मिट्टी घोटाले में फंसा लालू का परिवार, नीतीश की चुप्पी के क्या हैं मायने?

बिहार में मिट्टी घोटाले में लालू का परिवार फंसा है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ बोलने से बच रहे हैं। आखिर इसके पीछे क्या वजहें हैं?

पटना। बिहार के मिट्टी घोटाले में जबसे राजद मुखिया लालू के परिवार के शामिल होने की बात सामने आई है तबसे यहां की राजनीति गर्मा गई है। लोग इस घोटाले को लेकर तरह-तरह की चर्चा करते नजर आ रहे हैं तो विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी लगातार बयानबाजी करते हुए राज्य की जनता के सामने घोटालेबाजों का चेहरा उजागर करने की कोशिश में लगे हुए हैं। दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव अपने परिवार के ऊपर लगे इस घोटाले को लेकर एक ही बात कहते नजर आ रहे हैं कि यह आरोप बेबुनियाद है और हमारी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पर राज्य में इतने बड़े घोटाले का आरोप सरकार में शामिल पार्टी के ऊपर लगा है और बिहार के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आखिरकार चुप क्यों बैठे हैं? यह सबसे बड़ा सवाल है। हर छोटे बड़े मुद्दे को लेकर बयानबाजी करने वाले जदयू के नेता आखिरकार इतने बड़े घोटाले पर कुछ भी बोलने को तैयार क्यों नहीं हो रहे है?

नीतीश की चुप्पी पर क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित?

नीतीश की चुप्पी पर क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित?

लालू यादव परिवार के ऊपर लगे मिट्टी घोटाले के आरोप में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के द्वारा चुप्पी साधने को लेकर राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक साफ और स्वच्छ छवि के नेता हैं और वह घोटाले से कोसों दूर रहना चाहते हैं। इसी वजह से राज्य की जनता ने उन्हें तीसरी बार बिहार का मुखिया बनाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी इस घोटाले मामले को लेकर कुछ भी बोलने को इसलिए भी तैयार नहीं हो रही है क्योंकि अगर कहीं घोटाले का आरोप सही साबित हुआ तो राजद के साथ-साथ जदयू का भी घोटाले से नाम जुड़ जाएगा। हलांकि जदयू नेता का मानना है कि यह मामला भाजपा और राजद का है।

महागठबंधन का आंतरिक विवाद तो जिम्मेदार नहीं?

महागठबंधन का आंतरिक विवाद तो जिम्मेदार नहीं?

अगर दूसरे पहलू से इस मामले को देखा जाए तो घोटाले में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी की चुप्पी साधने का कारण आंतरिक विवाद भी हो सकता है क्योंकि जब से बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी है तब से राजनीतिक चर्चाओं में यह जोर शोर से सुनने को मिलता है कि महागठबंधन में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हलांकि जब भी इस तरह के सवाल महागठबंधन के नेताओं से पूछा गया है, उन्होंने इसे बेबुनियाद बताया है पर कई बार महागठबंधन में अलगाव भी देखने को मिला। जैसे नोटबंदी में नितीश कुमार का समर्थन और लालू प्रसाद यादव व कांग्रेस का विरोध। इसी तरह उत्तर प्रदेश चुनाव और बिहार विधान परिषद चुनाव में भी इन मुद्दों पर लालू और नीतीश के बीच दूरियां देखने को मिली है। अब ऐसा माना जाता है कि लालू प्रसाद परिवार जब से मिट्टी घोटाले के आरोप में घिरा है तब से जदयू लालू परिवार को कंट्रोल में रखने के लिए दबाव की राजनीति के तहत ऐसा कर रहा है।

छवि बचाने के लिए महागठबंधन से अलग हो सकते हैं नीतीश?

छवि बचाने के लिए महागठबंधन से अलग हो सकते हैं नीतीश?

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि घोटाले में मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी का चुप्पी साधना लालू प्रसाद यादव के लिए एक बहुत बड़ा संकेत है। वह उन्हें इस घोटाले में अकेला छोड़ अपने-आपको अलग कर सकते हैं। जब मौका मिलेगा तो जदयू यह भी कहने से पीछे नहीं हट सकती है कि हमने यह गठबंधन सामाजिक न्याय और शांति के लिए किया था ना कि करप्शन और घोटाले के लिए। इसके जरिए जदयू आसानी से राजद से अलग हो जाएगा।

सवाल को टालकर निकल गए नीतीश

सवाल को टालकर निकल गए नीतीश

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इस घोटाले को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा कि उनके काम करने का अंदाज ही कुछ इस तरह का है। जहां उनके प्रवक्ता और पार्टी के नेता हर छोटे बड़े मुद्दे को बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के सामने पेश करती है वही इतने बड़े मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रही है। जिसका कारण कुछ और हो सकता है। ये लोग कोई नया राजनीतिक दांव खेलने के फिराक में लगे हुए हैं।

तो इस मुद्दे को लेकर एक कार्यक्रम में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल जवाब किया गया तो उन्होंने संवाददाताओं के सवालों को अनसुना करते हुए इस मामले पर कुछ भी नहीं बोला और जांच की बात कहते हुए इस सवाल को वहीं खत्म कर दिया।

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