्या बल के लिहाज से ये संख्या बहुत बड़ी नहीं है। पिछली बार रामविलास पासवान के दिवंगत होने के बाद पार्टी में टूट हुई थी तब भी एजेपी में चिराग पासवान समेत कुल छह ही सांसद थे और चिराग को छोड़कर बाकी पांच सांसदों ने बगावत कर अपनी अलग पार्टी बना ली थी और भाजपा का साथ निभाया था।
चाचा पारस ने भतीजे चिराग को मिला था धोखा
बता दें बिहार के दिग्गज नेता रामविालास पासवान की मृत्यु के बाद उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में बड़ी टूट हुई थी और एलजेपी के पांच सांसद जिनमें चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस, चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, चंदन सिंह और प्रिंस राज ने एकजुट होकर बगावत कर दी थी और चिराग पासवान को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया था। इतना ही नहीं पशुपति पारस को पार्टी का नेता चुन लिया गया था और राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ संसदीय दल के नेता भी चुना था।












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