जानें कौन हैं सम्राट चौधरी?, किस वजह से छीना गया अध्यक्ष का पद, जानिए पीछे के कारण
Samrat Choudhary News: सम्राट चौधरी को बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर पार्टी आलाकमान ने दिलीप जायसवाल को राज्य में पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी है। दिलीप जायसवाल वैश्य समाज से आते है और सीमांचल की राजनीति में उनकी अच्छी बताई जा रही है।
हालांकि, अब ये सवाल खड़ा हो गया है कि एक साल के भीतर ही सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने का फैसला पार्टी को क्यों लेना पड़ा। आखिर ऐसा क्यों हुआ जो पार्टी आलाकमान ने सम्राट चौधरी को हटाकर दिलीप जायसवाल को ही प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चुना? लेकिन, इससे पहले आप यह जान लीजिए कि आखिर सम्राट चौधरी हैं कौन?

जानें कौन हैं सम्राट चौधरी?
सम्राट चौधरी, वर्तमान में बिहार सरकार में डिप्टी सीएम है और इनके पास वित्त समेत कई विभाग हैं। सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी एक सैन्यकर्मी थे, जो सैन्यकर्मी से राजनीति बने थे। सम्राट चौधरी कुशवाहा जाति से आते है और वो रबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रहे थे।
JDU से मोहभंग होने के बाद बीजेपी में हुए थे शामिल
सम्राट चौधरी 2014 में जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली जेडी यू सरकार में शामिल हो गए थे। हालांकि, तीन साल बाद उनका जेडीयू से भी मोहभंग हो गया और वे बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी ने सम्राट चौधरी उनकी क्षमता को पहचाना और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सम्राट चौधरी पर बड़ा दाव खेला था।
सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की ये थी बड़ी वजह
राजनीतिक जानकार बताते है कि सम्राट चौधरी को बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के दो वजहें काफी बड़ी थीं। पहली वजह उनकी जाति, जो कोईरी है। दूसरी वजह यह थी कि वो काफी आक्रामक बयानबाजी करते है। उनका आक्रामक होना और उनकी जाति के कारण बीजेपी ने उन्हें बिहार में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी थी।
बिहार में ज्यादा है कोईरी जाति की तादात
बिहार में ओबीसी वोट बैंक में यादवों के बाद सबसे ज्यादा संख्या बल कुर्मी-कोइरी का है। यादवों की आबादी तकरीबन 15 फीसदी है, तो कुर्मी-कोइरी की सात फीसदी। कुर्मी-कोइरी में भी कोइरी की आबादी ज़्यादा है। ऐसे में आरजेडी के यादव वोट बैंक का मुकाबला अगर किसी भी पार्टी को करना है तो उसमें कुर्मी-कोइरी वोट बैंक अहम भूमिका निभा सकता है।
कुशवाहा वोट बैंक में सेंधमारी बनीं अध्यक्ष पद जाने की वजह
राजनीतिक जानकारों की मानें तो सम्राट चौधरी को अध्यक्ष पद जाने की मुख्य वजह लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे रहे। दरअसल, लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया। पार्टी केवल 17 में से 12 संसदीय सीट ही जीत सकी। भाजपा से अच्छा प्रदर्शन जदयू का रहा जिसने 16 सीटें लड़कर 12 सीटों पर जीत प्राप्त की थी। बीजेपी के खराब प्रदर्शन के पीछे कुशवाहा मतदाताओं का सम्राट चौधरी के साथ खड़ा नहीं रहना बताया जा रहा है।
अपनी ही जाति को गोलबंद नहीं कर पाए सम्राट
लोकसभा चुनाव में सम्राट चौधरी अपनी जाति, जो बिहार की आबादी में 4.5 प्रतिशत हिस्सा रखता है, उसको गोलबंद नहीं कर पाए। वहीं, सम्राट चौधरी के नीतीश कुमार के खिलाफ भी बयान बाजी उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने की वजह बनी थी। दरअसल, सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को टारगेट करते हुए काफी बयानबाजी की थी। उस वक्त नीतीश कुमार उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाए पाए थे। लेकिन, अब नीतीश ने भी उनकी खिलाफत की, जिसके बाद पार्टी ने यह कदम उठाया।
विधानसभा चुनाव के लिए भी पार्टी ने बनाई नई रणनीति
वैश्य समाज हमेशा से बीजेपा का कोर वोटर्स रहा है। हालांकि, अब बिहार में समीकरण बदलने लगे है क्योंकि तेजस्वी यादव लगातार ए टू जेड यानी सर्वसमाज की राजनीति की बात करते आ रहे हैं। इसलिए भी बीजेपी आलाकमान ने दिलीप जायसवाल को बिहार बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया है।












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